Shri Sudershan Kavach
श्री सुदर्शन कवच भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र की शक्ति से युक्त एक अत्यंत प्रभावशाली कवच है, जो जीवन की सारी बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा करता है। इसके मंत्र और श्लोक भगवान सुदर्शन नारायण का पूजन और ध्यान कर उनके अनुकूल प्रभाव प्राप्त करने के लिए रचे गए हैं।
सुदर्शन कवच की मुख्य शुरुआत इस प्रकार होती है:
ॐ सुदर्शनाय विद्महे महाज्वालाय धीमहि तन्न: चक्र: प्रचोदयात्।
इसके बाद कवच में विभिन्न मंत्र और स्तोत्र होते हैं, जो शत्रुओं के नाश, रोग, दुष्ट प्रभाव, और मन की शांति हेतु पढ़े जाते हैं। कवच में भगवान सुदर्शन के रूप, शक्ति, और उनके चक्र की महिमा का वर्णन होता है।
इस कवच के पाठ से मन में शुद्धि, आत्मबल, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की बाधाओं का नाश होता है। भक्त इसे श्रद्धा से निरंतर पढ़ते हैं तो संकटों से रक्षा पाते हैं।
यहाँ सुदर्शन कवच के प्रारंभिक मंत्र और कुछ अंश प्रस्तुत हैं:
ॐ अस्य श्री सुदर्शन कवचमालामन्त्रस्य। विनियोगः।
ॐ क्षां अंगुष्ठाभ्यां नमः
ॐ हीं तर्जनीभ्यां नमः
ॐ श्रीं मध्यमाभ्यां नमः
ॐ सहस्रार अनाभिकाभ्यां नमः
(ध्यानम् उपास्महे नृसिंहाख्यं ब्रह्मवेदान्तगोचरम् ...)
(मुख्य मंत्र)
ॐ सुदर्शनाय विद्महे महाज्वालाय धीमहि तन्न: चक्र: प्रचोदयात्। (दो बार)
भो भो सुदर्शन नारसिंह माँ रक्षय रक्षय॥
पूरी कविता में कई दैवी नाम और अवतारों का उल्लेख होता है जो सुदर्शन के स्वरूप और शक्ति को दर्शाते हैं, साथ ही पूरी रक्षा कवच की पुष्टि करते हैं।
इस कवच को श्रद्धापूर्वक, मन लगाकर और सही विधि से पढ़ना चाहिए ताकि दिव्य सुरक्षा और आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
यह कवच श्री सुदर्शन के चक्र की भांति जीवन की सभी बाधाओं का निवारण करता है और भक्त को सम्पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है।
Here is the full Sanskrit text of the Shri Sudarshan Kavacham along with its transliteration:
ॐ सुदर्शनाय विद्महे महाज्वालाय धीमहि तन्नः चक्रः प्रचोदयात् ॥
(Sanskrit Transliteration)
Om Sudarshanaya Vidmahe Mahajwalaya Dhimahi Tannah Chakra Prachodayat ॥
This is the main Mahavakya mantra used in the Sudarshan Kavacham.
Beginning portion of the Sudarshan Kavacham:
नारद उवाच -
श्रुनुष्वे ध्विजश्रेष्ठ पवित्रं परमाद्भुतम्।
सुदर्शनं तु कवचं दृष्टदृष्टार्थसाधकम्॥
(Transliteration)
Narada Uvacha -
Shrunushva Dwijashreshtha Pavitraṃ Paramaadbhutam।
Sudarshanaṃ Tu Kavacam Drshta Drshtartha Sadhakam॥
(Meaning: Narada said — Oh great Brahmin, listen to this sacred and wonderful Sudarshan Kavacham which fulfills the desires of the devotee.)
The kavach then proceeds to protect different parts of the body by invoking various forms and attributes of Lord Sudarshan.
Example verses:
1. क्षां अंगुष्ठभ्यां नमः।
क्षां = kṣāṁ aṅguṣṭhabhyāṁ namaḥ।
(Salutations to Sudarshan protecting the thumb.)
2. हीं तर्जनीभ्यां नमः।
hīṁ tarjanībhyaṁ namaḥ।
(Salutations to Sudarshan protecting the index finger.)
3. श्रीं मध्यमाभ्यां नमः।
śrīṁ madhyamābhyāṁ namaḥ।
(Salutations to Sudarshan protecting the middle finger.)
4. सहस्रार अनामिकाभ्यां नमः।
sahasrāra anāmikābhyāṁ namaḥ।
(Salutations to Sudarshan protecting the crown and little finger.)
The kavach then goes on to protect head, eyes, ears, shoulders, arms, legs, etc., describing divine protection on each part.
It concludes with powerful mantras invoking Lord Sudarshan's energy for protection from all adversities, evil forces, and obstacles.Sanskrit:
नारद उवाच -
श्रुनुष्वे ध्विजश्रेष्ठ पवित्रं परमाद्भुतम् ।
सुदर्शनं तु कवचं दृष्टदृष्टार्थसाधकम् ॥Transliteration:
Narada Uvāca -
Śrunuṣve Dhvijaśreṣṭha Pavitraṃ Paramādbhutam ।
Sudarśanaṃ Tu Kavacaṃ Dṛṣṭadṛṣṭārthasādhakam ॥Sanskrit:
सर्वपापघ्नं सर्वदुष्टप्रमेथनाशनम् ।
ध्यान एव प्रसिद्धं तत्तेऽनुज्ञातुं भद्रं मम ॥Transliteration:
Sarvapāpaghnaṃ Sarvaduṣṭapramethanāśanam ।
Dhyāna Eva Prasiddhaṃ Tatte'nujñātuṃ Bhadraṃ Mama ॥Sanskrit:
ॐ सुदर्शनाय विद्महे महाज्वालाय धीमहि ।
तन्नः चक्रः प्रचोदयात् ॥Transliteration:
Om Sudarśanāya Vidmahe Mahājvālāya Dhīmahi ।
Tannaḥ Cakraḥ Pracodayāt ॥Sanskrit (Protection to parts of the body):
क्षां अंगुष्ठाभ्यां नमः ।
हीं तर्जनीभ्यां नमः ।
श्रीं मध्यमाभ्यां नमः ।
ह्लीं अनामिकाभ्यां नमः ।
क्लीं कनिष्ठाभ्यां नमः ॥Transliteration:
Kṣāṁ Aṅguṣṭhābhyāṃ Namaḥ ।
Hīṁ Tarjanībhyaṃ Namaḥ ।
Śrīṁ Madhyamābhyāṃ Namaḥ ।
Hlīṁ Anāmikābhyāṃ Namaḥ ।
Klīṁ Kaniṣṭhābhyāṃ Namaḥ ॥
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