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कृत्या‑साधना मंत्र

कृत्या‑साधना एक तांत्रिक शक्ति‑साधना है जिसमें शिव की एक अत्यंत तीव्र विनाशकारी शक्ति “कृत्या” को जागृत कर मारण, शत्रुनाश, रक्षा या अन्य आध्यात्मिक कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है। यह साधना आमतौर पर गुरु‑दीक्षा और विशेष अनुष्ठान के बिना सीधे नहीं की जाती, क्योंकि इसकी शक्ति इतनी सीधी और भारी मानी गई है कि गलत या अनुचित उपयोग से फल प्रतिकूल या घातक हो सकता है।  ### कृत्या क्या है? कुछ सम्प्रदायों के अनुसार कृत्या शिव की एक विशिष्ट उद्रेक‑शक्ति है, जो किसी भी वस्तु या व्यक्ति को बहुत कम समय में नष्ट कर सकती है; इसे “प्रेरण‑शक्ति” या मारण‑विद्या के रूप में भी बताया जाता है। कुछ गुरुपरम्पराओं में कृत्या को देवी/देवता की तरह नहीं, बल्कि एक “मानसिक शक्ति‑रूपी” या “मारण‑प्रेत‑सदृश” उर्जा के रूप में देखा जाता है, जिसका रूप दार या देवी के रूप में भी लेपिट कर लिया जा सकता है।  ### साधना की प्रकृति कृत्या‑साधना को आमतौर पर एक मारण या “शत्रुनाशक” प्रयोग के रूप में देखा जाता है, और इसे अधिकांश गुरुओं के अनुसार केवल विशेष परिस्थितियों, अत्यंत आवश्यकता तथा गहन ध्यान, दीक्षा और रक्षा‑मंत्र ...

Yakshinis & Chetakas

Yakshinis and Chetakas At heart a Shakta, outwardly a Shaiva, in gatherings a Vaishnava, in thus many a guise the Kaulas wander on earth - Kaula Upanishad The Indian tradition has a multitude of spirits occupying the three worlds. Many are the servants of Lord Shiva , and some have been pressed into the tantrik cause, as spirits which can, for example, solve all your financial problems or find that perfect lover. Below are some examples. The chetakas appear in Tantrarajatantra, an encyclopaedic work of Shri Vidya. The yakshas (male) and yakshinis (female) look after treasure hidden in the earth, and come under the dominion of the god Kubera. The 64 Chetakas These are servitors of Shiva, akin to elementals. Once drawn into service, they require nourishment. You have to keep this work force happy if you take them on. They are (1) Amorous One (2) Vehicle (3) Heroic One (4) Separator (5) Angry One (6) Poet (7) Roaring like a Lion (8) Very Noisy (9) Beautiful Necked One (10) Ape (11) Deceit...

आकाश गमन सिद्धि: रहस्य और तांत्रिक विधि

आकाश गमन सिद्धि: रहस्य और तांत्रिक विधि प्राचीन योग और तंत्र ग्रंथों में 'आकाश गमन सिद्धि' को अष्ट-सिद्धियों के समान महत्वपूर्ण माना गया है। इस सिद्धि का तात्पर्य केवल भौतिक शरीर से उड़ना नहीं है, बल्कि अपनी चेतना और सूक्ष्म शरीर (Astral Body) को भौतिक सीमाओं से बाहर निकालकर ब्रह्मांड के किसी भी स्थान पर पल भर में पहुँचने की क्षमता प्राप्त करना है। उच्च कोटि के योगी और तपस्वी इस सिद्धि के माध्यम से दिव्य लोकों की यात्रा करते हैं और गुरुओं का सानिध्य प्राप्त करते हैं। 1. आकाश गमन सिद्धि के आध्यात्मिक लाभ सूक्ष्म शरीर भ्रमण (Astral Travel): साधक अपनी इच्छा से शरीर से बाहर निकलकर किसी भी स्थान की गुप्त जानकारी प्राप्त कर सकता है। समय और स्थान की सीमा से मुक्ति: साधक के लिए दूरियां समाप्त हो जाती हैं और वह दिव्य लोकों का अनुभव कर सकता है। प्राण ऊर्जा पर नियंत्रण: यह साधना साधक के प्राणों को ऊर्ध्वगामी बनाती है, जिससे आयु बढ़ती है और शरीर हल्का महसूस होता है। दिव्य दृष्टि की प्राप्ति: साधक को अदृश्य वस्तुओं और शक्तियों को देखने की क्षमता प्राप्त होती है। 2. साधना की पूर्व तैयारी औ...

विश्वावसु गंधर्व राज साधना | गन्धर्व साधना

गन्धर्व साधना: कला, सौंदर्य और सम्मोहन  गन्धर्व देव योनि की एक अत्यंत तेजस्वी और कलात्मक शक्ति हैं। वे इन्द्र की सभा के मुख्य गायक हैं और सुंदरता, संगीत, नृत्य तथा प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं। 'गन्धर्व साधना' उन साधकों के लिए अत्यंत फलदायी है जो कला के क्षेत्र में शिखर प्राप्त करना चाहते हैं, या अपने व्यक्तित्व में एक दिव्य आकर्षण और सम्मोहन शक्ति जाग्रत करना चाहते हैं। यह साधना साधक को मानसिक तनाव से मुक्त कर जीवन में आनंद और उल्लास भर देती है। 1. गन्धर्व साधना के प्रमुख लाभ कला और संगीत में सिद्धि: संगीत, गायन, अभिनय और लेखन के क्षेत्र में विलक्षण प्रतिभा प्राप्त होती है। सम्मोहक व्यक्तित्व: साधक के चेहरे पर एक दिव्य आभा (Aura) आती है, जिससे लोग उसकी ओर स्वतः आकर्षित होते हैं। सुखद प्रेम संबंध: दांपत्य जीवन और प्रेम संबंधों में मधुरता और प्रगाढ़ता आती है। मानसिक शांति: मन प्रसन्न रहता है और डिप्रेशन या चिंता जैसी समस्याएँ समाप्त हो जाती हैं। 2. साधना का उचित समय और तैयारी शुभ समय: किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार, पूर्णिमा या बसंत पंचमी से यह साधना शुरू करें। वस्त्र और आस...

Maa Ashu (Aashu/Asho) Mehtarani”

​ “Maa Ashu (Aashu/Asho) Mehtarani” is a powerful Shakta/Shabar deity invoked in folk-tantric traditions—especially in Bengal and surrounding regions—for binding or removing black magic, pret/bhoot afflictions, and hostile tantric works.  Her mantras are classed as **Shabar mantras**: direct, vernacular, result-oriented formulas often used with simple ritual materials and strict discipline. ## Who is Ashu Mehtarani? - She is described in Shabar/tantra lineages as a swift-acting goddess who can **bind or cut rival tantric works (chouki, jadoo-tona)**, neutralize pret/bhoot, and protect against malefic influences. - Some traditions call her **“Bangale ki Aaso Mehtarani Mai”**, emphasizing her Bengal origin and her role in “bringing speech back” (vaacha) when someone is struck by muting/affliction mantras. - She is often depicted as riding with Bhairava/Hanuman and entourages of vīras/yoginīs in protective processions. ## Common Shabar Mantra (for protection/binding of evils) One wide...

नाग साधना: गुप्त रहस्यों और सुरक्षा की प्राप्ति

नाग साधना: गुप्त रहस्यों और सुरक्षा की प्राप्ति प्राचीन भारतीय संस्कृति और तंत्र शास्त्र में नागों को अत्यंत रहस्यमयी और शक्तिशाली शक्तियों के रूप में माना गया है। वे पाताल लोक के अधिपति हैं और पृथ्वी के गुप्त खजानों के रक्षक माने जाते हैं। 'नाग साधना' का मुख्य उद्देश्य नाग देवों को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त करना, कालसर्प दोष का निवारण करना और जीवन में अनचाहे भय एवं शत्रुओं से सुरक्षा प्राप्त करना है। यह साधना साधक को एक विशेष प्रकार का तेज और सुरक्षा कवच प्रदान करती है। 1. नाग साधना के प्रमुख लाभ कालसर्प दोष निवारण: कुंडली में मौजूद कालसर्प योग के नकारात्मक प्रभावों को कम करती है। गुप्त धन और ज्ञान: माना जाता है कि नागों की कृपा से गुप्त विद्याओं और धन के मार्ग खुलते हैं। शत्रु और विष से सुरक्षा: यह साधना साधक को शत्रुओं के षड्यंत्रों और किसी भी प्रकार के विषैले प्रभाव से बचाती है। भूमि और भवन सुख: नाग देव भूमि के रक्षक हैं, अतः इनकी कृपा से भूमि और संपत्ति संबंधी विवाद सुलझ जाते हैं। 2. साधना का उचित समय और तैयारी शुभ समय: नागपंचमी का दिन इस साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ ह...

Ganesha (Ashtavinayaka) Forms of Ganpati & Sadhana Procedure

​ Ganpati (Ganesha) is worshipped in many distinct forms across Hindu tradition, broadly grouped into: the 32 classical iconographic forms used for home and temple installation, the eight self‑manifest (svayambhu) Ashtavinayaka forms of Maharashtra, and a few special ritual/material forms like Shwetark Ganpati.  Use the universal Ganesha bija mantra **ॐ गं गणपतये नमः** (*Om Gam Ganapataye Namah*) for any form if a specific mantra is not available; for the 32 forms, many traditions also use **ॐ श्रीं गं क्लीं ग्लौं गणपतये वरवरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा** as a general 32‑form mantra. # Form (Sanskrit/Hindi) Mantra (Devanagari) Transliteration Core purpose 1 Bala Ganapati ॐ बाल गणपतये नमः Om Bala Ganapataye Namah Children, new beginnings, protection of kids. 2 Taruna Ganapati ॐ तरुण गणपतये नमः Om Taruna Ganapataye Namah Youthful energy, career start, competitions. 3 Bhakti Ganapati ॐ भक्ति गणपतये नमः Om Bhakti Ganapataye Namah Devotion, grace, daily upa...

डाकिनी साधना: रहस्य और विधान, | भूतनी साधना: रहस्य और विस्तृत विधान

डाकिनी साधना: रहस्य और विधान डाकिनी साधना तंत्र जगत की एक अत्यंत शक्तिशाली और उग्र साधना है। डाकिनी को अक्सर माँ काली की सहायक शक्तियों के रूप में जाना जाता है। इनकी साधना मुख्य रूप से शत्रुओं के समूल नाश, भूत-भविष्य की गुप्त जानकारी प्राप्त करने और असाध्य भौतिक कार्यों को सिद्ध करने के लिए की जाती है। डाकिनी साधना जितनी जल्दी सिद्ध होती है, उतनी ही यह साहसी और दृढ़ संकल्प वाले साधकों के लिए उचित मानी गई है। यह साधना साधक को एक विशेष प्रकार की निर्भयता और वर्चस्व प्रदान करती है। सावधानी: यह एक अत्यंत उग्र साधना है। इसे केवल एक अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। गुरु न होने पर भगवान शिव (महाकाल) को गुरु मानकर ही प्रारंभ करें। 1. आवश्यक सामग्री डाकिनी यंत्र (ताम्र या भोजपत्र पर निर्मित)। काले हकीक की माला। रक्षा माला (साधना के समय गले में अनिवार्य)। काले रंग का आसन और पहनने के लिए काले वस्त्र। शुद्ध सरसों के तेल का चौमुखी दीपक। काले तिल, उड़द, और लोबान की धूप। लाल पुष्प और मदिरा (भोग हेतु)। (नोट: यन्त्र , माला , रक्षा माला , गुटिका मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित होनी चाहिए।) 2. साध...