दस महाविद्या स्तोत्र
दस महाविद्या स्तोत्र नमस्ते चण्डिके । चण्डि । चण्ड-मुण्ड-विनाशिनि । नमस्ते कालिके । काल-महा-भय-विनाशिनी । ।।1।। हे चण्डिके, तुम्हें नमस्कार है! हे चण्डि, चण्ड और मुण्ड का नाश करने वाली देवी को प्रणाम। हे कालिके, काल के महा भय का नाश करने वाली देवी को प्रणाम। शिवे । रक्ष जगद्धात्रि । प्रसीद हरि-वल्लभे । प्रणमामि जगद्धात्रीं, जगत्-पालन-कारिणीम् ।।2।। हे शिवे, जगत की धात्री, रक्षा करो। हे हरि की वल्लभा, प्रसन्न होइए। मैं उस जगत् की धात्री को प्रणाम करता हूँ, जो इस संसार का पालन करती हैं। जगत्-क्षोभ-करीं विद्यां, जगत्-सृष्टि-विधायिनीम् । करालां विकटा घोरां, मुण्ड-माला-विभूषिताम् ।।3।। हे देवी, जो जगत् में हलचल उत्पन्न करती हैं, सृष्टि का विधान करती हैं, मैं उन विकट और भयानक रूप वाली मुण्डमाला से विभूषित देवी को प्रणाम करता हूँ। हरार्चितां हराराध्यां, नमामि हर-वल्लभाम् । गौरीं गुरु-प्रियां गौर-वर्णालंकार-भूषिताम् ।।4।। जो हर द्वारा पूजित हैं, हर द्वारा आराधित हैं, हर की वल्लभा हैं, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ। जो गौरी हैं, गुरु की प्रिय हैं, और गौर वर्ण के आभूषणों से सुसज्जित हैं। हरि-प्रिया...