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Svadamstra Yogini Mantra

Svadamstra Yogini is one of the 64 Yoginis in tantric traditions, revered for her fierce, protective energy symbolized by canine-like sharp teeth (svadamstra meaning "own tooth" or fang). She appears in texts like the Chausath Yogini lists, often paired with Yogini Vikartana, embodying a form that wards off evil and provides security rather than mere intimidation. ## Mantra Her associated mantra follows the standard Chausath Yogini pattern:   ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री स्वदंष्ट्रा योगिनी स्वाहा।   (Om Aim Hreem Shreem Shree Svadamstra Yogini Swaha.)   This is chanted for invoking her swift protective powers during sadhana. ## Significance Svadamstra grants siddhis like obstacle removal and fearlessness, aligning with Kali Kula energies for rapid material and spiritual gains. Sadhaks perform her upasana on Yogini Ekadashi or Fridays, using rice, saffron, and energized malas for 21 days to manifest her presence. ## Sadhana Guidelines - Begin post-10 PM after bath;...

रक्त चामुंडा /Rakta Chamunda Mantra & Sadhana Vidhi

रक्त चामुंडा (रक्त‑चामुंडा / Rakta Chamunda) एक उग्र, शत्रु‑विनाशक और अत्यंत तीव्र तांत्रिक शक्ति हैं, जिनके मंत्र आमतौर पर गुप्त‑परंपरा, वशीकरण, शत्रु‑नाश और रक्षा‑साधना के लिए माने जाते हैं।  यहाँ एक सामान्य‑स्तरीय रक्त‑चामुंडा मंत्र दिया जा रहा है, किंतु ध्यान रहे कि ऐसी साधनाएँ परंपरागत गुरु‑दीक्षा, शुद्धिकरण और नियम‑अनुरोध के बिना अत्यंत खतरनाक हो सकती हैं।  ### एक सामान्य रक्त‑चामुंडा मंत्र एक लोकप्रिय रूप इस प्रकार है (देवनागरी लिपि में):   **“ॐ ह्रीं फट् रक्तचामुण्डेश्वरी शत्रुजीवितानाशिनी एह्येहि इष्टान् आकर्षय हूं ह्रीं क्लीं फट् स्वाहा।”**  इसी के अनुरूप अन्य भाव‑स्वरूप भी चलते हैं, जैसे:   - “ॐ रक्त चामुंडे …… में वशमानय कुरु कुरु स्वाहा” (यह शाबर‑वशीकरण शैली का एक रूप है)।  - “ॐ सिद्धि रक्त चामुंडे घुरंघुरं अमुकी वशमानय स्वाहा” (रक्त‑चामुंडा यक्षिणी वशीकरण‑मंत्र का रूप)।  ### उपयोग और सावधानियाँ   - इन मंत्रों का जप अक्सर शत्रु‑स्तम्भन, वशीकरण, अथवा कठिन जीवन‑समस्याओं के लिए किया जाता है, किंतु परंपरागत ग्रंथों में इन्ह...

नृसिंह कवच /नृसिंह मंत्र

नृसिंह कवच  नृसिंह कवच प्रह्लाद द्वारा ब्रह्मांड पुराण से लिया गया एक शक्तिशाली रक्षात्मक स्तोत्र है, जो शरीर के प्रत्येक भाग और दिशाओं की रक्षा करता है। ## ध्यान विधि हेमसिंहासन पर विराजमान स्वर्णिम नृसिंह का ध्यान करें, जिनके चार भुजाएं हैं—शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए। लक्ष्मी उनके वाम में विराजमान हों, तीन नेत्रों वाले, जटाधारी, सिंहनाद करने वाले। हृदय कमल में नृसिंह को स्थापित कर पाठ आरंभ करें। ## पूरा कवच पाठ ``` नृसिंह-कवचं वक्ष्ये प्रह्लादेनोदितं पुरा। सर्वरक्षाकरं पुण्यं सर्वोपद्रव-नाशनम्॥१॥ सर्वसंग्रह-कंरं चैव स्वर्ग-मोक्ष-प्रदायकम्। ध्यात्वा नृसिंहं देवेशं हेम-सिंहासन-स्थितम्॥२॥ स्वहृद्-कमल-संवासिनं कृत्वा तु कवचं पठेत्। नृसिंहो मे शिरः पातु लोकरक्षात्म-संभवः। सर्वगोऽपि स्तंभ-वासः फालं मे रक्षतु ध्वनन्॥३॥ नृसिंहो मे दृशौ पातु सोम-सूर्याग्नि-लोचनः। वक्त्रं पात्विन्दु-वदनः सदा प्रह्लाद-वन्दितः॥४॥ नृसिंहः पातु मे कण्ठं स्कंधौ भूभरणान्तकृत्। दिव्यास्त्र-शोभित-भुजो नृसिंहः पातु मे भुजौ॥५॥ करौ मे देव-वरदो नृसिंहः पातु सर्वतः। हृदयं योगि-साध्यश्च निवासं पातु मे हरिः॥६॥ न...

Gridhrakarani Yogini Mantra Sadhana

Gridhrakarani Yogini Gridhrakarani Yogini sadhana typically employs a specific beeja mantra rooted in Tantric Kaula traditions, chanted after guru diksha for safe invocation. ## Core Mantra The primary mantra for her worship is **ॐ ह्रीं क्लीं ग्रिध्राकारिण्यै नमः** (Oṃ Hrīṃ Klīṃ Gridhrakāriṇyai Namaḥ) or variations like **ॐ ग्रिं ग्रिध्राकारिण्यै फट् स्वाहा** (Oṃ Griṃ Gridhrakāriṇyai Phaṭ Svāhā), infusing vulture-energy (gridhra) for protection and obstacle removal [ from prior]. ## Sadhana Guidelines Chant 108 or 1008 times daily at midnight using a rudraksha or crystal mala, facing north in a secluded space with black sesame offerings. Pair with nyasa to place her shakti in the manipura chakra, aligning with your tantric routines for kundalini rise and healing gridhrasi-like pains. ## Precautions Initiation is essential to harness her fierce Shakti without backlash; avoid during eclipses or inauspicious tithis. In Kashmiri texts, she's linked to Bhairava for amplified siddhis in...

श्रीवाराहीसहस्रनामस्तोत्रं

श्री वाराहीसहस्रनामस्तोत्रम् उड्डामरतन्त्र्न्तर्गतम् ॥ श्रीवाराहीध्यानम् ॥ नमोऽस्तु देवि वाराहि जयैङ्कारस्वरूपिणि । जय वाराहि विश्वेशि मुख्यवाराहि ते नमः ॥ १॥ वाराहमुखि वन्दे त्वां अन्धे अन्धिनि ते नमः । सर्वदुर्ष्टप्रदुष्टानां वाक्स्तम्भनकरे नमः ॥ २॥ नमः स्तम्भिनि स्तम्भे त्वां जृम्भे जृम्भिणि ते नमः । रुन्धे रुन्धिनि वन्दे त्वां नमो देवेशि मोहिनि ॥ ३॥ स्वभक्तानां हि सर्वेषां सर्वकामप्रदे नमः । बाह्वोः स्तम्भकरीं वन्दे जिह्वास्तम्भनकारिणीम् ॥ ४॥ स्तम्भनं कुरु शत्रूणां कुरु मे शत्रुनाशनम् । शीघ्रं वश्यं च कुरु मे याऽग्नौ वागात्मिका स्थिता ॥ ५॥ ठचतुष्टयरूपे त्वां शरणं सर्वदा भजे । हुमात्मिके फड्रूपेण जय आद्यानने शिवे ॥ ६॥ देहि मे सकलान् कामान् वाराहि जगदीश्वरि । नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमो नमः ॥ ७॥ ॥ वाराही गायत्री ॥ वराहमुख्यै विद्महे । दण्डनाथायै धीमही । तन्नो अर्घ्रि प्रचोदयात् ॥ ॥ अथ श्रीआदिवाराहीसहस्रनामस्तोत्रम् ॥ अथ ध्यानम् । वन्दे वाराहवक्त्रां वरमणिमकुटां विद्रुमश्रोत्रभूषां हाराग्रैवेयतुङ्गस्तनभरनमितां पीतकौशेयवस्त्राम् । देवी...

कृत्या‑साधना मंत्र

कृत्या‑साधना एक तांत्रिक शक्ति‑साधना है जिसमें शिव की एक अत्यंत तीव्र विनाशकारी शक्ति “कृत्या” को जागृत कर मारण, शत्रुनाश, रक्षा या अन्य आध्यात्मिक कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है। यह साधना आमतौर पर गुरु‑दीक्षा और विशेष अनुष्ठान के बिना सीधे नहीं की जाती, क्योंकि इसकी शक्ति इतनी सीधी और भारी मानी गई है कि गलत या अनुचित उपयोग से फल प्रतिकूल या घातक हो सकता है।  ### कृत्या क्या है? कुछ सम्प्रदायों के अनुसार कृत्या शिव की एक विशिष्ट उद्रेक‑शक्ति है, जो किसी भी वस्तु या व्यक्ति को बहुत कम समय में नष्ट कर सकती है; इसे “प्रेरण‑शक्ति” या मारण‑विद्या के रूप में भी बताया जाता है। कुछ गुरुपरम्पराओं में कृत्या को देवी/देवता की तरह नहीं, बल्कि एक “मानसिक शक्ति‑रूपी” या “मारण‑प्रेत‑सदृश” उर्जा के रूप में देखा जाता है, जिसका रूप दार या देवी के रूप में भी लेपिट कर लिया जा सकता है।  ### साधना की प्रकृति कृत्या‑साधना को आमतौर पर एक मारण या “शत्रुनाशक” प्रयोग के रूप में देखा जाता है, और इसे अधिकांश गुरुओं के अनुसार केवल विशेष परिस्थितियों, अत्यंत आवश्यकता तथा गहन ध्यान, दीक्षा और रक्षा‑मंत्र ...

गडा धन निकालने का शाबर मंत्र

गडा धन निकालने का शाबर मंत्र शाबर मंत्र खजाने (गडा धन या निधि) के लिए विशेष रूप से नाथ परंपरा और तांत्रिक ग्रंथों में वर्णित होते हैं। ये मंत्र सपने या संकेत के माध्यम से गुप्त धन का स्थान बताते हैं।  ## मुख्य निधि दर्शन शाबर मंत्र प्रशान्तः शान्तिदः शुधः शंकर प्रिय बान्धवः। अष्टमूर्ति निधिश्च ज्ञानः चक्षुस्तुल्य उत्तमयः॥ जगद्रक्षा करो लन्तो मायामन्त्रौषधिमय। सर्वसिद्धि प्रदो वैद्याः प्रभविष्णुरिति श्रुतिः॥। रात को सोने से पहले 108 बार जाप करें, 7-21 दिनों तक।  ## गडा धन निकालने का मंत्र ॐ नमो आदेश गुरु को ईश्वर को, पृथ्वी में गड़े धन को बाहर लाओ, ना लाओ तो गोरख कल्ले की दुहाई। सप्तरात्रि जाप से स्थान का संकेत मिलता है।  ## साधना विधि - रुद्राक्ष माला से उत्तर दिशा में जाप, काले आसन पर बैठें। - घी दीपक जलाएं, शाकाहारी रहें, ब्रह्मचर्य पालन करें। - सिद्धि के बाद खजाने पर मंत्र पढ़कर खुदाई करें।  गुप्त खजाना शाबर मंत्र के सावधानियां गुप्त खजाना शाबर मंत्र की साधना अत्यंत शक्तिशाली और उग्र होती है, इसलिए कठोर सावधानियां बरतें। बिना गुरु दीक्षा के इसे न करें, अन्यथा मानस...

Shabar Mantra for Money ( Lakshmi shabar mantras)

Shabar Mantra for Money शाबर मंत्र धन प्राप्ति के लिए एक शक्तिशाली साधना है जो सरल और त्वरित फलदायी होती है। यह मंत्र देवी लक्ष्मी और काल भैरव की कृपा से धन-समृद्धि आकर्षित करता है।  ## मुख्य शाबर मंत्र ॐ नमः काल भैरवाय, धन देहि, संपत्ति देहि, यशः देहि, श्रीं ह्रीं क्लीं स्वाहा।  ## साधना विधि साधना 21 दिनों तक चले, रोज पूर्व या उत्तर दिशा में बैठकर रुद्राक्ष या कमलगट्टा माला से 108 बार जाप करें। पहले दिन लक्ष्मी-भैरव को धन की कामना से संकल्प लें, शाकाहारी भोजन रखें और ब्रह्मचर्य पालन करें।  ## दूसरा लोकप्रिय मंत्र ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन पालिनी लक्ष्मी मम दरिद्रयं नाशय नाशय प्रचुरम धनं में देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ। बुधवार से शुरू करें, 21 दिन 4 माला जाप करें।  Lakshmi Shabar mantra  लक्ष्मी शाबर मंत्र सरल भाषा में होते हैं, लेकिन संस्कृत बीजाक्षरों के साथ मिश्रित। एक प्रमुख मंत्र वेदधारा से है: ॐ श्री शुक्ले महाशुक्ले कमलदल निवासे श्री महालक्ष्म्यै नमो नमः।  ## पूर्ण मंत्र ॐ श्री शुक्ले महाशुक्ले कमलदल निवासे श्री महालक्ष्म्यै नमो नमः। लक्ष्मीमाई...