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श्रीदेवीखड्गमालास्तोत्ररत्नम्

पाठार्थं शुद्धदेवनागरीपत्रम् सिद्धम् — देवनागरी एव, न कापि रोमाक्षरी न चाङ्ग्लभाषा। रचना • क्रमः — विनियोगात् आरभ्य अङ्गदेवताः, तिथिनित्याः, त्रिविधं गुरुमण्डलम्, ततः नव आवरणानि संहारक्रमेण, अन्ते नवचक्रेश्वरीनामानि, श्रीदेवीविशेषणानि, नमस्कारः, वामकेश्वरतन्त्रकोलोफनः। • प्रत्येकावरणे शीर्षके आवरणनाम, तदधः आवरणविद्या, मुद्रा, बीजम् — ततः नामावली सन्धियुक्तपङ्क्तिरूपेण पाठसौकर्यार्थम्, अन्ते चक्रस्वामिनी-योगिनीयुग्मम् गाढाक्षरैः। • नामसंख्या देवनागर्यङ्कैः (६, १६, १९, १०, ८, १४…) — जपगणनार्थम्। • पाठान्तराणि — गरिमासिद्धे कोष्ठके स्थापिता, नवमावरणयोगिन्याः द्वौ पाठौ अन्तटिप्पण्यां निर्दिष्टौ। जागरूकतार्थं मूलविद्या (षोडशी) न लिखिता — सा गुरुमुखादेव ग्राह्या। ध्यानश्लोकः अपि न निवेशितः, यतः तस्य पूर्णपाठः सत्यापितुं न शक्तः — इच्छायां पृथक् योजयितुं शक्नोमि। आवरणविद्याः बीजानि च पूजापद्धतितः, न खड्गमालायाः अङ्गम् — केवलं खड्गमालापाठं वाञ्छन् चेत् ताः पङ्क्तीः अपसारयितुं शक्नोमि। ​ श्रीदेवीखड्गमालास्तोत्ररत्नम् — नवावरणपाठः विनियोगः ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौः ॐ नमस्त्रिपुरसुन्द...

सुर-सुंदरी योगिनी साधना

सुर-सुंदरी योगिनी साधना "सुर-सुंदरी" का अर्थ है "देवताओं में भी सबसे सुंदर"। यह आठ प्रमुख योगिनियों में से एक हैं और इन्हें अद्वितीय सौंदर्य, आकर्षण, कला और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इनकी साधना साधक को एक अलौकिक और चुंबकीय व्यक्तित्व प्रदान करती है, जिससे वह जगत को मोहित करने में सक्षम हो जाता है। यह स्वभाव से अत्यंत सौम्य, दयालु और साधक के प्रति पूर्ण समर्पित होती हैं। सावधानी: यह साधना अत्यंत प्रभावशाली है, इसलिए इसे पूर्ण विश्वास और गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। गुरु न होने पर भगवान शिव को अपना गुरु मानकर साधना शुरू करें। 1. आवश्यक सामग्री सुर-सुंदरी योगिनी यंत्र (ताम्र या स्वर्ण पत्र पर निर्मित)। स्फटिक की माला (या लाल चंदन की माला)। रक्षा माला (साधना के समय गले में धारण करें)। गुलाबी या सफेद रंग का आसन और पहनने के लिए गुलाबी/सफेद वस्त्र। शुद्ध केसर, सफेद चंदन और गुलाब के फूल। गुलाब का इत्र और सुगंधित अगरबत्ती। शुद्ध घी का दीपक। (नोट: यन्त्र , माला , रक्षा माला मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित होनी चाहिए।) 2. साधना विधान साधक किसी भी शुक्रवा...

चौंसठ योगिनियाँ - एक रहस्यकौन हैं चौंसठ योगिनियाँ?

चौंसठ योगिनियाँ - एक रहस्य कौन हैं चौंसठ योगिनियाँ? योगिनी परिचय भारतीय तंत्र और अध्यात्म की रहस्यमयी दुनिया में योगिनियों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और शक्तिशाली है। आम धारणा के विपरीत, योगिनियाँ केवल योग का अभ्यास करने वाली सामान्य स्त्रियाँ नहीं हैं, बल्कि वे अलौकिक शक्तियों से संपन्न दिव्य स्त्री-शक्तियाँ हैं। कौन हैं योगिनियाँ? योगिनियों को आदिशक्ति, देवी पार्वती या दुर्गा की सहचरी या उनके ही विभिन्न ऊर्जा-रूप माना जाता है। वे प्रकृति की गुप्त शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं और सिद्धियों की स्वामिनी होती हैं। उनका स्वभाव दोहरा होता है - एक ओर वे अपने साधक पर प्रसन्न होकर उसे अष्ट-सिद्धियाँ और समस्त भौतिक-आध्यात्मिक सुख प्रदान करती हैं, तो दूसरी ओर, साधना में त्रुटि होने पर वे अत्यंत उग्र और विनाशकारी भी हो सकती हैं। चौंसठ योगिनियाँ तंत्र ग्रंथों में मुख्य रूप से चौंसठ योगिनियों (Chausath Yogini) के समूह का वर्णन मिलता है। यह समूह अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है और इनकी सामूहिक साधना बहुत दुर्लभ होती है। प्रत्येक योगिनी का अपना एक विशिष्ट नाम, स्वरूप, वाहन, गुण और शक्तियाँ होती हैं...

कनकावती योगिनी साधना

कनकावती योगिनी साधना "कनकावती" का अर्थ है "स्वर्ण से युक्त" या "स्वर्णमयी"। यह आठ प्रमुख योगिनियों में से एक हैं और इन्हें धन, स्वर्ण, रत्न और असीम भौतिक ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इनकी साधना दरिद्रता का समूल नाश कर साधक के जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खोल देती है। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य, स्वर्ण के समान चमकता हुआ और ममतामयी होता है। यह अपने साधक पर अति शीघ्र प्रसन्न होकर उसे धनवान और सुखी बना देती हैं। सावधानी: यह साधना अत्यंत प्रभावशाली और तीव्र है, इसलिए इसे पूर्ण पवित्रता और गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। गुरु न होने पर भगवान शिव को अपना गुरु मानकर साधना प्रारंभ करें। 1. आवश्यक सामग्री कनकावती योगिनी यंत्र (ताम्र या स्वर्ण पत्र पर निर्मित)। स्फटिक या हकीक माला (मंत्र जाप के लिए) रक्षा माला (साधना के समय गले में धारण करने के लिए)। पीले रंग का आसन और पहनने के लिए पीले वस्त्र। शुद्ध केसर, कुमकुम और पीले पुष्प (गेंदा या स्वर्ण चम्पा)। शुद्ध घी का दीपक और सुगंधित अगरबत्ती। कच्चा दूध, गंगाजल और शहद। (नोट: यन्त्र , माला , रक्षा माला मं...

वाराह्यनुग्रहाष्टकम्

​ वाराह्यनुग्रहाष्टकम् ईश्वर उवाच मातर्जगद्रचननाटकसूत्रधार- स्त्वद्रूपमाकलयितुं परमार्थतोऽयम् । ईशोऽप्यनीश्वरपदं समुपैति तादृक्- कोऽन्यः स्तवं किमिव तावकमादधातु ॥ १॥ नामानि किन्तु गृणतस्तव लोकतुण्डे नाडम्बरं स्पृशति दण्डधरस्य दण्डः । यल्लेशलम्बितभवाम्बुनिधिर्यतो यत्- त्वन्नामसंसृतिरियं ननु न स्तुतिस्ते ॥ २॥ त्वच्चिन्तनादरसमुल्लसदप्रमेया- ऽऽनन्दोदयात्समुदितः स्फुटरोमहर्षः । मातर्नमामि सुदिनानि सदेत्यमुं त्वा- मभ्यर्थयेऽर्थमिति पूरयताद्दयालो ॥ ३॥ इन्द्रेन्दुमौलिविधिकेशवमौलिरत्न- रोचिश्चयोज्ज्वलितपादसरोजयुग्मे । चेतो मतौ मम सदा प्रतिबिम्बिता त्वं भूया भवानि विदधातु सदोरुहारे ॥ ४ ॥ लीलोद्धृतक्षितितलस्य वराहमूर्ते- र्वाराहमूर्तिरखिलार्थकरी त्वमेव । प्रालेयरश्मिसुकलोल्लसितावतंसा त्वं देवि वामतनुभागहरा रहस्य ॥ ५॥ त्वामम्ब तप्तकनकोज्ज्वलकान्तिमन्त- र्ये चिन्तयन्ति युवतीतनुमागलान्ताम् । चक्रायुधत्रिनयनाम्बरपोतृवक्त्रां तेषां पदाम्बुजयुगं प्रणमन्ति देवाः ॥ ६॥ त्वत्सेवनस्खलित पापचयस्य मात- र्मोक्षोऽपि यत्र न सतां गणनामुपैति । देवासुरोरगनृपालनमस्य पाद- स्तत्र श्रियः पटुगिरः कियदेवमस्तु ॥ ७...

Shabar siddhi mantra

Shabar siddhi mantra,  01*मेष राशि का वैदिक मन्त्र- ।।ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी नारायणाय नमः || **साबर मंगल मंत्र** ll ओम गुरूजी मंगलवार मन कर बन्दा,जन्ममरण का कट जावे फन्दा।जन्म मरण का भागे कार।तो गुरू पावूं मंगलवार। मंगलवार भारद्वाज गोत्र,रक्त वर्ण दस हजार जाप अवन्तिदेश।दक्षिण स्थान त्रिकोण मंडल तीन अंगुल,वृश्चिक मेष राशि के गुरू को नमस्कार।सत फिरे तो वाचा फिरे।पान फूल वासना सिंहासन धरै।तो इतरो काम मंगलवार जी महाराज करे। ओम फट् स्वाहा ll 02*वृष राशि का वैदिक मन्त्र- ।।ॐ गोपालाय उत्तर ध्वजाय नमः || **साबर शुक्र मंत्र** ओम गुरू जी शुक्रवार शुक्राचार।मन धरो धीर। कोई नर नारी वीर।नौ नाड़ी बहत्तर कोठा की रक्षा करे।शुक्रवार भार्गव गोत्र, श्वेत वर्ण सोलह हजार जाप,भोजकट देशपूर्व स्थान, पंचकोण मंडल ९ अंगुल वृष तुला राशि के गुरू को नमस्कार। सत फिरे तो वाचा फिरे।पान फूल वासना सिंहासन धरे। तो इतरो काम शुक्रवार जी महाराज करे। ओम फट् स्वाहा ll 03*मिथुन राशि का वैदिक मन्त्र- ।।ॐ क्लीं कृष्णाय नमः || **साबर बुद्ध मंत्र** ll ओम गुरूजीबुधवार बुध लेकर जूंझे।पॉंच पचीस ले घट में चढ़े। निसाण घुरावे।आवागमन ...

Shabar siddhi mantra

Shabar siddhi mantra,  अभिमंत्रित काला धागा बनाने की विधि/Shabar Mantra Raksha Sutra :- पूजा के स्थान पर बैठकर दीपक जलाये अब एक काला धागा लेकर उसके ऊपर सात गाँठे लगायें | प्रत्येक गाँठ को लगाते समय उपरोक्त शाबर मन्र का जाप करें और फूँक मारें | इस प्रकार 7 बार इस मंत्र का जाप करें | अब इस काले धागे को दीपक की लौं पर 21 बार घुमाये और गले में धारण कर ले या परिवार के अन्य सदस्य को धारण करा दे | इस प्रकार शाबर मंत्र द्वारा अभिमंत्रित(Shabar Mantra Raksha Sutra) किया गया यह काला धागा आपको हर प्रकार की ऊपरी बाधाओं और पीडाओं को दूर करता है | यह धागा हर प्रकार से इसे धारण करने वाले की रक्षा करता है Shabar siddhi mantra,  ॐ नमो महादेवी सर्वकार्य सिद्धकर्णी जो पाती पुरे ब्रह्मा विष्णु महेश तीनो देवतन मेरी भक्ति गुरु की शक्ति श्री गुरु गोरखनाथ की दुहाई फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा ||  मंत्र प्रयोग विधि : – सांसारिक जीवन में आने वाली सभी पीडाएं और बाधाएं इस शाबर मंत्र के जाग्रत करने से दूर होने लगती है | इसलिए समस्या कोई भी इस शाबर मंत्र के प्रयोग से दूर होती है | उपरोक्त मंत्र का शाम को 6 ...