Posts

Gridhrakarani Yogini Mantra Sadhana

Gridhrakarani Yogini Gridhrakarani Yogini sadhana typically employs a specific beeja mantra rooted in Tantric Kaula traditions, chanted after guru diksha for safe invocation. ## Core Mantra The primary mantra for her worship is **ॐ ह्रीं क्लीं ग्रिध्राकारिण्यै नमः** (Oṃ Hrīṃ Klīṃ Gridhrakāriṇyai Namaḥ) or variations like **ॐ ग्रिं ग्रिध्राकारिण्यै फट् स्वाहा** (Oṃ Griṃ Gridhrakāriṇyai Phaṭ Svāhā), infusing vulture-energy (gridhra) for protection and obstacle removal [ from prior]. ## Sadhana Guidelines Chant 108 or 1008 times daily at midnight using a rudraksha or crystal mala, facing north in a secluded space with black sesame offerings. Pair with nyasa to place her shakti in the manipura chakra, aligning with your tantric routines for kundalini rise and healing gridhrasi-like pains. ## Precautions Initiation is essential to harness her fierce Shakti without backlash; avoid during eclipses or inauspicious tithis. In Kashmiri texts, she's linked to Bhairava for amplified siddhis in...

श्रीवाराहीसहस्रनामस्तोत्रं

श्री वाराहीसहस्रनामस्तोत्रम् उड्डामरतन्त्र्न्तर्गतम् ॥ श्रीवाराहीध्यानम् ॥ नमोऽस्तु देवि वाराहि जयैङ्कारस्वरूपिणि । जय वाराहि विश्वेशि मुख्यवाराहि ते नमः ॥ १॥ वाराहमुखि वन्दे त्वां अन्धे अन्धिनि ते नमः । सर्वदुर्ष्टप्रदुष्टानां वाक्स्तम्भनकरे नमः ॥ २॥ नमः स्तम्भिनि स्तम्भे त्वां जृम्भे जृम्भिणि ते नमः । रुन्धे रुन्धिनि वन्दे त्वां नमो देवेशि मोहिनि ॥ ३॥ स्वभक्तानां हि सर्वेषां सर्वकामप्रदे नमः । बाह्वोः स्तम्भकरीं वन्दे जिह्वास्तम्भनकारिणीम् ॥ ४॥ स्तम्भनं कुरु शत्रूणां कुरु मे शत्रुनाशनम् । शीघ्रं वश्यं च कुरु मे याऽग्नौ वागात्मिका स्थिता ॥ ५॥ ठचतुष्टयरूपे त्वां शरणं सर्वदा भजे । हुमात्मिके फड्रूपेण जय आद्यानने शिवे ॥ ६॥ देहि मे सकलान् कामान् वाराहि जगदीश्वरि । नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमो नमः ॥ ७॥ ॥ वाराही गायत्री ॥ वराहमुख्यै विद्महे । दण्डनाथायै धीमही । तन्नो अर्घ्रि प्रचोदयात् ॥ ॥ अथ श्रीआदिवाराहीसहस्रनामस्तोत्रम् ॥ अथ ध्यानम् । वन्दे वाराहवक्त्रां वरमणिमकुटां विद्रुमश्रोत्रभूषां हाराग्रैवेयतुङ्गस्तनभरनमितां पीतकौशेयवस्त्राम् । देवी...

कृत्या‑साधना मंत्र

कृत्या‑साधना एक तांत्रिक शक्ति‑साधना है जिसमें शिव की एक अत्यंत तीव्र विनाशकारी शक्ति “कृत्या” को जागृत कर मारण, शत्रुनाश, रक्षा या अन्य आध्यात्मिक कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है। यह साधना आमतौर पर गुरु‑दीक्षा और विशेष अनुष्ठान के बिना सीधे नहीं की जाती, क्योंकि इसकी शक्ति इतनी सीधी और भारी मानी गई है कि गलत या अनुचित उपयोग से फल प्रतिकूल या घातक हो सकता है।  ### कृत्या क्या है? कुछ सम्प्रदायों के अनुसार कृत्या शिव की एक विशिष्ट उद्रेक‑शक्ति है, जो किसी भी वस्तु या व्यक्ति को बहुत कम समय में नष्ट कर सकती है; इसे “प्रेरण‑शक्ति” या मारण‑विद्या के रूप में भी बताया जाता है। कुछ गुरुपरम्पराओं में कृत्या को देवी/देवता की तरह नहीं, बल्कि एक “मानसिक शक्ति‑रूपी” या “मारण‑प्रेत‑सदृश” उर्जा के रूप में देखा जाता है, जिसका रूप दार या देवी के रूप में भी लेपिट कर लिया जा सकता है।  ### साधना की प्रकृति कृत्या‑साधना को आमतौर पर एक मारण या “शत्रुनाशक” प्रयोग के रूप में देखा जाता है, और इसे अधिकांश गुरुओं के अनुसार केवल विशेष परिस्थितियों, अत्यंत आवश्यकता तथा गहन ध्यान, दीक्षा और रक्षा‑मंत्र ...

गडा धन निकालने का शाबर मंत्र

गडा धन निकालने का शाबर मंत्र शाबर मंत्र खजाने (गडा धन या निधि) के लिए विशेष रूप से नाथ परंपरा और तांत्रिक ग्रंथों में वर्णित होते हैं। ये मंत्र सपने या संकेत के माध्यम से गुप्त धन का स्थान बताते हैं।  ## मुख्य निधि दर्शन शाबर मंत्र प्रशान्तः शान्तिदः शुधः शंकर प्रिय बान्धवः। अष्टमूर्ति निधिश्च ज्ञानः चक्षुस्तुल्य उत्तमयः॥ जगद्रक्षा करो लन्तो मायामन्त्रौषधिमय। सर्वसिद्धि प्रदो वैद्याः प्रभविष्णुरिति श्रुतिः॥। रात को सोने से पहले 108 बार जाप करें, 7-21 दिनों तक।  ## गडा धन निकालने का मंत्र ॐ नमो आदेश गुरु को ईश्वर को, पृथ्वी में गड़े धन को बाहर लाओ, ना लाओ तो गोरख कल्ले की दुहाई। सप्तरात्रि जाप से स्थान का संकेत मिलता है।  ## साधना विधि - रुद्राक्ष माला से उत्तर दिशा में जाप, काले आसन पर बैठें। - घी दीपक जलाएं, शाकाहारी रहें, ब्रह्मचर्य पालन करें। - सिद्धि के बाद खजाने पर मंत्र पढ़कर खुदाई करें।  गुप्त खजाना शाबर मंत्र के सावधानियां गुप्त खजाना शाबर मंत्र की साधना अत्यंत शक्तिशाली और उग्र होती है, इसलिए कठोर सावधानियां बरतें। बिना गुरु दीक्षा के इसे न करें, अन्यथा मानस...

Shabar Mantra for Money ( Lakshmi shabar mantras)

Shabar Mantra for Money शाबर मंत्र धन प्राप्ति के लिए एक शक्तिशाली साधना है जो सरल और त्वरित फलदायी होती है। यह मंत्र देवी लक्ष्मी और काल भैरव की कृपा से धन-समृद्धि आकर्षित करता है।  ## मुख्य शाबर मंत्र ॐ नमः काल भैरवाय, धन देहि, संपत्ति देहि, यशः देहि, श्रीं ह्रीं क्लीं स्वाहा।  ## साधना विधि साधना 21 दिनों तक चले, रोज पूर्व या उत्तर दिशा में बैठकर रुद्राक्ष या कमलगट्टा माला से 108 बार जाप करें। पहले दिन लक्ष्मी-भैरव को धन की कामना से संकल्प लें, शाकाहारी भोजन रखें और ब्रह्मचर्य पालन करें।  ## दूसरा लोकप्रिय मंत्र ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन पालिनी लक्ष्मी मम दरिद्रयं नाशय नाशय प्रचुरम धनं में देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ। बुधवार से शुरू करें, 21 दिन 4 माला जाप करें।  Lakshmi Shabar mantra  लक्ष्मी शाबर मंत्र सरल भाषा में होते हैं, लेकिन संस्कृत बीजाक्षरों के साथ मिश्रित। एक प्रमुख मंत्र वेदधारा से है: ॐ श्री शुक्ले महाशुक्ले कमलदल निवासे श्री महालक्ष्म्यै नमो नमः।  ## पूर्ण मंत्र ॐ श्री शुक्ले महाशुक्ले कमलदल निवासे श्री महालक्ष्म्यै नमो नमः। लक्ष्मीमाई...

Vajreshwari Devi Mantras & Sampoorna Vidhi

“Vakreśvarī” (often spelled and pronounced as **Vajreśvarī / Vajreshwari**) is an important **Nityā‑yoginī form of Tripurasundarī** in Srīvidyā‑style Tantra, seated at the 22nd Āsana of the Śrīcakra and associated with causality, transformation, and granting siddhis. Below are some commonly used mantras; note that for full tantric parāyoga they ideally should be received from a live guru, but for simple japa‑upāsanā these are widely shared in public sources. ### 1. Simple Bīja–Nama‑mantra   This is a safe, easy‑to‑use japa‑mantra for general sādhana and protection: - **Mantra**:     ॐ ह्रीं वज्रेश्वर्यै नमः    (Om Hrīṃ Vajreśvaryai Namaḥ)  - **Usage**:     108 times daily on a rosary, preferably in the name of Śrī Devī (e.g., “mahādevyai Vajreśvaryai namo namaḥ”) to remain within Śrīvidyā‑orthodoxy.  ### 2. Vajreśvarī “Gayatri‑type” Mantra   This is framed as a “Gayatri‑style” Nityā‑mantra for mental clarity and siddh...

दस महाविद्या स्तोत्र

दस महाविद्या स्तोत्र नमस्ते चण्डिके । चण्डि । चण्ड-मुण्ड-विनाशिनि । नमस्ते कालिके । काल-महा-भय-विनाशिनी । ।।1।। हे चण्डिके, तुम्हें नमस्कार है! हे चण्डि, चण्ड और मुण्ड का नाश करने वाली देवी को प्रणाम। हे कालिके, काल के महा भय का नाश करने वाली देवी को प्रणाम। शिवे । रक्ष जगद्धात्रि । प्रसीद हरि-वल्लभे । प्रणमामि जगद्धात्रीं, जगत्-पालन-कारिणीम् ।।2।। हे शिवे, जगत की धात्री, रक्षा करो। हे हरि की वल्लभा, प्रसन्न होइए। मैं उस जगत् की धात्री को प्रणाम करता हूँ, जो इस संसार का पालन करती हैं। जगत्-क्षोभ-करीं विद्यां, जगत्-सृष्टि-विधायिनीम् । करालां विकटा घोरां, मुण्ड-माला-विभूषिताम् ।।3।। हे देवी, जो जगत् में हलचल उत्पन्न करती हैं, सृष्टि का विधान करती हैं, मैं उन विकट और भयानक रूप वाली मुण्डमाला से विभूषित देवी को प्रणाम करता हूँ। हरार्चितां हराराध्यां, नमामि हर-वल्लभाम् । गौरीं गुरु-प्रियां गौर-वर्णालंकार-भूषिताम् ।।4।। जो हर द्वारा पूजित हैं, हर द्वारा आराधित हैं, हर की वल्लभा हैं, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ। जो गौरी हैं, गुरु की प्रिय हैं, और गौर वर्ण के आभूषणों से सुसज्जित हैं। हरि-प्रिया...

दश महाविद्या शाबर मन्त्र & दसमहाविद्याकवच

दश महाविद्या शाबर मन्त्र सत नमो आदेश । गुरुजी को आदेश । ॐ गुरुजी । ॐ सोऽहं सिद्ध की काया, तीसरा नेत्र त्रिकुटी ठहराया । गगण मण्डल में अनहद बाजा । वहाँ देखा शिवजी बैठा, गुरु हुकम से भितरी बैठा, शुन्य में ध्यान गोरख दिठा । यही ध्यान तपे महेशा, यही ध्यान ब्रह्माजी लाग्या । यही ध्यान विष्णु की माया ! ॐ कैलाश गिरी से, आयी पार्वती देवी, जाकै सन्मुख बैठ गोरक्ष योगी, देवी ने जब किया आदेश । नहीं लिया आदेश, नहीं दिया उपदेश । सती मन में क्रोध समाई, देखु गोरख अपने माही, नौ दरवाजे खुले कपाट, दशवे द्वारे अग्नि प्रजाले, जलने लगी तो पार पछताई । राखी राखी गोरख राखी, मैं हूँ तेरी चेली, संसार सृष्टि की हूँ मैं माई । कहो शिवशंकर स्वामीजी, गोरख योगी कौन है दिठा । यह तो योगी सबमें विरला, तिसका कौन विचार । हम नहीं जानत, अपनी करणी आप ही जानी । गोरख देखे सत्य की दृष्टि । दृष्टि देख कर मन भया उनमन, तब गोरख कली बिच कहाया । हम तो योगी गुरुमुख बोली, सिद्धों का मर्म न जाने कोई । कहो पार्वती देवीजी अपनी शक्ति कौन-कौन समाई । तब सती ने शक्ति की खेल दिखायी, दस महाविद्या की प्रगटली ज्योति । प्रथम ज्यो...

दस महाशक्ति साधना

दस महाशक्ति साधना कालीतारा महाविद्या षोंदसी भुवनेश्वरी | भैरवी छिन्नमस्ताच विद्या धूमावती | बगला सिद्ध विद्या च मातंगी कमलात्मिका | एता दस महाविद्या: सिद्धविद्या: प्रकितिर्ता || श्री काली तंत्र बाईस अक्षरी का श्री दक्षिण काली मंत्र – ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं स्वाहा || विनियोग -: अस्य श्री दक्षिण मंत्रस्य भैरव ऋषी: | उस्णिक छंद : | दक्षिण कलिका देवता | क्रीं बीजं | ह्रुं शक्ति : | क्रीं कीलकम | ममाभिस्ट सिध्यथर्ये जपे विनियोग : | ऋषयादी न्यास -: ॐ भैरव ऋषये नमः शिरसी ||१ || उष्णिक छंद्से नमः मुखे ||२|| दक्षिण कलिका देवताये नमः ह्रदि ||३|| क्रीं बीजाय नमः गृहे ||४|| ह्रूं शक्तये नमः पादयो ||५|| क्रीं किलकाय नमः नाभौ ||६|| विनियोगाय नमः सर्वांगे ||७|| करन्याश -: ॐ क्राम आन्गुष्ठाभ्याम नमः ||१|| ॐ क्रीं तर्जनिभ्याम नमः ||२|| ॐ क्रूं मध्यमाभ्याम नमः ||३|| ॐ क्रें अनामिकभ्याम नमः ||४|| ॐ क्रों कनिष्ठकाभ्याम नमः ||५|| ॐ क्र: करतल कर्पुश्थाभ्याम नमः ||६|| ह्रद्यादी षडंग न्यास -: ॐ क्राम ह्रदयाय नमः ||१|| ॐ क्र...