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Naga Devata Mantras

Nag devta and Nag devi mantras invoke serpent deities like Ananta, Vasuki, and Manasa Devi for protection, dosha nivaran, and prosperity, rooted in Puranic and tantric traditions discussed earlier. These complement sarpa suktam and raksha mantras from Vedic sources like Taittiriya Aranyaka. ## Naga Devata Mantras - **Nav Naga Stotram**: "Anantam Vasukim Shesham Padmanabham cha Kambalam, Shankhapalam Dhritarashtra Takshakam Kaliyam Tatha. Etani Nava Naamami Naganam cha Mahatmanam." Chant daily morning/evening for victory and sarpa dosha removal.  - **General Naga Beej**: "Om Naga Devathayai Namaha" – 108 times for protection from negative energies and karmic debts.  - **Ashtottara Shatanamavali Excerpt**: "Om Anantaya Namah, Om Adisheshaya Namah, Om Vasukaye Namah..." – Recite 108 names during Naga Panchami.  ## Devi Mantras (Manasa/Naga Mata) - **Manasa Devi Moola Mantra**: "Om Hreem Kleem Aim Namo Bhagwati Manasyei Namah" – For healing, fertilit...

Sarp Bandh Mantra

Sarp Bandh Mantra refers to a traditional Shabar mantra used in tantric practices to immobilize or control a snake, often for protection during encounters. It draws from ancient texts and folk tantra, aligning with your interest in esoteric Hindu mantras and sadhana. Sarp Mantra encompasses protective chants from Hindu tantra and Vedic traditions for snake control, repulsion, or dosha nivaran, building on the Sarp Bandh variant we discussed. Common forms include quick protective utterances and longer sadhana mantras. Quick Protection MantraChant "Om Aastikeya Namah" or "Aastikeya, Aastikeya, Aastikeya" five times if a snake approaches; it calms and repels it per rishi vachans. No prior sadhana needed for emergency use ## Mantra Text :Stambhan (Immobilization) Mantra The core Shabar mantra, as shared in tantric sources, is:   "Badri Badri ki bajaar ke vaar, na ki bajra ki lu. Aaspaas mare sarp ho dekh mera kila, patthar kile patthar phute na, mera tilak chhute n...

उच्छिष्ट चंडालिनी मंत्र

उच्छिष्ट चंडालिनी मंत्र मंत्र - -- मातंगी मातंगी मतंग की पुत्री शंकर की प्यारी बाणी दोष काटे शत्रु नासे गूढज्ञान लावे आगम निगम बतावे शय्या सुख दिलावे जो न करे ऐसा तो शिव भोले की दुहाई ॥ उच्छिष्ट चांडालिनी (जिन्हें मातंगी देवी का एक रूप माना जाता है) की साधना तंत्र शास्त्र में अत्यंत प्रभावशाली और शीघ्र फलदायी मानी गई है। इनके मंत्रों का प्रयोग मुख्य रूप से वाक-सिद्धि, शत्रु बाधा निवारण, और जीवन के समस्त सुखों की प्राप्ति के लिए किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, माँ उच्छिष्ट चांडालिनी की साधना में 'शुद्धि' के सामान्य नियम लागू नहीं होते, इसीलिए इन्हें "उच्छिष्ट" (जो स्वच्छ न हो या जूठा हो) कहा जाता है। मुख्य मंत्र (Ucchista Chandalini Mantra) सबसे प्रचलित और प्रभावशाली मंत्र इस प्रकार है: मंत्र: > ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा ॥ >  साधना से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें  * वाक सिद्धि: इस मंत्र के नियमित और विधिबद्ध जाप से साधक की वाणी सत्य होने लगती है और उसमें सम्मोहन शक्ति आती है।  * निर्भयता: यह साधना भय का नाश करती है और व्यक्ति के भीतर अटूट आत्मविश्वास भरती...

Hanuman Mantras

The Hanuman Beej Mantra is considered the "seed" sound of Lord Hanuman’s energy. It is a concise but potent vibration used to invoke his qualities of immense strength, protection, and unwavering devotion. The most common and powerful Beej Mantra for Lord Hanuman is: > || ॐ हं हनुमते नमः || > "Om Han Hanumate Namah" >   * Om: The universal primordial sound.  * Han: The specific Beej (seed) syllable for Hanuman.  * Hanumate: Referring to Lord Hanuman.  * Namah: A salutation or "I bow to you." Benefits of Hanuman Sadhana Engaging in regular Hanuman Sadhana (disciplined practice) is believed to transform the practitioner's physical, mental, and spiritual state. 1. Removal of Fear and Anxiety Hanuman is the "Sankat Mochan" (Reliever of Troubles). Reciting his mantra helps eliminate phobias, night terrors, and deep-seated anxieties. It instills a sense of "Abhaya" (fearlessness). 2. Physical Health and Vitality As the son of the ...

श्री हनुमान कवच

श्री हनुमान कवच (संस्कृत) अस्य श्रीहनुमत्कवचस्तोत्रमन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीहनुमान् परमात्मा देवता, मारुतात्मज इति बीजम्, अञ्जनीसूनुरिति शक्तिः, वायुपुत्र इति कीलकम्, श्रीरामदूतभक्तित्वेन रामचन्द्रप्रसादसिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः । कवच का मुख्य पाठ: हनुमान् पूर्वतः पातु दक्षिणो वायुपुत्रकः । (हनुमान जी पूर्व दिशा से और वायुपुत्र दक्षिण दिशा से मेरी रक्षा करें।) प्रतीच्यां पातु सुग्रीव आग्नेय्यां मारुतात्मजः । (पश्चिम में सुग्रीव और अग्नि कोण में मारुतात्मज रक्षा करें।) नैर्ऋत्यां पातु वीरस्तु वायव्यां च कपीश्वरः । (नैऋत्य कोण में महावीर और वायव्य कोण में कपीश्वर रक्षा करें।) उत्तरस्यां पातु यमः सौम्ये पिङ्गललोचनः । (उत्तर दिशा में यम और ईशान कोण में पिंगललोचन रक्षा करें।) ऊर्ध्वं पातु शिखां मे च पातु पादौ रसातले । (ऊपर से मेरी शिखा की और नीचे से मेरे चरणों की रक्षा करें।) एवं दशदिशो रक्षेत् सर्वत्र श्रीहनुमान् प्रभुः । (इस प्रकार दसों दिशाओं में प्रभु श्री हनुमान मेरी सर्वत्र रक्षा करें।) हनुमान कवच के लाभ नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति: यह भूत-प्रेत, टोने-टोटके औ...

Bajrang Baan

जय जय जय हनुमन्त अगाधा । दुःख पावत जन केहि अपराधा ।। पूजा जप-तप नेम अचारा । नहिं जानत हो दास तुम्हारा ।। वन उपवन मग गिरि गृह मांहीं । तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।। पायं परौं कर जोरी मनावौं । येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।। जय अंजनी कुमार बलवंता । शंकर सुवन वीर हनुमंता ।। बदन कराल काल कुलघालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक ।। भूत प्रेत पिसाच निसाचर। अगिन वैताल काल मारी मर ।। इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की । राखउ नाथ मरजाद नाम की ।। जनकसुता हरि दास कहावो । ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।। जै जै जै धुनि होत अकासा । सुमिरत होत दुसह दुःख नासा ।। चरण शरण कर जोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।। उठु उठु चलु तोहि राम-दोहाई । पायँ परौं, कर जोरि मनाई ।। ओम चं चं चं चं चपल चलंता । ओम हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ।। ओम हं हं हाँक देत कपि चंचल । ओम सं सं सहमि पराने खल-दल ।। अपने जन को तुरत उबारौ । सुमिरत होय आनंद हमारौ ।। यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कोन उबारै ।। पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करैं प्रान की ।। यह बजरंग बाण जो जापैं । ताते भूत-प्रेत सब कापैं ।। धूप देय अरु जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहै कलेस...

रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र |Shiv Tandav Stotram

रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र |Shiv Tandav Stotram जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।  डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥  जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी । विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि । धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥  धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर- स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे । कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥  जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा- कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे । मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥  सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर- प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः । भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥  ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा- निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ । सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥  कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल- द्धनंजया धरीकृतप्रचंडप...

बिल्वाष्टकम्

बिल्वाष्टकम् त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनॆत्रं च त्रियायुधं त्रिजन्म पापसंहारम् ऎकबिल्वं शिवार्पणं   त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च अच्चिद्रैः कॊमलैः शुभैः तवपूजां करिष्यामि ऎकबिल्वं शिवार्पणं   कॊटि कन्या महादानं तिलपर्वत कॊटयः काञ्चनं क्षीलदानॆन ऎकबिल्वं शिवार्पणं   काशीक्षॆत्र निवासं च कालभैरव दर्शनं प्रयागॆ माधवं दृष्ट्वा ऎकबिल्वं शिवार्पणं   इन्दुवारॆ व्रतं स्थित्वा निराहारॊ महॆश्वराः नक्तं हौष्यामि दॆवॆश ऎकबिल्वं शिवार्पणं   रामलिङ्ग प्रतिष्ठा च वैवाहिक कृतं तधा तटाकानिच सन्धानम् ऎकबिल्वं शिवार्पणं   अखण्ड बिल्वपत्रं च आयुतं शिवपूजनं कृतं नाम सहस्रॆण ऎकबिल्वं शिवार्पणं   उमया सहदॆवॆश नन्दि वाहनमॆव च भस्मलॆपन सर्वाङ्गम् ऎकबिल्वं शिवार्पणं   सालग्रामॆषु विप्राणां तटाकं दशकूपयॊः यज्नकॊटि सहस्रस्च ऎकबिल्वं शिवार्पणं   दन्ति कॊटि सहस्रॆषु अश्वमॆध शतक्रतौ कॊटिकन्या महादानम् ऎकबिल्वं शिवार्पणं   बिल्वाणां दर्शनं पुण्यं स्पर्शनं पापनाशनं अघॊर पापसंहारम् ऎकबिल्वं शिवार्पणं   सहस्रवॆद पाटॆषु ब्रह्मस्तापन मुच्यतॆ अनॆकव्रत कॊटीनाम् ऎकबिल्वं शिवार्...

Mahamrityunjaya Mantra| महामृत्युंजय मंत्र|

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ त्रयंबकम – कर्मकारक। त्रि.नेत्रों वाला | यजामहे – हम पूजते हैं |  सम्मान करते हैं। सुगंधिम – सुगंधित। यानि मीठी महक वाला, पुष्टि – जीवन की परिपूर्णता | एक सुपोषित स्थिति | फलने वाला व्यक्ति। वर्धनम – वह जो शक्ति देता है।  पोषण करता है उर्वारुक – ककड़ी। इवत्र – जैसे, इस तरह। बंधनात्र – वास्तव में समाप्ति से अधिक लंबी है। मृत्यु – मृत्यु से मुक्षिया , मुक्ति दें। हमें स्वतंत्र करें | मा  –  नअमृतात – अमरता, मोक्ष। Mahamrityunjaya Mantra Meaning :  Om, We Worship the lord Shiva with the Three-Eyed, Who is Fragrant as the Spiritual Essence, Increasing the Nourishment of our Spiritual Core; From these many Bondages of Samsara similar to Cucumbers tied to their Creepers, May I be Liberated from Death (Attachment to Perishable Things), So that I am not separated from the perception of Immortality (Immortal Essence pervading everywhere). महामृत्युंजय मंत्र का हिन्दी...

शिव जटाजूट स्तुतिः

श्री शिव जटाजूट स्तुतिः श्रीशिवजटाजूटस्तुति हिंदी अर्थ सहित स धूर्जटिजटाजूटो जायतां विजयाय वः । यत्रैकपलित भ्रान्तिं करोत्यद्यापि जाह्नवी ॥ १ ॥ चूडापीडकपालसंकुलगलन्मन्दाकिनीवारयो विद्युत्प्रायललाटलोचनपुटज्योतिर्विमिश्रत्विषः । पान्तु त्वामकठोरकेतकशिखासंदिग्धमुग्धेन्दवो भूतेशस्य भुजङ्गवल्लिवलयस्त्रद्धजूटा जटाः ॥ २ ॥ गङ्गावारिभिरुक्षिताः फणिफणैरुत्पल्लवास्तच्छिखा- रत्नैः कोरकिताः सितांशुकलया स्मेरैकपुष्पश्रियः । आनन्दा श्रुपरिप्लुताक्षिहुत भुग्धूमैर्मिलद्दोहदा नाल्पं कल्पलताः फलं ददतु वोऽभीष्टं जटा धूर्जटेः ॥ ३ ॥ ॥ इति श्रीशिवजटाजूटस्तुतिः सम्पूर्णा ॥ श्रीशिवस्तुतिः  नमस्तुङ्गशिरश्चुम्बिचन्द्रचामरचारवे त्रैलोक्यनगरारम्भमूलस्तम्भाय शम्भवे ॥ १ ॥ चन्द्राननार्धदेहाय चन्द्रांशुसितमूर्तये । चन्द्राकनलनेत्राय चन्द्रार्धशिरसे नमः ॥ २ ॥ ॥ इति श्रीशिवस्तुतिः सम्पूर्णा ॥ भावार्थ -  जिन भगवान् शंकर के जटाजूट में निवास करनेवाली गंगा आज भी उनके बालों के एक पके हुए केश की भ्रांति उत्पन्न कर देती है — वे भगवान् धूर्जटि का वह जटाजूट आप सबके विजय के लिए हो। भगवान शिव के सिर की जटा भुजंग (साँप)-रू...