मंजुघोष साधना
मंजुघोष साधना 'अ र व च ल धीं ।' इस छः अक्षर के मन्त्र की साधना करने से साधक को सर्वज्ञता प्राप्त होती है। इस मन्त्र की आराधना करने वाला साधक वाक्पटु, वेद वेदान्तादि शास्त्रों में पारदर्शी तथा धनवान होता है। यदि साधक बलि नैवेद्यादि प्रदान करके उक्त मन्त्र का दस सहस्र की संख्या में जप करे तो वह दूसरे बृहस्पति की भाँति पूजनीय होता है।जो मनुष्य केवल एक महीने तक इस मन्त्र का पुरश्चरण करता है उसके मुख से अनवरत रूप से गद्य पद्यमयी वाणी निकलती रहती है। तीन महीने तक पुरश्चरण करने वाला व्यक्ति असाधारण कवित्व सम्पन्न होता है।