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विश्वावसु गंधर्व राज साधना | गन्धर्व साधना

गन्धर्व साधना: कला, सौंदर्य और सम्मोहन  गन्धर्व देव योनि की एक अत्यंत तेजस्वी और कलात्मक शक्ति हैं। वे इन्द्र की सभा के मुख्य गायक हैं और सुंदरता, संगीत, नृत्य तथा प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं। 'गन्धर्व साधना' उन साधकों के लिए अत्यंत फलदायी है जो कला के क्षेत्र में शिखर प्राप्त करना चाहते हैं, या अपने व्यक्तित्व में एक दिव्य आकर्षण और सम्मोहन शक्ति जाग्रत करना चाहते हैं। यह साधना साधक को मानसिक तनाव से मुक्त कर जीवन में आनंद और उल्लास भर देती है। 1. गन्धर्व साधना के प्रमुख लाभ कला और संगीत में सिद्धि: संगीत, गायन, अभिनय और लेखन के क्षेत्र में विलक्षण प्रतिभा प्राप्त होती है। सम्मोहक व्यक्तित्व: साधक के चेहरे पर एक दिव्य आभा (Aura) आती है, जिससे लोग उसकी ओर स्वतः आकर्षित होते हैं। सुखद प्रेम संबंध: दांपत्य जीवन और प्रेम संबंधों में मधुरता और प्रगाढ़ता आती है। मानसिक शांति: मन प्रसन्न रहता है और डिप्रेशन या चिंता जैसी समस्याएँ समाप्त हो जाती हैं। 2. साधना का उचित समय और तैयारी शुभ समय: किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार, पूर्णिमा या बसंत पंचमी से यह साधना शुरू करें। वस्त्र और आस...

Maa Ashu (Aashu/Asho) Mehtarani”

​ “Maa Ashu (Aashu/Asho) Mehtarani” is a powerful Shakta/Shabar deity invoked in folk-tantric traditions—especially in Bengal and surrounding regions—for binding or removing black magic, pret/bhoot afflictions, and hostile tantric works.  Her mantras are classed as **Shabar mantras**: direct, vernacular, result-oriented formulas often used with simple ritual materials and strict discipline. ## Who is Ashu Mehtarani? - She is described in Shabar/tantra lineages as a swift-acting goddess who can **bind or cut rival tantric works (chouki, jadoo-tona)**, neutralize pret/bhoot, and protect against malefic influences. - Some traditions call her **“Bangale ki Aaso Mehtarani Mai”**, emphasizing her Bengal origin and her role in “bringing speech back” (vaacha) when someone is struck by muting/affliction mantras. - She is often depicted as riding with Bhairava/Hanuman and entourages of vīras/yoginīs in protective processions. ## Common Shabar Mantra (for protection/binding of evils) One wide...

नाग साधना: गुप्त रहस्यों और सुरक्षा की प्राप्ति

नाग साधना: गुप्त रहस्यों और सुरक्षा की प्राप्ति प्राचीन भारतीय संस्कृति और तंत्र शास्त्र में नागों को अत्यंत रहस्यमयी और शक्तिशाली शक्तियों के रूप में माना गया है। वे पाताल लोक के अधिपति हैं और पृथ्वी के गुप्त खजानों के रक्षक माने जाते हैं। 'नाग साधना' का मुख्य उद्देश्य नाग देवों को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त करना, कालसर्प दोष का निवारण करना और जीवन में अनचाहे भय एवं शत्रुओं से सुरक्षा प्राप्त करना है। यह साधना साधक को एक विशेष प्रकार का तेज और सुरक्षा कवच प्रदान करती है। 1. नाग साधना के प्रमुख लाभ कालसर्प दोष निवारण: कुंडली में मौजूद कालसर्प योग के नकारात्मक प्रभावों को कम करती है। गुप्त धन और ज्ञान: माना जाता है कि नागों की कृपा से गुप्त विद्याओं और धन के मार्ग खुलते हैं। शत्रु और विष से सुरक्षा: यह साधना साधक को शत्रुओं के षड्यंत्रों और किसी भी प्रकार के विषैले प्रभाव से बचाती है। भूमि और भवन सुख: नाग देव भूमि के रक्षक हैं, अतः इनकी कृपा से भूमि और संपत्ति संबंधी विवाद सुलझ जाते हैं। 2. साधना का उचित समय और तैयारी शुभ समय: नागपंचमी का दिन इस साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ ह...

Ganesha (Ashtavinayaka) Forms of Ganpati & Sadhana Procedure

​ Ganpati (Ganesha) is worshipped in many distinct forms across Hindu tradition, broadly grouped into: the 32 classical iconographic forms used for home and temple installation, the eight self‑manifest (svayambhu) Ashtavinayaka forms of Maharashtra, and a few special ritual/material forms like Shwetark Ganpati.  Use the universal Ganesha bija mantra **ॐ गं गणपतये नमः** (*Om Gam Ganapataye Namah*) for any form if a specific mantra is not available; for the 32 forms, many traditions also use **ॐ श्रीं गं क्लीं ग्लौं गणपतये वरवरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा** as a general 32‑form mantra. # Form (Sanskrit/Hindi) Mantra (Devanagari) Transliteration Core purpose 1 Bala Ganapati ॐ बाल गणपतये नमः Om Bala Ganapataye Namah Children, new beginnings, protection of kids. 2 Taruna Ganapati ॐ तरुण गणपतये नमः Om Taruna Ganapataye Namah Youthful energy, career start, competitions. 3 Bhakti Ganapati ॐ भक्ति गणपतये नमः Om Bhakti Ganapataye Namah Devotion, grace, daily upa...

डाकिनी साधना: रहस्य और विधान, | भूतनी साधना: रहस्य और विस्तृत विधान

डाकिनी साधना: रहस्य और विधान डाकिनी साधना तंत्र जगत की एक अत्यंत शक्तिशाली और उग्र साधना है। डाकिनी को अक्सर माँ काली की सहायक शक्तियों के रूप में जाना जाता है। इनकी साधना मुख्य रूप से शत्रुओं के समूल नाश, भूत-भविष्य की गुप्त जानकारी प्राप्त करने और असाध्य भौतिक कार्यों को सिद्ध करने के लिए की जाती है। डाकिनी साधना जितनी जल्दी सिद्ध होती है, उतनी ही यह साहसी और दृढ़ संकल्प वाले साधकों के लिए उचित मानी गई है। यह साधना साधक को एक विशेष प्रकार की निर्भयता और वर्चस्व प्रदान करती है। सावधानी: यह एक अत्यंत उग्र साधना है। इसे केवल एक अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। गुरु न होने पर भगवान शिव (महाकाल) को गुरु मानकर ही प्रारंभ करें। 1. आवश्यक सामग्री डाकिनी यंत्र (ताम्र या भोजपत्र पर निर्मित)। काले हकीक की माला। रक्षा माला (साधना के समय गले में अनिवार्य)। काले रंग का आसन और पहनने के लिए काले वस्त्र। शुद्ध सरसों के तेल का चौमुखी दीपक। काले तिल, उड़द, और लोबान की धूप। लाल पुष्प और मदिरा (भोग हेतु)। (नोट: यन्त्र , माला , रक्षा माला , गुटिका मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित होनी चाहिए।) 2. साध...

नाभिदर्शना अप्सरा साधना

नाभिदर्शना अप्सरा साधना नाभिदर्शना अप्सरा की साधना सौंदर्य, यौवन और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए की जाने वाली एक उच्च कोटि की साधना है। इस अप्सरा की काली और लम्बी आंखें, लहराते हुए झरने की तरह केश और चन्द्रमा की तरह मुस्कुराता हुआ चेहरा, कमल नाल की तरह लम्बी बांहें और सुन्दरता से लिपटा हुआ पूरा शरीर एक अजीब सी मादकता बिखेर देता है, और इन्हें इन्द्र का वरदान प्राप्त है, कि जो इसके सम्पर्क में आता है, वह पुरुष पूर्ण रूप से रोगों से मुक्त होकर चिर यौवनमय बन जाता है, उनके शरीर का कायाकल्प हो जाता है, और पौरुष की दृष्टि से वह अत्यन्त प्रभावशाली बन जाता है। अप्सरा साधनाओं में इन्हें अत्यंत सौम्य और शीघ्र प्रसन्न होने वाली माना गया है। इस साधना को स्त्रियां भी सिद्ध कर सकती हैं, नाभि दर्शना अप्सरा के रूप में उन्हें अभिन्न सखी प्राप्त हो जाती है, और उस सखी के साहचर्य से साधिका के शरीर का भी कायाकल्प हो जाता है, और ऐसी साधिका अत्यन्त सुन्दर, यौवनमय और सम्मोहक बन जाती हैं। वास्तव में ही यह साधना बालक या वृद्ध किसी भी वर्ण या जाति का व्यक्ति या स्त्री सम्पन्न कर सकते हैं, और यदि विश्‍वास एवं श्...

श्रीदेवीखड्गमालास्तोत्ररत्नम्

पाठार्थं शुद्धदेवनागरीपत्रम् सिद्धम् — देवनागरी एव, न कापि रोमाक्षरी न चाङ्ग्लभाषा। रचना • क्रमः — विनियोगात् आरभ्य अङ्गदेवताः, तिथिनित्याः, त्रिविधं गुरुमण्डलम्, ततः नव आवरणानि संहारक्रमेण, अन्ते नवचक्रेश्वरीनामानि, श्रीदेवीविशेषणानि, नमस्कारः, वामकेश्वरतन्त्रकोलोफनः। • प्रत्येकावरणे शीर्षके आवरणनाम, तदधः आवरणविद्या, मुद्रा, बीजम् — ततः नामावली सन्धियुक्तपङ्क्तिरूपेण पाठसौकर्यार्थम्, अन्ते चक्रस्वामिनी-योगिनीयुग्मम् गाढाक्षरैः। • नामसंख्या देवनागर्यङ्कैः (६, १६, १९, १०, ८, १४…) — जपगणनार्थम्। • पाठान्तराणि — गरिमासिद्धे कोष्ठके स्थापिता, नवमावरणयोगिन्याः द्वौ पाठौ अन्तटिप्पण्यां निर्दिष्टौ। जागरूकतार्थं मूलविद्या (षोडशी) न लिखिता — सा गुरुमुखादेव ग्राह्या। ध्यानश्लोकः अपि न निवेशितः, यतः तस्य पूर्णपाठः सत्यापितुं न शक्तः — इच्छायां पृथक् योजयितुं शक्नोमि। आवरणविद्याः बीजानि च पूजापद्धतितः, न खड्गमालायाः अङ्गम् — केवलं खड्गमालापाठं वाञ्छन् चेत् ताः पङ्क्तीः अपसारयितुं शक्नोमि। ​ श्रीदेवीखड्गमालास्तोत्ररत्नम् — नवावरणपाठः विनियोगः ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौः ॐ नमस्त्रिपुरसुन्द...

सुर-सुंदरी योगिनी साधना

सुर-सुंदरी योगिनी साधना "सुर-सुंदरी" का अर्थ है "देवताओं में भी सबसे सुंदर"। यह आठ प्रमुख योगिनियों में से एक हैं और इन्हें अद्वितीय सौंदर्य, आकर्षण, कला और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इनकी साधना साधक को एक अलौकिक और चुंबकीय व्यक्तित्व प्रदान करती है, जिससे वह जगत को मोहित करने में सक्षम हो जाता है। यह स्वभाव से अत्यंत सौम्य, दयालु और साधक के प्रति पूर्ण समर्पित होती हैं। सावधानी: यह साधना अत्यंत प्रभावशाली है, इसलिए इसे पूर्ण विश्वास और गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। गुरु न होने पर भगवान शिव को अपना गुरु मानकर साधना शुरू करें। 1. आवश्यक सामग्री सुर-सुंदरी योगिनी यंत्र (ताम्र या स्वर्ण पत्र पर निर्मित)। स्फटिक की माला (या लाल चंदन की माला)। रक्षा माला (साधना के समय गले में धारण करें)। गुलाबी या सफेद रंग का आसन और पहनने के लिए गुलाबी/सफेद वस्त्र। शुद्ध केसर, सफेद चंदन और गुलाब के फूल। गुलाब का इत्र और सुगंधित अगरबत्ती। शुद्ध घी का दीपक। (नोट: यन्त्र , माला , रक्षा माला मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित होनी चाहिए।) 2. साधना विधान साधक किसी भी शुक्रवा...