Yamraj Mantras

Yamraj, known as the Hindu god of death and justice (Dharmaraja), has several mantras associated with protection from untimely death, fear of mortality, and spiritual purification.
Key Mantras
These are commonly chanted for averting premature death (akaal mrityu) and invoking Yamraj's blessings, often during hawan or japa with "swaha" added.
ॐ यमाय नमः (Om Yamaya Namah)
ॐ धर्मराजाय नमः (Om Dharmarajaya Namah)
ॐ मृत्यवे नमः (Om Mrityave Namah)
ॐ अन्तकाय नमः (Om Antakaya Namah)
ॐ कालाय नमः (Om Kalaya Namah)
A longer protective verse includes his 14 names: यमाय धर्मराजाय मृत्यवे चान्तकाय च। वैवस्वताय कालाय सर्वभूतक्षयाय च। औदुम्बराय दध्नाय नीलाय परमेष्ठिने। वृकोदराय चित्राय चित्रगुप्ताय वै नमः॥
Yama Gayatri Mantra
ॐ सूर्याय पुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि। तन्नो यमः प्रचोदयात्॥ (Om Suryaya Putraya Vidmahe Mahakalaya Dhimahi, Tanno Yamah Prachodayat.)
Regular japa removes death fears and untimely demise.Usage GuidelinesChant 108 times daily or on amavasya/Narak Chaturdashi for family protection; combine with hawan using khीर or ghee for siddhi after 8,000 repetitions. These align with tantric and jyotish traditions for longevity and moksha.
यमराज मंत्र जप की विधि सरल लेकिन शास्त्रीय है, जो अकाल मृत्यु भय निवारण और सिद्धि के लिए की जाती है।तैयारीस्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, दक्षिण मुख बैठें। रुद्राक्ष या स्फटिक माला लें। ब्रह्ममुहूर्त या संध्या काल उत्तम। पूजा सामग्री: दीपक, काले तिल, फूल, जल, खीर नैवेद्य।जप विधिमाला पर मंत्र जपें: मेरु को न छुएं, दाएं से बाएं घुमाएं।नित्य जप: ॐ यमाय नमः या अन्य मंत्र 108 बार।पुरश्चरण (सिद्धि हेतु): 8,000 जप पूर्ण करें।समापन: जप दशांश (800) खीर से हवन करें। स्वाहा जोड़ें।लाभ संख्या108 जप: परिवार में अकाल मृत्यु रक्षा।8,000+हवन: पाप नाश, स्वर्ग प्राप्ति, कीर्ति-संपदा।
यम गायत्री के लिए भी 108 जप नित्य उपयोगी। श्रद्धा से जपें, गुरु मार्गदर्शन उचित।
यमराज पूजा मुख्यतः नरक चतुर्दशी, धनतेरस या यम द्वितीया पर अकाल मृत्यु निवारण हेतु की जाती है।सामग्रीतांबे का कलश: जल, सिक्का, सुपारी, इत्र, सिंदूर, अक्षत; ऊपर पीपल पत्र।चित्र/मूर्ति: यमराज, काली, हनुमान, कृष्ण, शिव।दीपक: चौमुखी मिट्टी/आटा, सरसों तेल+सिंदूर, 4 बत्तियां।तिलक: भस्म (यमराज), काजल (काली), सिंदूर (हनुमान), रोली (कृष्ण), चंदन (शिव)।धूप: लोहबान, गुग्गल, चंदन। फूल: सफेद, नीला, लाल, पीला, गुलाबी। पत्र: बरगद (काली), पीपल (यमराज), अशोक (हनुमान), तुलसी (कृष्ण), बिल्व (शिव)।भोग: गुड़ इमरती, जलेबी, तली पूड़ी, सूजी हलवा, नारियल। माला: लाल/काला हकीक।पूजा विधिदक्षिण दिशा में लाल कपड़े पर यम कलश स्थापित करें। प्रदोष काल में संकल्प लें।चित्र स्थापित कर तिलक लगाएं, धूप-दीप करें।पत्र, फूल चढ़ाएं; भोग लगाएं। नारियल सिर से 14 बार वारकर समर्पित करें।मंत्र जप: ॐ यमाय नमः 108 बार।हवन/दीपदान: घर बाहर दक्षिण में चौमुखी दीप जलाएं। भोग चौराहे पर विसर्जित करें।लाभ समयअकाल मृत्यु भय दूर, न्याय-कर्मफल सिद्धि। धनतेरस रात्रि या चतुर्दशी संध्या उत्तम! 
यम दीपदान मुख्यतः धनतेरस (त्रयोदशी) की प्रदोष काल या नरक चतुर्दशी पर किया जाता है, जो अकाल मृत्यु से रक्षा करता है।
2026 शुभ मुहूर्तनई दिल्ली/भारत के लिए पंचांग आधारित समय (स्थान भेद से ±5-10 मिनट भिन्न हो सकता है)। धनतेरस (Yama Deepam / त्रयोदशी)तिथि: 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार)।यम दीपम पूजा मुहूर्त: सायं संध्या 05:33 PM से रात्रि प्रवेश तक (प्रदोष काल)।नरक चतुर्दशी (चतुर्दशी)तिथि: 8 नवंबर 2026 (रविवार)।पूजा मुहूर्त: प्रातः 05:36 AM से 06:38 AM (अवधि: 1 घंटा 02 मिनट)।चतुर्दशी तिथि: 7 नवंबर सुबह 10:47 AM से 8 नवंबर सुबह 11:27 AM।सामान्य दिशानिर्देशप्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद ~1.5 घंटे) उत्तम; दक्षिण दिशा में चौमुखी दीप जलाएं। स्थानिक पंचांग से सत्यापित करें।
यम दीपदान अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु धनतेरस या नरक चतुर्दशी पर प्रदोष काल में किया जाता है।आवश्यक सामग्रीचौमुखी मिट्टी/आटा दीपक (बड़ा आकार)।सरसों/तिल का तेल, काले तिल, लंबी 2-4 बातियां (क्रॉस करके चारों ओर मुंह निकालें)।आसन: गेहूं/चावल/अनाज की प्लेट। रोली, अक्षत, फूल, सिक्का, कौड़ी।चरणबद्ध विधिदीपक तैयार करें: दीपक को पानी में भिगोकर सुखाएं। क्रॉस बातियां लगाकर तेल भरें, काले तिल डालें। चारों ओर प्रज्वलित करें।पूजन: दक्षिण मुख होकर रोली-चंदन तिलक लगाएं, अक्षत-फूल चढ़ाएं, धूप दिखाएं। दीपक को प्रणाम करें।स्थान: मुख्य द्वार या घर के बाहर दक्षिण दिशा में अनाज पर आसन देकर रखें।मंत्र जाप: जल का घेरा देकर मंत्र बोलें -
मृत्युनापाश दंडाभ्याम कालेन श्यामयासः त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम।समर्पण: प्रार्थना कर दीपक छोड़ दें। पूरी रात्रि जलने दें। यम पंचक (धनतेरस से भाई दूज तक) प्रतिदिन करें।इससे धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति।

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