Tara Mantras
Tara devi is a one of the ten Mahavidyas in Hinduism, known for granting protection, wisdom, and liberation from worldly troubles. Goddess Tara, often depicted as Neela Saraswati with a dark blue complexion, holds weapons like a sword and skull, symbolizing her fierce power to destroy ignorance and evil. This stotram praises her as the savior (Tarini) who helps devotees cross the ocean of samsara. It is chanted for spiritual growth, prosperity, and mantra siddhi, aligning with Tantric sadhana practices. A popular version, Shri
Tara Stotram or Tara Ashtakam, begins with:
मातर्नीलसरस्वति प्रणमतां सौभाग्यसम्पत्प्रदे
प्रत्यालीढपदस्थिते शवहृदि स्मेराननाम्भोरुहे।
फुल्लेन्दीवरलोचने त्रिनयने कर्त्रीकपालोत्पले
खड्गं चादधती त्वमेव शरणं मन्त्रात्मिके मादृशः॥
This invokes her lotus eyes, smiling face on Shiva's heart, and role as the essence of mantras.Benefits and PracticeReciting it daily, especially on Tuesdays or during Tara puja, is said to fulfill desires, remove obstacles, and lead to moksha. In Tantra, combine with her beej mantra "Om Hreem Streem Hum Phat" for enhanced effects, as per texts like Svarnamala Tantra.
तारा देवी के मुख्य बीजाक्षर स्त्रीं हैं, जो मूल "त्रीं" से विकसित हुए। यह वधू बीज कहलाता है और धन, बुद्धि व सुरक्षा प्रदान करता है।बीजाक्षरस्त्रीं: अचानक धन लाभ, शत्रु नाश, बुद्धि वृद्धि।
त्रीं: मूल बीज, ज्ञानदायिनी।
सहायक: ह्रीं, हूं, फट्।
मंत्र
ॐ ह्रीं स्त्रीं हूं फट्
फल
धन आकर्षण, बाधा निवारण
ॐ त्रीं ह्रीं ह्रूं फट्
भय नाश, अकाल मृत्यु भंग
ॐ हूं स्त्रीं हूं
सुरक्षा, मोक्ष
ब्रह्म मुहूर्त में 108 जाप करें। मंगलवार-अष्टमी पर विशेष !
तारा मंत्र साधना एक शक्तिशाली तांत्रिक विधि है जो धन, बुद्धि, सुरक्षा और मोक्ष प्रदान करती है। इसे मुख्यतः एक दिवसीय या 9-21 दिनों में सम्पन्न किया जाता है।आवश्यक सामग्रीतारा यंत्र, कमलगट्टा/स्फटिक/रुद्राक्ष माला।पीला/गुलाबी वस्त्र, घी दीपक, महाशंख, कुंकुम, अक्षत, पुष्प, चावल।आसन: कुश/काला/नीला।साधना विधिस्नान कर उत्तरमुख शुद्ध आसन पर बैठें, बाजोट पर पीला/गुलाबी वस्त्र बिछाएं।तारा यंत्र स्थापित करें, गुरु चित्र रखें, चावल ढेर पर दीपक जलाएं, शंख रखें।पूजन: कुंकुम-अक्षत से पूजन, आचमन ("ॐ तारायै नमः" 3 बार), अंग न्यास (वैरोचनाय आदि मंत्रों से)।ध्यान: नील सरस्वती रूप का चिंतन।जाप: "ॐ ह्रीं स्त्रीं ह्रीं फट्" या "ॐ ह्रीं त्रीं ह्रूं फट्" का 21 माला जाप (कमलगट्टा माला से)।आरती-भोग, हवन (शहद से 108 आहुतियां यदि 9 दिवसीय)।नियम व समयसमय: रविवार अमृत काल, मध्यरात्रि (12 बजे बाद), गुप्त नवरात्रि।अवधि: 1 दिन या 9/21 दिन।नियम: ब्रह्मचर्य, मौन, मांस-मदिरा त्याग, एकांत।समापन: यंत्र-माला विसर्जन नदी/कुंए में। गुरु दीक्षा उत्तम।सिद्धि पर तारा तारूण्य रूप में दर्शन देती हैं।
तारा साधना के लिए आवश्यक सामग्री
तारा साधना के लिए आवश्यक सामग्री मुख्य रूप से तांत्रिक पूजन पर आधारित होती है, जो सरल से उन्नत स्तर तक उपलब्ध होती है।
## मूल सामग्री
- **यंत्र और माला**: स्वर्णप्रदायक तारा यंत्र, शक्ति तारा माला (कमलगट्टा, स्फटिक, रुद्राक्ष या काला हकीक)।
- **आसन और वस्त्र**: नीला/पीला/गुलाबी/श्वेत आसन, गुलाबी वस्त्र धारण के लिए।
- **पूजन पात्र**: तांबे की प्लेट/लोटा/चम्मच, बाजोट (लकड़ी का)।
## पूजन सामग्री
| श्रेणी | वस्तुएं |
|--------|---------|
| नैवेद्य | पान पत्ता, सुपारी, लौंग, काले तिल, शहद, शक्कर, फल (5 प्रकार), मिठाई (5 प्रकार), नारियल (कच्चा व सूखा)। |
| स्नान-श्रृंगार | सिंदूर, लाल चंदन, कुंकुम, अगरबत्ती, कपूर, घी, दूध, गोबर। |
| दीप-धूप | घी दीपक (चौमुखी), रुई बत्ती, धूप। |
| पुष्प-पत्र | नीले कमल/पुष्प, बिल्व पत्र, आम/केले के पत्ते, दूर्वा।
## अतिरिक्त वस्तुएं
- गुरु चित्र, महाशंख/तारा शंख, गंगाजल, अष्टगंध, मौली, पंचमेवा, जौ।
- हवन के लिए: आम की लकड़ी, शहद।
ये सामग्री एकांत स्थान पर उत्तर/पूर्व मुख से पूजन हेतु उपयोगी हैं। गुरु मार्गदर्शन अनिवार्य।[m
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