पुतली वशीकरण क्या है? परिभाषा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पुतली वशीकरण क्या है? -
परिभाषा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
परिभाषा
पुतली वशीकरण एक तांत्रिक क्रिया है, जिसमें एक प्रतीकात्मक "पुतली" को
माध्यम बनाकर किसी विशेष व्यक्ति के मन, भावनाओं या निर्णयों पर प्रभाव
डाला जाता है। यह प्रभाव एक मंत्रित प्रक्रिया द्वारा डाला जाता है, जिसमें
संकल्प, साधना, मंत्रोच्चारण और तांत्रिक विधि का समावेश होता है।
यह विधि इस धारणा पर आधारित है कि किसी वस्तु (यहाँ पुतली) को जब
किसी व्यक्ति के प्रतिनिधित्व में उपयोग किया जाए, तो उस वस्तु पर किया गया
ऊर्जा-प्रभाव सीधे उस व्यक्ति पर असर करता है। इसे आधुनिक मनोविज्ञान में
"symbolic representation with energy transference" की संज्ञा दी जा
सकती है, जबकि तांत्रिक परंपरा इसे "प्रतीकात्मक शक्ति संचरण (Symbolic
Power Transference)" मानती है।
9 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतवर्ष में तंत्र विद्या वैदिक काल से भी पुरानी मानी जाती है। जहाँ वेदों में
यज्ञ और मंत्रों के माध्यम से देवताओं का आवाहन होता था, वहीं तंत्र में
प्राकृतिक शक्तियों को साधक की इच्छानुसार प्रभावित करने की विधियाँ
विकसित हुईं।
पुतली का प्रथम उल्लेख:
अथर्ववेद में कुछ मंत्र ऐसे पाए जाते हैं जिनमें "कृत्रिम मूर्तियों" के माध्यम से
शत्रु बाधा या आकर्षण की बात कही गई है।
बौद्ध तांत्रिक ग्रंथों में भी "प्रतिमा-साधन" का उल्लेख मिलता है।
दक्षिण भारत की सिद्ध परंपरा, बंगाल का तांत्रिक पंथ, और गुप्तकालीन
तांत्रिक योग में पुतली का प्रयोग व्यापक रूप से होता था।
लोककथाओं और ग्रामीण प्रयोग
भारत के अलग-अलग प्रांतों में पुतली वशीकरण की परंपरा आज भी जीवित
है:
बंगाल में, कपड़े की पुतली बनाकर मंत्रोच्चारण के साथ आम के पेड़ पर
लटकाना आम है।
राजस्थान में मिट्टी की पुतलियाँ बनाकर रात को श्मशान भूमि में वशीकरण
क्रिया की जाती है।
उत्तर भारत के तांत्रिक पंथों में "चावल की पुतली" से प्रेमी / प्रेमिका को वश में
करने की विधियाँ हैं।
नागा साधु, अघोरी, और तांत्रिक योगी इसे उच्च स्तर की क्रिया मानते हैं जो
केवल तपस्वियों के लिए उपयुक्त होती है।
प्रतीकवाद और ऊर्जा विज्ञान
तांत्रिक परंपरा मानती है कि हर वस्तु में चेतना होती है, जिसे "चित्त-तत्व" कहा
गया है। जब एक साधक संकल्प करके, मंत्रोच्चारण द्वारा किसी प्रतीक (पुतली)
में ऊर्जा भरता है, तो वह प्रतीक केवल वस्तु नहीं रह जाती
माध्यम बन जाती है।
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वह एक ऊर्जित
> जैसे देव प्रतिमाओं में "प्राण प्रतिष्ठा" की जाती है, वैसे ही पुतली में भी ऊर्जा
प्रतिष्ठा द्वारा उसे जीवंत प्रभावशाली बनाया जाता है।
● उद्देश्य
पुतली वशीकरण का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति को "वश" में करना नहीं है,
बल्कि:
प्रेम-संबंधों को पुनः जोड़ना
शत्रु के गलत प्रभाव को हटाना
व्यापारी सौदे में सामने वाले को अनुकूल बनाना
किसी अधिकारी या प्रेमी को आकर्षित करना
अथवा आत्मरक्षा में सामने वाले की सोच को मोड़ना
जैसे-जैसे साधक इस विद्या में आगे बढ़ता है, उसकी ऊर्जा और प्रभाव भी गहरा
होता जाता है। यही कारण है कि पुतली वशीकरण को केवल साधना करने
योग्य व्यक्ति ही करें, यह सामान्य मनोरंजन नहीं है।
वशीकरण की आवश्यक सामग्री , वस्त्र, समय
और स्थान
पुतली वशीकरण कोई सामान्य क्रिया नहीं, बल्कि एक ऊर्जित तांत्रिक यज्ञ है
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जिसमें हर वस्तु, रंग, दिशा, और समय का विशेष महत्व होता है।
यदि सामग्री और माहौल तांत्रिक विधि के अनुसार न हो, तो साधना निष्क्रिय या उल्टा प्रभाव भी दे सकती है।
1. आवश्यक सामग्री ( Essential Items )
सामग्री उपयोग
पुतली निर्माण की वस्तु (मिट्टी / कपड़ा / मोम आदि )
व्यक्ति विशेष का प्रतीक
लक्ष्य व्यक्ति का नाम/चित्र / बाल / वस्त्र का टुकड़ा
ऊर्जा को लक्षित करने हेतु
मंत्र सिद्ध रक्षासूत्र (काला / लाल धागा )
सुरक्षा और शक्ति का संचय
सिंदूर / काजल / गुलाब की पंखुड़ियाँ आकर्षण और प्रेम शक्ति जाग्रत करने हेतु काला तिल / लौंग / इलायची / कपूर
मंत्र बल और मानसिक नियंत्रण
घी / सरसों का तेल / नींबू / शहद बलिदान, शांति या रचनात्मक प्रभाव हेतु
सात प्रकार के फूल (विशेषकर रजनीगंधा, चमेली, गुलाब) सौंदर्य और ऊर्जा
आकर्षण
मंत्र पुस्तक या तांत्रिक यंत्र शास्त्रीय सहयोग
> नोट: सामग्री शुद्ध, बिना कटे-फटे, और मंत्रोच्चारण के समय ऊर्जावान वातावरण में प्रयोग होनी चाहिए।
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