चिञ्चि पिशाची यक्षिणी साधना और कर्णपिशाचिनी' यक्षिणी
चिञ्चि पिशाची यक्षिणी साधना
'चिञ्चि पिशाची' नामक यक्षिणी का साधना-मन्त्र इस प्रकार है-
ॐ क्रीं चिञ्चि पिशाचिनी स्वाहा।
साधना विधि- नीलवर्ण के भोजपत्र पर केसर, गोरोचन तथा दूध के
मिश्रण से अष्टदल कमल का निर्माण कर, प्रत्येक दल में मायाबीज लिखें।
लेखनोपरान्त उक्त यन्त्र को मस्तक पर धारणकर यथाशक्ति संख्या में पूर्वोक्त मन्त्र का जप करें। उक्त विधि द्वारा सात दिन तक यत्नपूर्वक जप करते रहने से 'चिञ्चि पिशाची' यक्षिणी साधक पर प्रसन्न होकर उसे स्वप्न में भूत, भविष्य तथा वर्तमान
के सभी वृत्तान्त बता देती है!
कर्णपिशाचिनी' यक्षिणी का साधना-मन्त्र नीचे दिया जा रहा है-
ॐ ह्रीं चः चः कम्बलके गत्या पिण्डं पिशाचिके स्वाहा।
साधना विधि -प्रतिदिन सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय इस मन्त्र का 1008 की संख्या में 21 दिनों तक जप करें तथा सन्ध्या के समय अपने आहार में से एक पिण्ड छत के ऊपर फेंक दें। इस कृत्य से 'कर्णपिशाचिनी' यक्षिणी प्रसन्न होकर साधक की शय्या पर आती हैं तथा उसे प्रतिदिन 25 स्वर्ण मुद्राएं देकर, उसके प्रत्येक प्रश्न का उत्तर कान में बताती रहती हैं।
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