विद्युज्जिह्वा यक्षिणी साधना और चामुण्डा यक्षिणी साधना

विद्युज्जिह्वा यक्षिणी साधना

'विद्युज्जिह्वा' यक्षिणी का साधना-मन्त्र नीचे प्रस्तुत है-.
ॐ कारमुखे विद्युज्जिह्वा ॐ हुं चेटके जय जय स्वाहा।
साधना विधि- वटवृक्ष के नीचे बैठकर उक्त मन्त्र का 108 बार जप करके थोड़े मिष्टान्न एवं भोजन की बलि दें। इस विधि से नित्य एक मास तक निरन्तर साधना करते रहने पर 'विद्युज्जिह्वा' यक्षिणी प्रकट होती हैं। वे साधक के हाथ से
स्वयं भोजन ग्रहण करके यह वर देती हैं कि मैं सदैव तुम्हारे समीप बनी रहूंगी।साथ ही वे साधक को भूत, भविष्य एवं वर्तमान तीनों काल की बातें भी बताती रहती हैं।

चामुण्डा यक्षिणी साधना

'चामुण्डा' यक्षिणी का साधना-मन्त्र इस प्रकार है-
ॐ क्रीं आगच्छ आगच्छ चामुण्डे श्रीं स्वाहा।
साधना विधि-मिट्टी तथा गोबर से पृथ्वी को लीपकर उस पर कुशा बिछा दें। तत्पश्चात् पंचोपचार एवं नैवेद्य द्वारा देवी का पूजन कर, रुद्राक्ष की माला पर उक्त मन्त्र का एक लाख बार जप करें। इससे 'चामुण्डा' यक्षिणी प्रसन्न होकर, अर्द्धरात्रि में सोते समय स्वप्न में साधक को सभी शुभाशुभ फल बता देती हैं।

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