Vajreshwari Devi Mantras & Sampoorna Vidhi
“Vakreśvarī” (often spelled and pronounced as **Vajreśvarī / Vajreshwari**) is an important **Nityā‑yoginī form of Tripurasundarī** in Srīvidyā‑style Tantra, seated at the 22nd Āsana of the Śrīcakra and associated with causality, transformation, and granting siddhis. Below are some commonly used mantras; note that for full tantric parāyoga they ideally should be received from a live guru, but for simple japa‑upāsanā these are widely shared in public sources.
### 1. Simple Bīja–Nama‑mantra
This is a safe, easy‑to‑use japa‑mantra for general sādhana and protection:
- **Mantra**:
ॐ ह्रीं वज्रेश्वर्यै नमः
(Om Hrīṃ Vajreśvaryai Namaḥ)
- **Usage**:
108 times daily on a rosary, preferably in the name of Śrī Devī (e.g., “mahādevyai Vajreśvaryai namo namaḥ”) to remain within Śrīvidyā‑orthodoxy.
### 2. Vajreśvarī “Gayatri‑type” Mantra
This is framed as a “Gayatri‑style” Nityā‑mantra for mental clarity and siddhi‑current:
- **Mantra**:
ॐ महावज्रेश्वर्यै विद्महे वज्रनित्यायै धीमहि तन्नो नित्या प्रचोदयात्
(Om Mahāvajreśvaryai vidmahe Vajranityāyai dhīmahi tanno nityā pracodayāt)
- **Usage**:
Traditionally chanted 108 times after morning bath, with a focus on visualizing Her seated on Her chakra‑pīṭha, holding sugarcane‑bow and fruit‑arrows, in a red‑lotus‑like form.
### 3. Vajreśvarī Rakṣā‑mantra (for protection)
For quick protection when facing obstacles or hostile energies:
- **Mantra**:
ॐ वं वज्रेश्वर्यै रक्षायोगात्, वज्रेश्वरी भावयन्तु फट्
(Om Vaṃ Vajreśvaryai rakṣāyogāt, Vajreśvarī bhāvayantu Phaṭ)
- **Usage**:
21 times whenever fear, opposition, or sudden “baadha” arises; mentally offer the japa to Śrīvidyā‑pārṣada (Mātāṅgī, Kāmākṣī, etc.) rather than treating it as black‑magic.
### 4. Sabar‑style “Nagarkot‑Wali‑Māī” mantra (for desires)
This is a popular “sābar”‑style tantra‑link mantra circulating for Nagarkot‑Vajreśvarī, meant for *siddhi of kaaryas*:
- **Mantra (simple variant)**:
ॐ ह्रीं नमो नगरकोट वाली माई, सर्व कार्य सिद्धकरणी, सर्व बाधा नाशिनी, पल में चेतकी, पल में घातकी, मेरो काज सिद्ध करें, न करें तो बाबा गोरक्षनाथ की आज्ञा, पिता महादेव शंकर की आज्ञा, फूरो मंत्र ईश्वरी वाचा।
- **Usage**:
This is clearly tantric‑sābar in tone; it is recommended only if you are already under a guru and have taken proper dikṣā for Vajreśvarī‑yoga.
### 5. General mixed‑japa line for daily practice
Many public sources combine a simple namaskāra‑line for daily use:
-ॐ भगवती श्री वज्रेश्वरी देवी नमः
(Om Bhagavatī Śrī Vajreśvarī Devī Namaḥ)
You can use this as a *daily* 108‑japa mantra if you prefer a gentler, more devotional form, especially for a government‑serving background like yours (Rājasā‑dharma‑oriented).
### Brief note on pūjā‑Sādhana (non‑initiate level)
If you want to keep it simple and within smart‑sādhana‑bounds (not heavy sābar‑karma):
- Seat: Sit on a red cloth facing east, light a red or saffron lamp, and place a Śrīcakra‑yantra or image of Mā Vajreśvarī.
- Offer: Red flowers, sandal‑paste, rosewater, and simple sweets (milk‑barfi, peda etc.).
- Method:
- 1 mālā Gaṇeśa‑mantra, 1 Om Namaḥ Śivāya.
- 108 japa of $$ ॐ ह्रीं वज्रेश्वर्यै नमः or ॐ भगवती श्री वज्रेश्वरी देवी नमः
- End with Maṅgalācaraṇa (simple Śrī Kṛṣṇa or Śiva‑stotra) and a sankalpa‑release.
वज्रेश्वरी देवी मंत्र जप विधि
वज्रेश्वरी देवी का मंत्र जप शुद्धता, नियम और विश्वास के साथ करने से अत्यधिक फलदायी होता है। यहाँ आपके लिए **सुरक्षित, भक्ति‑आधारित जप‑विधि** दी जा रही है, जिसे आप दैनिक साधना या विशेष अनुष्ठान दोनों रूपों में अपना सकते हैं।
### 1. मूल मंत्र चुनाव
सामान्य जप के लिए आप इनमें से कोई एक मंत्र रोजाना चुनें:
- ॐ ह्रीं वज्रेश्वर्यै नमः
- या ॐ भगवती श्री वज्रेश्वरी देवी नमः
ये दोनों ही मंत्र साबर‑रूपों से तुलना में अधिक संतुलित और भक्ति‑अनुसारी माने जाते हैं।
### 2. दैनिक जप‑विधि (सामान्य साधक)
**समय:**
- सुबह स्नान‑मंत्र‑स्नान के बाद, या शाम गहिरे श्रद्धा‑भाव के साथ।
**स्थान व आसन:**
- शुद्ध जगह, उत्तर या पूर्व की ओर मुँह करके लाल या गुलाबी कपड़े पर बैठें।
- रूद्राक्ष, रक्तचंदन या लाल हकीक की माला उपयोग कर सकते हैं।
**साधना‑क्रम:**
1. **संकल्प व शुद्धिकरण:**
- “ॐ गं गणपतये नमः” – 1 माला।
- “ॐ नमः शिवाय” – 1 माला।
2. **मूल मंत्र जप:**
- चुने हुए मंत्र की **108 बार (एक माला)** जप नियमित रोज़ करें।
- मन से वज्रेश्वरी की लाल‑सुंदर‑शक्तिमयी मूर्ति का ध्यान रखें।
3. **समापन:**
- फिर “ॐ नमः शिवाय” की 1 माला।
- देवी से दीन भाव से प्रार्थना:
“माँ वज्रेश्वरी, मुझे शरीर‑मन‑आत्मा और कर्म‑धर्म में सद्गति, सुरक्षा और सद्बुद्धि प्रदान करो।”
### 3. 29‑दिवसीय सिद्धि‑साधना (साबर‑मंत्र वाला रूप)
यह विधि “नगरकोट वाली माई – वज्रेश्वरी देवी का साबर मंत्र” के लिए दी जाती है।
**मंत्र:**
ॐ ह्रीं नमो नगरकोट वाली माई,
सर्व कार्य सिद्ध करणी, सर्व बाधा नाशिनी,
पल में चेटकी, पल में घातकी,
मेरो काज सिद्ध करें ।
न करें तो बाबा गुरु गोरखनाथ की आज्ञा,
पिता महादेव शंकर की आज्ञा,
फूरो मंत्र ईश्वरी वाचा॥
**साधना‑क्रम:**
1. **अवधि:**
- लगातार **29 दिन**, प्रतिदिन अवश्य।
2. **जप‑संख्या:**
- रोज़ **21 माला** (लगभग 2300+ बार जप)।
3. **पूर्व जप:**
- गुरु‑मंत्र (यदि मिला हो)।
- गणेश मंत्र – 1 माला।
- “ॐ नमः शिवाय” – 1 माला।
4. **नियम‑अनुष्ठान:**
- सात्विक भोजन, ब्रह्मचर्य, भूमि या रुक्ष आसन पर शयन यथासंभव।
5. **समापन:**
- मंत्र सिद्ध होने के बाद भी रोज़ **21 या 108 बार** जप जारी रखें ताकि शक्ति बनी रहे।
### 4. वज्र‑कड़ा वाली रक्षा‑साधना (विशेष अनुष्ठान)
यह विधि देश‑नगर‑घर‑परिवार और शरीर की **सर्वविधि रक्षा** के लिए बताई गई है।
**सामग्री:**
- वज्र‑कड़ा
- वज्रेश्वरी‑माला
- सरसों का तेल का दीपक
**क्रम:**
1. **काल व दिशा:**
- कृष्ण पक्ष की तृतीया या आपके शुभ दिन, रात **9–10 बजे** के बीच।
- बैठें दक्षिण दिशा की ओर; गहरे नीले वस्त्र पहनें।
2. **स्थापना:**
- बायें हाथ में वज्र‑कड़ा, उस पर **पाँच काजल की बिंदियाँ** लगायें।
- कड़े पर ही दीपक रखें, फिर सामने आसन पर रख दें।
3. **मंत्र जप:**
- वज्रेश्वरी‑माला से उपर्युक्त साबर‑मंत्र की **21 माला**,
- दीपक की लौ को देखते हुए पद्मासन या वीरासन में जप करें।
4. **समापन व गुप्त‑सील:**
- जप के बाद माला को कड़े पर लपेटें, दीपक, माला और कड़े को मिट्टी के पात्र में रखकर कपड़े में बाँधकर जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर दबा दें; यदि न हो सके तो नदी में प्रवाहित करें।
5. **भविष्य‑उपयोग:**
- जब भी बाधा या भय हो, उसी मंत्र का **21 बार** जप कर देवी से तत्काल रक्षा की प्रार्थना करें।
### 5. आपके लिए विशेष सुझाव
- आप जैसे सरकारी कर्मी‑कर्तव्य‑धर्मी साधक के लिए **भक्ति‑आधारित जप** (बिना साबर‑हथियार‑संबंधित अनुष्ठान) सबसे अधिक सुरक्षित और धर्म‑अनुकूल है।
- रोज़ **108 बार**
ॐ ह्रीं वज्रेश्वर्यै नमः या ॐ भगवती श्री वज्रेश्वरी देवी नमः का जप + एक छोटी सी रक्षा‑प्रार्थना इसी से बहुत हो जाता है।
वज्रेश्वरी गायत्री मंत्र
वज्रेश्वरी देवी के लिए “गायत्री‑तुल्य” मंत्र वास्तव में एक **Nityā‑Gayatri** है जो श्रीविद्या‑परंपरा में प्रचलित है। यह मंत्र उनकी शक्ति, बाधा‑नाश और बुद्धि‑स्फूर्ति दोनों के लिए गाया जाता है।
### 1. वज्रेश्वरी गायत्री मंत्र (देवनागरी)
सामान्य रूप से प्रचलित वज्रेश्वरी‑गायत्री मंत्र इस तरह दिया जाता है:
- **मंत्र (देवनागरी):**
ॐ महावज्रेश्वर्यै विद्महे वज्रनित्यायै धीमहि तन्नो नित्या प्रचोदयात्
*Om Mahāvajreśvaryai vidmahe Vajranityāyai dhīmahi tanno nityā pracodayāt*
यह मंत्र वज्रेश्वरी‑Nityā (श्रीचक्र की 22वीं नित्या) के रूप में उपास्य है और इसे गायन‑शैली में जपा जाता है।
### 2. जप‑विधि और समय
यदि आप साधारण भक्ति‑धर्मी जप करना चाहें तो इस तरह कर सकते हैं:
- **समय:**
- सुबह स्नान के बाद या शाम में
- यदि हो सके तो **शुक्रवार, शनिवार या नवरात्र** के दिन अधिक माला‑जप।
- **आसन‑सामग्री:**
- लाल/गुलाबी आसन, रूद्राक्ष/रक्तचंदन की माला।
- वज्रेश्वरी की छवि या श्रीचक्र‑यंत्र के सामने बैठें।
- **जप‑क्रम (साधारण):**
1. गणेश‑मंत्र 1 माला (“ॐ गं गणपतये नमः”)
2. “ॐ नमः शिवाय” 1 माला
3. फिर उपरोक्त **गायत्री मंत्र की 108 बार (1 माला)** जप;
जितना हो सके उतना मन से देवी की लाल‑तेज‑स्वरूप मूर्ति का ध्यान रखें।
4. समापन में फिर “ॐ नमः शिवाय” 1 माला और सरल प्रार्थना:
*“माँ वज्रेश्वरी, मेरे बुद्धि‑कर्म और जीवन में शुद्ध शक्ति, सुरक्षा और सद्बुद्धि प्रदान करो।”*
### 3. गायत्री मंत्र का उद्देश्य
- इस गायत्री‑मंत्र से **मानसिक‑आध्यात्मिक तेज**, **समस्या‑नाश** और **भय‑नाशक** शक्ति प्राप्ति की बात अनेक तांत्रिक और भक्ति‑स्रोतों में कही गई है।
- यह मंत्र बिना किसी विशेष तांत्रिक उपाय के भी भक्ति‑भाव और नियमितता से जपा जा सकता है, यही आपके लिए (सरकारी कर्मी‑साधक के रूप में) सबसे उपयुक्त मार्ग है।
Comments
Post a Comment