बगलामुखी ब्रह्मास्त्र माला मंत्र
Baglamukhi Brahmastra Mala Mantra is a powerful tantric invocation associated with Maa Baglamukhi, one of the Dashamahavidyas, used for enemy neutralization, protection, and spiritual victory in Hindu sadhana practices. It begins with "ॐ ह्लीं फट्" chanted seven times and invokes fierce forms of the goddess alongside Chamunda for stambhana (paralyzing foes) and uchchatana (uprooting obstacles).
## Full Mantra Text
ॐ ह्लीं फट् । (७)
ॐ नमो भगवति चामुण्डे नरकङ्कगृध्रोलूकपरिवारसहिते श्मशानप्रिये नररुधिरमांस-चरुभोजनप्रिये सिद्धविद्याधरवृन्दवन्दितचरणे बृह्मेशविष्णु-वरुणकुबेर-भैरवी भैरवप्रिये इन्द्रकोधविनिर्गतशरीरे द्वादशादित्यचण्डप्रभे अस्थिमुण्डकपालमालाभरणे शीघ्रं दक्षिणदिशि अगच्छागच्छ मानय मानय नुद नुद अमुकं/सर्व शत्रुणां मारय मारय चूर्णय चूर्णय आवेशावेशय त्रुट त्रुट त्रोटय त्रोटय स्फुट स्फुट स्फोटय स्फोटय महाभूतान् जृग्भय जृग्भय ब्रह्मराक्षसानुच्चाटयोच्चाटय भूतप्रेत-पिशाचान् मूर्च्छय मूर्च्छय मम शत्रुनुच्चाटयोच्चाटय शत्रून् चूर्णय-चूर्णय सत्यं कथय कथय वृक्षेभ्यः सन्न्नाशय सन्न्नाशय अर्क स्तम्भय स्तम्भय गरुणपक्षपातेन विषं निर्विषं कुरु कुरु लीलाङ्गालयवृक्षेभ्यः परिपातय परिपातय शैलकाननमहीं मर्दय मर्दय मुखं उत्पाटयोत्पाटय पात्रं पूरय पूरय भूतभविष्यं यत्सर्व कथय कथय कृन्त कृन्त दह दह पच पच मथ मथ प्रमथ प्रमथ घर्घर घर्घर ग्रासय ग्रासय विद्रावय विद्रावय उच्चाटयोच्चाटय विष्णुचक्रेण वरुणपाशेन इन्द्रवज्रेण ज्वरं नाशय नाशय प्रविदं स्फोटय स्फोटय सर्वशत्रून् मम वशं कुरु कुरु पातालं प्रत्यन्तरिक्षं आकाशग्रहं आनयानय करालि विकरालि महाकालि रुद्रशक्ते पूर्वदिशं निरोधय निरोधय, पश्चिमदिशं स्तम्भय-स्तम्भय, दक्षिणदिशं निधय निधय, उत्तरदिशं बन्धय बन्धय ह्रां ह्रीं ॐ बन्धय-बन्धय ज्वालामालिनी स्ताम्भिनी मोहिनि मुकुटविचित्रकुण्डल नागादिवासुकीकृतहारभूषणे मेखलाचन्द्रार्कहासप्रभञ्जने विद्युत्स्फुरित सकाश साट्टहास निलय निलय हुं फट् हुं फट् विजृम्भितशरीरे सप्तद्वीपकृते ब्रह्माण्ड विस्तारितस्तनयुगले असिमुसल-परशुतोमरक्षुरिपाशहलेषु वीरान् शमय शमय सहस्त्रबाहु परापरादिशक्ति विष्णु शरीरे शङ्कर-ह्रदयेश्वरी बगलामुखी सर्वदुष्टान् विनाशय-विनाशय हुं फट् स्वाहा ।
ॐ ह्लीं बगलामुखी ये केचनापकारिणः सन्ति तेषां वाचं मुखं स्तम्भय-स्तम्भय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं विनाशय विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा। ॐ ह्रीं हिली हिली अमुकस्य/सर्व शत्रुणां वाचं मुखं पदं स्तम्भय शत्रुजिह्वां कीलय शत्रूणां दृष्टिमुष्टिगतिमतिदन्त तालुजिह्वां बन्धय बन्धय मारय मारय शोषय शोषय हुं फट् स्वाहा।
## Usage Guidelines
This mala mantra equals one full mala (108 repetitions) when chanted once, ideal for shatru nash (enemy destruction) and raksha (protection). Perform at night facing north or east on a yellow asana, with mustard oil lamp, maintaining brahmacharya and sattvic conduct; limit to 1-11 recitations daily without diksha.
## Key Benefits
- Stambhana of enemies' speech, mind, and actions.
- Uchchatana of ghosts, planets, and obstacles.
- Enhanced during Navratri for financial and spiritual gains.
बगलामुखी ब्रह्मास्त्र माला मंत्र का जाप एक शक्तिशाली तांत्रिक विधि है, जो शत्रु नाश, सुरक्षा और कार्य सिद्धि के लिए की जाती है। यह एक बार जप से 108 माला के बराबर फल देता है।
## तैयारी
स्नान कर पीले वस्त्र पहनें, ब्रह्मचर्य पालन करें, एक समय सात्विक भोजन लें। पीतासन पर उत्तर या पूर्व मुखी बैठें, सरसों तेल या घृत का दीपक जलाएं जिसमें लौंग या केसर डालें। मां बगलामुखी का यंत्र, चित्र या प्रतिमा स्थापित कर ध्यान करें।
## आरंभिक अनुष्ठान
हाथ में जल लेकर संकल्प बोलें: "मां बगलामुखी ब्रह्मास्त्र माला का जाप [संकhya] बार करूंगा।" गुरु मंत्र (ॐ गुं गुरुभ्यो नमः) या ॐ ह्लीं का 1 माला जप करें। फिर ॐ ह्लीं फट् 7 बार जपते हुए शरीर पर मंत्र स्पर्श करें, देवी अवतरण की भावना करें।
## जाप विधि
रात्रि 10 बजे से प्रात: 4 बजे के बीच हल्दी या स्फटिक माला से 1-11 जाप करें (साधारण कार्य के लिए 108, संकट में 1100-11000)। 31-41 दिनों का संकल्प लें। प्रत्येक जाप के बाद स्वाहा बोलें। शुद्धता और एकाग्रता रखें।
## समापन
जाप पूर्ण होने पर दशांश हवन (108 जाप पर 10.8 आहुतियां) और शांति कर्म करें। पीले फूल, चंदन, दूर्वा अर्पित कर क्षमा प्रार्थना करें।
बगलामुखी ब्रह्मास्त्र माला मंत्र के जाप से पाप, शत्रु बाधा, दरिद्रता, असाध्य रोग और दुर्भाग्य का नाश होता है। यह शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और क्रिया को स्तंभित कर विजय प्रदान करता है।
## मुख्य लाभ
- शत्रु नाश एवं स्तंभन: ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं का संहार, उनकी वाणी-बुद्धि रोकना।
- कानूनी विजय: कोर्ट-कचहरी, मुकदमों में सफलता।
- नकारात्मक ऊर्जा निवारण: काला जादू, तंत्र-टोना, बुरी नजर, भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति।
- ग्रह दोष शांति: नवग्रह, क्रूर दशा का प्रभाव कम करना।
- धन-समृद्धि: दुःख-दरिद्रता नाश, लक्ष्मी प्राप्ति, कार्य सिद्धि।
- प्रतिभा वृद्धि: तेज, विलक्षण गुणों का विकास, मोक्ष मार्ग में क्रोध!
बगलामुखी ब्रह्मास्त्र माला साधना में पीत वर्ण का आसन और हल्दी की माला सर्वोत्तम है। ये मां बगलामुखी की पीतांबरा स्वरूप से संनादित होते हैं।
## अनुशंसित माला
- मुख्य: हल्दी की माला (हरिद्रा माला), बगलामुखी साधना के लिए अनिवार्य।
- विकल्प: पीली स्फटिक या जीया-पोता (पीली जड़) की माला।
## अनुशंसित आसन
- पीतासन (पीला वस्त्र, ऊन या कुश का पीला आसन)।
- अन्य: मृगचर्म या कुशासन, उत्तर/पूर्व मुख होकर।
## उपयोग नियम
माला दाहिने हाथ के मध्यमा-अंगुष्ठ से घुमाएं, कभी जमीन पर न रखें। आसन पर मेरुदंड सीधा रखें।
नियंत्रण।
बगलामुखी ब्रह्मास्त्र माला मंत्र की साधना सामान्य कार्यों के लिए छोटी अवधि वाली होती है, जबकि संकट में लंबी। एक पाठ ही 108 माला के बराबर माना जाता है।
## दैनिक संख्या
- साधारण कार्य: 1, 3, 5, 7, 9, 11, 16, 21, 33, 51 या 108 पाठ।
- बिना दीक्षा: अधिकतम 11 पाठ प्रतिदिन।
- विशेष संकट: 1100 या 11000 पाठ।
## साधना अवधि
- नित्य जाप के लिए 31, 36 या 41 दिनों का संकल्प।
- पाठ पूर्ण होने पर दशांश हवन (उदाहरण: 108 पाठ पर 10.8 आहुतियां) अनिवार्य।
बगलामुखी ब्रह्मास्त्र माला साधना के दौरान बगलामुखी कवच या मूल मंत्र "ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा" को रक्षा के रूप में जपें। यह साधना बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
## मुख्य रक्षा मंत्र
- **बगलामुखी कवच मंत्र**: साधना आरंभ से पहले 108 बार जप करें। यह शत्रु, तंत्र बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है।
- **बीज मंत्र**: ॐ ह्लीं फट् (7 बार) प्रत्येक सत्र से पूर्व।
## जाप क्रम
साधना के दौरान:
1. कवच का 1 माला जप।
2. मुख्य ब्रह्मास्त्र माला जाप।
3. समापन पर कवच पुन: जप।
नियमित उपयोग से सिद्धि तेज होती है।
बगलामुखी कवच मंत्र साधना के लिए बगलामुखी का मूल स्तंभन मंत्र ही मुख्य रक्षा कवच के रूप में उपयोग होता है। यह शत्रु बाधा, तंत्रिक प्रभाव और नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है।
## पूर्ण कवच मंत्र
ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।।
## विस्तृत रक्षा क्रम
साधना प्रारंभ में:
- ॐ ह्लीं फट् (7 बार)।
- उपरोक्त कवच मंत्र का 1 माला (108 जप)।
- फिर ब्रह्मास्त्र माला जाप।
समापन पर कवच पुन: 108 जप करें। यह साधना के दौरान पूर्ण कवच का कार्य करता है।
बगलामुखी ब्रह्मास्त्र माला साधना के कवच के साथ **बगलामुखी स्तोत्र** या **बगलामुखी अथर्वशीर्ष** पढ़ना सर्वोत्तम है। यह देवी के स्तंभन स्वरूप की महिमा का वर्णन करता है और साधना को शक्तिशाली बनाता है।
## अनुशंसित स्तोत्र
- **बगलामुखी स्तोत्र**: कवच जाप के बाद 3-11 पाठ, शत्रु नाश और सुरक्षा के लिए।
- **बगलामुखी चालीसा**: वैकल्पिक, भाव भक्ति के लिए।
## पाठ क्रम
1. ॐ ह्लीं फट् (7 बार)
2. बगलामुखी कवच मंत्र (1 माला)
3. बगलामुखी स्तोत्र (3-11 पाठ)
4. ब्रह्मास्त्र माला जाप
यह क्रम साधना को पूर्ण और बाधारहित बनाता है।
बगलामुखी अथर्वशीर्ष
बगलामुखी अथर्वशीर्ष मंत्र मां बगलामुखी का शक्तिशाली स्तोत्र है, जो तंत्रराज तंत्र से लिया गया है। यह साधना में शत्रु स्तंभन, बाधा निवारण और सिद्धि के लिए पाठ किया जाता है।
## पूर्ण बगलामुखी अथर्वशीर्ष
**ॐ असि बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं स्वाहा।**
**नमो भगवति बगलामुख्यै सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय स्वाहा।**
**ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।।**
**एवं विदित्वा यः पठेच्छुद्धचेतसा।**
**सर्वशत्रून् जयेद् बगला देव्याः प्रसादतः।।**
## पाठ विधि
- कवच के बाद 3, 7 या 11 पाठ करें।
- पीले आसन पर उत्तर मुख होकर।
- पीतांबर धारण कर हल्दी माला से।
यह अर्गला स्तोत्र के साथ मिलाकर साधना को पूर्ण बनाता है।
बगलामुखी अथर्वशीर्ष का जाप बगलामुखी साधना में कवच के बाद और मुख्य मंत्र से पहले किया जाता है। यह देवी के स्वरूप का ध्यान कराने और बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है।
## तैयारी
- स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें, ब्रह्मचर्य पालन करें।
- पीतासन पर पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठें।
- हल्दी की माला लें, सरसों तेल का दीपक जलाएं।
## जाप विधि
1. **आरंभ**: ॐ ह्लीं फट् (7 बार) जपें।
2. **कवच**: बगलामुखी कवच मंत्र 1 माला (108 जप)।
3. **अथर्वशीर्ष पाठ**: पूर्ण अथर्वशीर्ष 3, 7 या 11 बार पढ़ें।
4. **मुख्य जाप**: ब्रह्मास्त्र माला का जाप।
## समय और संख्या
- रात्रि 10 बजे से प्रभात 4 बजे के बीच।
- 21-41 दिनों का संकल्प लें।
## समापन
अथर्वशीर्ष पुन: 3 बार पाठ कर हवन करें। यह साधना को शक्तिशाली बनाता है।
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