Shabar siddhi mantra

Shabar siddhi mantra, 
अभिमंत्रित काला धागा बनाने की विधि/Shabar Mantra Raksha Sutra :-
पूजा के स्थान पर बैठकर दीपक जलाये अब एक काला धागा लेकर उसके ऊपर सात गाँठे लगायें | प्रत्येक गाँठ को लगाते समय उपरोक्त शाबर मन्र का जाप करें और फूँक मारें | इस प्रकार 7 बार इस मंत्र का जाप करें | अब इस काले धागे को दीपक की लौं पर 21 बार घुमाये और गले में धारण कर ले या परिवार के अन्य सदस्य को धारण करा दे |
इस प्रकार शाबर मंत्र द्वारा अभिमंत्रित(Shabar Mantra Raksha Sutra) किया गया यह काला धागा आपको हर प्रकार की ऊपरी बाधाओं और पीडाओं को दूर करता है | यह धागा हर प्रकार से इसे धारण करने वाले की रक्षा करता है
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ॐ नमो महादेवी

सर्वकार्य सिद्धकर्णी जो पाती पुरे

ब्रह्मा विष्णु महेश तीनो देवतन

मेरी भक्ति गुरु की शक्ति

श्री गुरु गोरखनाथ की दुहाई

फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा || 

मंत्र प्रयोग विधि : – सांसारिक जीवन में आने वाली सभी पीडाएं और बाधाएं इस शाबर मंत्र के जाग्रत करने से दूर होने लगती है | इसलिए समस्या कोई भी इस शाबर मंत्र के प्रयोग से दूर होती है | उपरोक्त मंत्र का शाम को 6 बजे के बाद कभी भी उच्चारण किया जा सकता है | इस मंत्र का नियमित कम से कम 27 बार जप करना चाहिए |
शाबर मंत्रो से पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन्हें जाग्रत करने की आवश्यकता होती है | किसी भी शाबर मन्त्र को जाग्रत करने के लिए शाम के 06 बजे से रात्रि 09 बजे के बीच एक समय निश्चित कर 21 दिन तक प्रतिदिन गोबर के उपले की अग्नि प्रज्वल्लित कर इलायची के दानों द्वारा 108 मंत्र की आहूति दे |
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बुरी नजर उतारने का मंत्र/ Buri Nazar utarne ka Mantra :-
बच्चों के साथ -साथ किसी भी व्यस्क व्यक्ति पर बुरी नजर लगने जैसे संकेत दिखाई देने पर आप इस शाबर मंत्र द्वारा उपचार करें | रोगी व्यक्ति को तुरंत ही आराम मिलने लगेगा : –

ॐ नमो नजर जहाँ पद पीर न जानो |

बोले छल सों अमृत बानी |

कहो नजर कहाँ ते आई |

यहाँ की ठौर तोहि कौन बताई |

कौन जात तेरी , कहाँ ठाम |

किसकी बेटी क्या तेरो नाम |

कहाँ से उड़ी , कहाँ की जाया |

अब ही बस कर ले तेरी माया |

मेरी जात सुनो चितलाय |

जैसी होय सुनाऊँ आय |

तेलन ,तमोलन, चुहड़ी , चमारी |

कायथनी, खतरानी , कुम्हारी |

महतरानी, राजा की रानी |

जाको दोष ताहि सिर पड़े |

जाहर पीर नजर ते रक्षा करे |

मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति |

फुरे मंत्र ईश्वरो वाचा ||
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गुरु गोरखनाथ शाबर मंत्र / Guru Gorakhnath Mantra : –

ॐ वज्र में कोठा, वज्र में ताला

वज्र में बंध्या दस्ते द्वारा

तहां वज्र का लग्या किवाड़ा

वज्र में चौखट, वज्र में कील

जहां से आय, तहां ही जावे

जाने भेजा, जांकू खाए

हमको फेर न सूरत दिखाए

हाथ कूँ, नाक कूँ, सिर कूँ

पीठ कूँ, कमर कूँ, छाती कूँ

जो जोखो पहुंचाए

तो गुरु गोरखनाथ की आज्ञा फुरे

मेरी भक्ति गुरु की शक्ति

फुरो मंत्र इश्वरोवाचा ||
मंत्र प्रयोग विधि : – सात कुओं से जल लाकर इस जल को एक पात्र में एकत्रित कर रोगी को स्नान कराये | रोगी को स्नान कराते समय उपरोक्त मंत्र का उच्चारण करते रहे | वशीकरण व किये-कराये के प्रभाव से रोगी को तुरंत आराम मिलेगा |
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सिद्ध शाबर मंत्र (Sidh Shabar Mantra)
ॐ शिव गुरु गोरखनाथाय नमः
शाबर मंत्रों के जनक (Originator of Shabar Mantra)
शाबर मंत्रों के प्रवर्तक मूल रूप से भगवान शिव के परम भक्त थे। शाबर मंत्रों की उत्पत्ति का श्रेय गुरु गोरखनाथ और गुरु मछन्दर नाथ को जाता हैं। अपने जप, तप और श्रद्धा के कारण गुरु गोरखनाथ और मछन्दर बहुत पूजनीय माने जाते हैं।
शाबर मंत्र का प्रयोग और प्रभाव (Use and Effects of Shabar Mantra)
सिद्ध शाबर मंत्र बहुत शक्तिशाली होते हैं। किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रयोग किए गए मंत्रों को यह आसानी से काट सकते हैं। इन मंत्रों के प्रयोग द्वारा किसी भी समस्या का समाधान सरलता से किया जा सकता है। इन मंत्रों में विनियोग, व्रत, तर्पण, हवन, पूजा आदि की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
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शाबर मंत्र के महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Fact of Shabar Mantra)
* किसी भी आयु, जाति और वर्ण के पुरुष या स्त्रियां इस मंत्र का प्रयोग कर सकते हैं।
* इन मंत्रों की साधना के लिए गुरु की आवश्यकता महत्त्वपूर्ण नहीं होती है।
* षट्कर्म की साधना को करने के लिए गुरु की राय अवश्य लेनी चाहिए।
* मंत्र के जाप के लिए लाल या सफेद आसन बिछाकर उस पर बैठना चाहिए।
* शाबर मंत्र का जाप श्रद्धा और विश्वास के साथ ही करना चाहिए। 
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 वैदिक, पौराणिक एवं तांत्रिक मंत्रों के समान ‘शाबर-मंत्र’ भी अनादि और अचूक हैं। सभी मंत्रों के प्रवर्तक मूल रूप से भगवान शंकर ही हैं, परंतु शाबर मंत्रों के प्रवर्तक भगवान शंकर प्रत्यक्षतया नहीं हैं। इन मंत्रों के प्रवर्तक शिव भक्त गुरु गोरखनाथ तथा गुरु मत्स्येंद्र नाथ को माना जाता है।
 हनुमान साबर मंत्र : रात्रि में सोते समय यदि भूत-प्रेत आदि का डर लगता हो या जंगल में कहीं अनजान जगह सो रहे हों, तो हनुमानजी का यह चमत्कारिक साबर मंत्र तीन बार पढ़कर निश्‍चिंत होकर सो जाएं। हनुमानजी आपकी हर प्रकार से रक्षा करेंगे। यह विदित हो कि यह मंत्र मात्र जानकारी हेतु है। इसको सिद्ध करने के लिए किसी 'साबर मंत्र' के जानकार से संपर्क करें।
मध्यकाल में कालिका माता, हनुमानजी, भैरवनाथ, बगलामुखी आदि देवी और देवताओं सहित कई यक्षिणियों, पिशाचिनियों आदि के साबर मंत्र भी बनाए गए थे। मध्‍यकाल में तांत्रिक, काला जादू जानने वाले, बंजारे, आदिवासी, वनवासी, घुमक्कड़ और ठेठ गांव के लोगों में प्रचलित थे ये साबर मंत्र। आम शहरी जनता में ये मंत्र कभी प्रचलित नहीं रहे। आज भी कई तांत्रिक और जानकार लोग ही इन गुप्त मंत्रों के रहस्य को जानते हैं। कई साबर मंत्र तो अब लुप्त हो चुके हैं।
 साबर मंत्र बहुत जल्दी से सिद्ध हो जाते हैं, लेकिन इनके नियमों का पालन भी करना अत्यंत जरूरी है। नियमों और पवित्रता के पालन से यह मंत्र और भी असरकारक बन जाते हैं। यदि व्यक्ति इन साबर मंत्रों को गंभीरता से नहीं लेता है तो इसका उल्टा असर भी तुरंत शुरू हो जाता है इसीलिए इन मंत्रों को हंसी-मजाक में न लेकर इनको पूर्ण सम्मान के साथ लेना चाहिए। यदि आपका मन और नीयत साफ है तो 'साबर मंत्र' आपके साथ है।
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 कैसे करें साधना?
नवरात्रि में कम से कम दोनों काल (प्रातः एवं सायं) में तीन घंटा समय निकाल कर 26 माला प्रति दिन नियमित समय पर जपना चाहिए। शौच स्नान से निवृत्त होकर शुद्धतापूर्वक प्रातःकालीन उपासना पूर्व मुख और संध्याकाल की उपासना पश्चिम मुख होकर करनी चाहिए। जप के समय घी का दीपक जलाकर रखें और जल का एक पात्र निकट में रखें।
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 क्या करें साधना में?
प्रत्येक नवरात्रि में अलग-अलग साधनाएं की जाती है। साधना के पहले आपको यह भी तय करना होता है कि आप किस देवी की साधना करना चाहते हैं। जैसे, बगलामुखी देवी, काली माता, मां मातंगी या अम्बिका माता की साधना करना चाहते हैं या अन्य किसी की।
सामान्यजन माता के बीज मंत्र या शाबर मंत्रों का जाप कर सकते हैं। आप प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं। अष्टमी की रात्रि में दुर्गा सप्तशती के प्रत्येक मंत्र को विधिवत सिद्ध किया जाता है। सप्तश्लोकी दुर्गा के पाठ का 108 बार अष्टमी की रात्रि में पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
अधिकतर लोग इन दिनों शाबर मंत्र की सिद्धि करते हैं। कुछ लोग इन दिनों महामृत्युंजय मंत्र की साधना भी करते हैं। यदि आप तंत्र साधना करने का सोच रहे हैं तो इसके लिए आपको किसी योग्य गुरु की तलाश करनी चाहिए। यह एक अदभुत तांत्रिक साधना होती है अष्टनायिका साधना जिसे अर्धरात्रि में सिद्ध करते हैं। वर्ष में चार नवरात्रियां होती हैं।
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 दुर्गा माता के कई शाबर मंत्र हैं। उनमें से एक यहां प्रस्तुत है। इस मंत्र का जाप किसी जानकार से पूछकर ही करें।
डण्ड भुज-डण्ड, प्रचण्ड नो खण्ड। प्रगट देवि! तुहि झुण्डन के झुण्ड।
खगर दिखा खप्पर लियां, खड़ी कालका। तागड़दे मस्तंग, तिलक मागरदे् मस्तंग।
चोला जरी का, फागड़ दीफू, गले फुल माल, जय जय जयन्त।
जय आदि शक्ति। जय कालका खपर-धनी।
जय मचकुट छन्दनी देव। जय-जय महिरा, जय मरदिनी।
जय-जय चुण्ड-मुण्ड, भाण्डासुर-खण्डनी, जय रक्त बीच बिडाल-बिहण्डनी।
जय निशुम्भ को दलनी, जय शिव राजेश्वरी।
अमृत-यज्ञ, धागी-धृट, दृवड़-दृवड़नी। बड़ रवि डर-डरनी, ओम् ओम् ओम्।।।
क्या होगा साधना करने से?
जो साधक सावधान और एकाग्र चेतना से उपासना करता है, उसको धीरे-धीरे सिद्धियां प्राप्त होने लगती हैं। यदि कोई मनोकामना की पूर्ति हेतु साधना की जा रही है तो वह पूर्ण होती है। सभी तरह के संकट दूर हो जाते हैं। वर्ष की चारों नवरात्रियों में साधना करने से इसका परिणाम अति ही उत्सव पैदा करने वाला होता है।
साधना के नियम क्या हैं?
नवरात्रि साधना में ब्रह्मचर्य पालन बहुत जरूरी है। इसके अलावा एक समय ही भोजन ग्रहण करें या दोनों वक्त फल और दूध लेना भी उपवासवत् ही है। यथासम्भव नमक और मीठा (चीनी मिष्ठानादि) छोड़ दें। इसके अतिरिक्त, पूरा या नियमित समय तक मौन, भूमि-शयन, चमड़े की बनी वस्तु का त्याग, पशुओं की सवारी का त्याग, अपनी शारीरिक सेवाएं स्वयं करना तय करें। अपनी सुख-सुविधाओं को यथासम्भव त्याग कर उपासना में लीन होना ही तप है। पूजा या साधना का स्थान और समय भी नियुक्त होना चाहिए।
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अचूक उपाय
आजकल कई लोग ईष्र्या, द्वेष व अन्य नकारात्मक चीजों से घिरे हुए हैं। उन्हें दूसरों की कामयाबी अच्छी नहीं लगती। वे मन ही मन उनका बुरा सोचने लगते हैं। कभी-कभी तो वे दूसरों को नीचे गिराने के लिए जादू-टोना का भी सहारा लेते है। इससे सामने वाले की तरक्की प्रभावित होती है। इन सभी से बचने के लिए एक अचूक उपाय है, जिसका नाम शाबर मंत्र है।
क्या है शाबर मंत्र
ये एक बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है। ये तुंरत परिणाम देने वाला है। इसके प्रयोग से कठिन से कठिन चीज भी हासिल की जा सकती है। ये मंत्र दूसरे वैदिक व परंपरागत मंत्रों की तरह नही है। इसमें सिद्धि की जरूरत नहीं होती है।
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आम बोलचाल की भाषा का है उपयोग
शाबर मंत्र बहुत ही सरल होते हैं। इसके शब्द आम बोलचाल की भाषा में होते है। इसलिए इसे कोई भी, किसी भी उम्र का व्यक्ति पढ़ सकता है। ये मंत्र दूसरे मंत्रों की काट के लिए बहुत उपयोगी है।
आवाहन पर आते हैं भगवान
इस मंत्र की खासियत है कि ये तत्काल प्रभाव देता है। इस मंत्र के शब्द इतने प्रभावशाली हैं कि ये आपकी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए आपके पसंदीदा देवी-देवता का आवाहन करते हैं। तभी ईश्वर स्वयं कार्य के लिए रास्ता बनाते हैं।
बुरी-बला से रखता है सुरक्षित
इस मंत्र के शब्दोच्चारण मात्र से ही ये आपकी रक्षा करता है। ये आपके ऊपर होने वाले जादू-टोने व अन्य तांत्रिक शक्तियों को विफल करता है। ये नजर दोष से भी बचाता है। ये आपके आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर माहौल को सकारात्मक बनाता है।
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शिव हैं मूल प्रवर्तक
शाबर मंत्र के मूल प्रवर्तक शिव जी हैं। उन्होंने ये मंत्र माता पार्वती को सुनाया था। इसके बाद बाबा गोरखनाथ और गुरु मछन्दर नाथ ने इस मंत्र का विस्तार किया। उन्होंने इसे नया रूप देकर प्रस्तारित किया।
गुरू की नहीं आवश्यकता
दूसरे मंत्रों की तरह शाबर मंत्र को ग्रहण करने के लिए किसी गुरू का होना आवश्यक नही है। आप खुद से भी इस मंत्र का जप कर सकते हैं। किसी तरह की जानकारी के लिए आप विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं। शाबर मंत्र बहुत ही सरल होते हैं। जैसे - ऊं शिव गुरु गोरखनाथाय नम:। ये एक सिद्ध शाबर मंत्र है।
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हनुमान शाबर मंत्र
मंत्रों की महत्ता के बारे में तो आप जानते ही हैं. हर बिगड़े काम को बनाने के लिए मंत्र मौजूद हैं. बस आपको उनका सही उच्चारण करना आना चाहिए. आज हम आपको 'हनुमान शाबर मंत्र' के बारे में बताएंगे. जानिए, हनुमान शाबर मंत्र क्या हैं? उसकी महत्ता क्या है और उनका उच्चारण कैसे किया जाता है?
किसने लिखें शाबर मंत्र
शाबर मंत्र अत्यधिक शक्तिशाली होते है और बहुत जल्द ही परिणाम लाते हैं. ऐसा माना जाता है की शाबर मंत्र गुरु गोरखनाथ जी और नवनाथ चौरासी सिद्धों ने लिखे थे. यह मंत्र आमतौर पर ग्रामीण भारतीय भाषाओं में हैं. हालांकि ये मंत्र हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि इस्लाम में और अन्य धर्मों में भी हैं.
शाबर मंत्रों का उद्देश्य
हनुमान शाबर मंत्र एक तरह का वशीकरण मंत्र होता है. शाबर मंत्रों से किसी भी व्यक्ति को उन्हें उपयोग में लेने से पहले सिद्धि हासिल करने के जरुरत नहीं होती है क्योंकि वे पहले से ही सिद्ध मंत्र हैं.
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शाबर मंत्रों का उद्देश्य

सभी शाबर वशीकरण मंत्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए या किसी उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए उपयोग में लाये जाते हैं. शाबर वशीकरण मंत्र विशेषज्ञ अपनी इच्छा के अनुसार आप के लिए शाबर मंत्र प्रदान कर सकता है. इतना ही नहीं, शाबर वशीकरण मंत्र विशेषज्ञ शाबर मंत्रों का उपयोग करने और उनका सही तरह से उच्चारण करने का दिशा-निर्देश भी देते हैं.
हनुमान मंत्र और शाबर मंत्र
हनुमान मंत्र और शाबर मंत्र, दोनों का ही प्रयोग वशीकरण के लिए किया जाता हैं. हनुमान मंत्र और शाबर मंत्र दोनों ही बहुत शक्तिशाली है. दोनों मंत्रों में केवल एक ही अंतर है, कि हनुमान मंत्र साधने के लिए सिद्धि‍ करना जरुरी है पर शाबर वशीकरण मंत्र के लिए सिद्धि‍ करना जरुरी नहीं हैं.
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हनुमान शाबर मंत्र की ताकत
हुनमानजी , भगवान शिव का अवतार हैं. भगवान हनुमान के रूप में तेजी है जैसी तेजी हमारे मन में होती है क्यूंकि उनकी गति वायु देव की तरह हैं. भगवान हनुमान का अपनी इन्द्रियों पर पूरा नियंत्रण है जैसे वायु देव का. शाबर हनुमान मंत्र दुश्मनों के द्वारा फैलाई गयी नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की क्षमता रखता है.
कैसे करें हनुमान शाबर मंत्र का जाप
हनुमान शाबर मंत्र का जाप करने के लिए काला कपड़ा पहनकर शुक्रवार से शुरुआत करें. इस मंत्र की माला लें और उस माला का 5 बार जाप करें लगातार 5 दिन तक. साधना के अंत में भगवान हनुमान की पूजा और माला के लिए एक गढ्ढा खोदें और जमीन में ये माला डाल दें.
हनुमान शाबर मन्त्र
हनुमान जाग.---- किलकारी मार.---- तू हुंकारे.---- राम काज सँवारे.---- ओढ़ सिंदूर सीता मैया का.---- तू प्रहरी राम द्वारे.---- मैं बुलाऊँ , तु अब आ.---- राम गीत तु गाता आ.---- नहीं आये तो हनुमाना.---- श्री राम जी ओर सीता मैया कि दुहाई.---- शब्द साँचा.---- पिंड कांचा.---- फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा.----

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हनुमान जी , भैरव जी और महाकाली इन तीनों शक्तियों को कलियुग में जागृत माना गया है | अर्थात थोड़े से भक्ति भाव से ये प्रसन्न होकर अपने भक्तो का उद्धार करते है | महाकाली की उपासना करने से जीवन में सुख -शांति , शक्ति व बुद्धि का विकास होता है | इसके साथ -साथ सभी प्रकार के भय आदि से मुक्ति भी मिलती है |
माँ काली की उपसना करने वाले व्यक्ति को उनकी पूजा विधिवत करनी चाहिए और यदि किसी भी प्रकार का आपने यदि संकल्प लिया हुआ है तो कार्य पूर्ण होने पर उसे पूरा अवश्य करें अन्यथा माँ काली रुष्ट भी जो जाती है और उनका प्रकोप भी झेलना पड़ सकता है |
महाकाली शाबर मंत्र :-

आज हम आपको एक ऐसे शाबर मंत्र के विषय में बता रहे है जिसके प्रयोग से महाकाली शीघ्र प्रसन्न होती है | आप किसी भी मनोकामना पूर्ती हेतु इस शाबर मंत्र को सिद्ध कर सकते है | मंत्र इस प्रकार है : –

ॐ काली घाटे काली माँ |
पतित पावनी काली माँ |
जवा फूले |
स्थुरी जले |
सेई जवा फूल में सीआ बेड़ाए |
देवीर अनुर्बले |
एहि होत करिवजा होइवे |
ताही काली धर्मेर |
वले काहार आज्ञे राठे |
काली का चंडीर आसे 
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मंत्र सिद्ध करने की विधि : –

वैसे तो शाबर मंत्र अपने आप में सिद्ध मंत्र होते है किन्तु इन मन्त्रों में प्रबलता लाने के लिए और अपने कार्य को सिद्ध करने के लिए कुछ जाप करने जरुरी होते है | तो आइये जानते है उपरोक्त शाबर मंत्र को सिद्ध करने की विधि के विषय में :

शनिवार शाम को 7 से 10 के बीच में कोई एक समय निश्चित कर ले और आसन बिछाकर पूर्व दिशा की तरफ मुख करके बैठ जाये | अब आप हाथ में थोडा जल लेकर संकल्प ले | संकल्प किस प्रकार से लेते है इसके लिए आप यह post पढ़े : मंत्र सिद्धि कैसे करें ?

अपने साथ में एक गोला (पका हुआ नारियल ) इसे छोटे- छोटे टुकडो में तोड़ ले | एक मिटटी का खुला बर्तन जैसे की मटके का ढक्कन या इससे बड़ा हो तो भी उचित होगा पर मिटटी का होने चाहिए | अब एक गाय के गोबर के उपले (कंडा ) को भी अपने पास में रख ले | थोड़ी मात्रा में जलने वाला कपूर और घी रखे | अब आप अपनी क्षमता अनुसार जितने भी मंत्र जाप कर सकते है उनकी संख्या निश्चित कर उतनी संख्या के बराबर आधे लोंग और आधे इलाइची लेकर रख ले |
अब आप गोबर के उपलों (कंडो ) द्वारा मिटटी के बर्तन में कपूर की सहायता से अग्नि प्रज्वलित करें | अब आप मंत्र का जाप आरम्भ कर दे और प्रत्येक मंत्र के बाद आप एक लोंग या एक इलाइची अग्नि में डाल दे | थोड़े -थोड़े समय पश्चात् घी और नारियल का गोला जिसके छोटे छोटे टुकड़े किये है उन्हें भी डालते रहे | घी और गोले को आपको प्रत्येक मंत्र के बाद अग्नि में डालने की आवश्यकता नही है , यह सिर्फ इसलिए है कि अग्नि लगातार प्रज्वलित होती रहे |
इस प्रकार आप प्रत्येक मंत्र के बाद एक लोंग या इलाइची को अग्नि में छोड़ते चले जाये | आपको किसी प्रकार के दीपक जलाने या माला लेने की आवश्यकता नही है | बस आप दी गयी विधि अनुसार मंत्र जाप करते जाये | जैसे ही आप अपने मंत्र जाप पूरे करते है अब आप फिर से हाथ में जल लेकर फिर से संकल्प ले | पूजा के बाद में संकल्प कैसे लेते है यह भी आप ” मंत्र सिद्धि कैसे करें ? ” इस post में पढ़ सकते है |
इस क्रिया को आप शनिवार को शुरू कर 7 शनिवार तक प्रतिदिन करें | इस प्रकार 7 शनिवार तक इस प्रकार करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है | अब आप किसी भी मनोकामना पूर्ती हेतु इस मंत्र का प्रयोग कर सकते है | आप अपने कार्य में अवश्य सफल होंगे |
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स्त्री वशीकरण विधि : – 
गुरूवार के दिन शाम के समय आप अपने घर पर एक स्थान सुनिश्चित कर ले | उस स्थान पर एक आसन पर आप बैठ जाये | अब एक डिब्बी में थोडा नमक ले -ले | ध्यान दे डिब्बी पर ढक्कन अवश्य हो | अब आप इस डिब्बी को हाथ में लेकर इस से ढक्कन को हटा दे और नीचे दिए गये मंत्र का उच्चारण करें | एक मंत्र का उच्चारण करने के पश्चात आप डिब्बी में नमक की तरफ फूंक लगाये | इस प्रकार आप यह क्रिया 7 बार करें | इस प्रकार सात बार इस नमक को अभिमंत्रित करने के पश्चात् अब आप इस डिब्बी को बंदकर किसी सुरक्षित स्थान पर रख दे |
इसी क्रिया को आप प्रतिदिन 5वे गुरूवार तक करें | इस प्रकार लगातार 29 दिन तक 7 बार इस मंत्र को अभिमंत्रित करने से यह नमक पूर्णतया अभिमंत्रित हो जाता है | ध्यान दे ,जिस समय का आप चुनाव करते है , प्रतिदिन उसी समय पर यह क्रिया करें और एक भी दिन बीच में कार्य छोड़े नहीं |
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मंत्र इस प्रकार है : –
                        ⇒ ” ॐ भगवती भग भाग दायिनी देव दत्तीं मम वश्यं कुरु कुरु स्वाहा ” ⇐

इस मंत्र में जहाँ पर “देव दत्तीं ” शब्द आया है | आप इसके स्थान पर अभिलाषित स्त्री नाम ले |
अब 29 दिन बाद आप इस नमक को अभिलाषित स्त्री को खिला दे | ऐसा करने के पश्चात अब आप जैसे ही उस स्त्री से बात करेंगे वह आपके वशीभूत होनी शुरू हो जाएगी |
जरुरी सूचना :- यदपि, शाबर मंत्र अपना प्रभाव कभी नही खोते , किन्तु फिर भी इस प्रकार के शाबर मंत्र द्वारा किसी का भी अहित किया जा सकता है इसलिए आप इस प्रकार के मंत्र का प्रयोग केवल मानव कल्याण के उद्देश से ही करें तो उचित होगा ||
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साबर’-मन्त्रों में ‘आन’ और ‘शाप’, ‘श्रद्धा’ और ‘धमकी’ दोनों का प्रयोग किया जाता है । साधक ‘याचक’ होता हुआ भी देवता को सब कुछ कहता है, उसी से सब कुछ कराना चाहता है । आश्चर्य यह है कि उसकी यह ‘आन’ भी काम करती है । ‘आन’ का अर्थ है – सौगन्ध ।
शास्त्रीय प्रयोगों में उक्त प्रकार की ‘आन’ नहीं रहती । बाल-सुलभ सरलता का विश्वास ‘साबर मन्त्रों का साधक मन्त्र के देवता के प्रति रखता है । जिस प्रकार अबोध बालक की अभद्रता पर उसके माता-पिता अपने वात्सल्य-प्रेम के कारण कोई ध्यान नहीं देते, वैसे ही बाल-सुलभ ‘सरलता’ और ‘विश्वास’ के आधार पर ‘साबर’ मन्त्रों की साधना करना वाला सिद्धि प्राप्त कर लेता है ।
‘साबर’-मन्त्रों में संस्कृत, प्राकृत और क्षेत्रीय – सभी भाषाओं का उपयोग मिलता है । किन्हीं-किन्हीं मन्त्रों में संस्कृत और मलयालय, कन्नड़, गुजराती, बंगला या तमिल भाषाओं का मिश्रित रुप मिलेगा, तो किन्हीं में शुद्ध क्षेत्रीय भाषाओं की ग्राम्य-शैली और कल्पना भी मिल जायेगी ।
भारत के एक बड़े भू-भाग में बोली जाने वाली भाषा ‘हिन्दी’ है । अतः अधिकांश ‘साबर’ – मन्त्र हिन्दी में ही मिलते हैं । इस मन्त्रों में शास्त्रीय मन्त्रों के समान ‘षडङ्ग’ – ऋषि, छन्द, वीज, शक्ति, कीलक और देवता – की योजना अलग से नहीं रहती, अपितु इन अंगों का वर्णन मन्त्र में ही निहित रहता है । इसलिए प्रत्येक ‘साबर’ मन्त्र अपने आप में पूर्ण होता है । उपदेष्टा ‘ऋषि’ के रुप में गोरखनाथ, सुलेमान जैसे सिद्ध-पुरुष हैं । कई मन्त्रों में इनके नाम लिए जाते हैं और कइयों में केवल ‘गुरु के नाम से ही काम चल जाता है ।
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द्वापरयुग में भगवान् श्री कृष्ण की आज्ञा से अर्जुन ने पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति के लिए भगवान् शिव का तप किया एक दिन भगवान् शिव एक शिकारी का भेष बनाकर आये और जब पूजा के बाद अर्जुन ने सुअर पर बाण चलाया तो ठीक उसी वक़्त भगवान् शिव ने भी उस सुअर को तीर मारा , दोनों में वाद विवाद हो गया और शिकारी रुपी शिव ने अर्जुन से कहा , मुझसे युद्ध करो जो युद्ध में जीत जायेगा सुअर उसी को दीया जायेगा अर्जुन और भगवान् शिव में युद्ध शुरू हुआ , युद्ध देखने के लिए माँ पार्वती भी शिकारी का भेष बना वहां आ गयी और युद्ध देखने लगी तभी भगवान् कृष्ण ने अर्जुन से कहा जिसका रोज तप करते हो वही शिकारी के भेष में साक्षात् खड़े है अर्जुन ने भगवान् शिव के चरणों में गिरकर प्रार्थना की और भगवान् शिव ने अर्जुन को अपना असली स्वरुप दिखाया !
अर्जुन भगवान् शिव के चरणों में गिर पड़े और पाशुपत अस्त्र के लिए प्रार्थना की शिव ने अर्जुन को इच्छित वर दीया , उसी समय माँ पार्वती ने भी अपना असली स्वरुप दिखाया जब शिव और अर्जुन में युद्ध हो रहा था तो माँ भगवती शिकारी का भेष बनाकर बैठी थी और उस समय अन्य शिकारी जो वहाँ युद्ध देख रहे थे उन्होंने जो मॉस का भोजन किया वही भोजन माँ भगवती को शिकारी समझ कर खाने को दिया माता ने वही भोजन ग्रहण किया इसलिए जब माँ भगवती अपने असली रूप में आई तो उन्होंने ने भी शिकारीओं से प्रसन्न होकर कहा ” हे किरातों मैं प्रसन्न हूँ , वर मांगो ” इसपर शिकारीओं ने कहा ” हे माँ हम भाषा व्याकरण नहीं जानते और ना ही हमे संस्कृत का ज्ञान है और ना ही हम लम्बे चौड़े विधि विधान कर सकते है पर हमारे मन में भी आपकी और महादेव की भक्ति करने की इच्छा है , इसलिए यदि आप प्रसन्न है तो भगवान शिव से हमे ऐसे मंत्र दिलवा दीजिये जिससे हम सरलता से आप का पूजन कर सके
माँ भगवती की प्रसन्नता देख और भीलों का भक्ति भाव देख कर आदिनाथ भगवान् शिव ने साबर मन्त्रों की रचना की यहाँ एक बात बताना बहुत आवश्यक है कि नाथ पंथ में भगवान् शिव को ” आदिनाथ ” कहा जाता है और माता पार्वती को ” उदयनाथ ” कहा जाता है भगवान् शिव जी ने यह विद्या भीलों को प्रदान की और बाद में यही विद्या दादा गुरु मत्स्येन्द्रनाथ को मिली , उन्होंने इस विद्या का बहुत प्रचार प्रसार किया और करोड़ो साबर मन्त्रों की रचना की उनके बाद गुरु गोरखनाथ जी ने इस परम्परा को आगे बढ़ाया और नवनाथ एवं चौरासी सिद्धों के माध्यम से इस विद्या का बहुत प्रचार हुआ कहा जाता है कि योगी कानिफनाथ जी ने पांच करोड़ साबर मन्त्रों की रचना की और वही चर्पटनाथ जी ने सोलह करोड़ मन्त्रों की रचना की मान्यता है कि योगी जालंधरनाथ जी ने तीस करोड़ साबर मन्त्रों की रचना की इन योगीयो के बाद अनन्त कोटि नाथ सिद्धों ने साबर मन्त्रों की रचना की यह साबर विद्या नाथ पंथ में गुरु शिष्य परम्परा से आगे बढ़ने लगी , इसलिए साबर मंत्र चाहे किसी भी प्रकार का क्यों ना हो उसका सम्बन्ध किसी ना किसी नाथ पंथी योगी से अवश्य होता है अतः यह कहना गलत ना होगा कि साबर मंत्र नाथ सिद्धों की देन है।
Shabar siddhi mantra, 
१ . प्रबल साबर –
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इस प्रकार के साबर मन्त्र कार्य सिद्धि के लिए प्रयोग होते है , इन में प्रत्यक्षीकरण नहीं होता केवल जिस मंशा से जप किया जाता है वह इच्छा पूर्ण हो जाती है इन्हें कार्य सिद्धि मंत्र कहना गलत ना होगा यह मंत्र सभी प्रकार के कर्मों को करने में सक्षम है अतः इस प्रकार के मन्त्रों में व्यक्ति देवता से कार्यसिद्धि के लिए प्रार्थना करता है , साधक एक याचक के रूप में देवता से याचना करता है।

२. बर्भर साबर –
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इस प्रकार के साबर मन्त्र भी सभी प्रकार के कार्यों को करने में सक्षम है पर यह प्रबल साबर मन्त्रों से अधिक तीव्र माने जाते है बर्भर साबर मन्त्रों में साधक देवता से याचना नहीं करता अपितु देवता से सौदा करता है इस प्रकार के मन्त्रों में देवता को गाली, श्राप, दुहाई और धमकी आदि देकर काम करवाया जाता है देवता को भेंट दी जाती है और कहा जाता है कि मेरा अमुक कार्य होने पर मैं आपको इसी प्रकार भेंट दूंगा ! यह मंत्र बहुत ज्यादा उग्र होते है।
Shabar siddhi mantra, 
. बराटी साबर –
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इस प्रकार के साबर मन्त्रों में देवता को भेंट आदि ना देकर उनसे बलपूर्वक काम करवाया जाता है यह मंत्र स्वयं सिद्ध होते है पर गुरुमुखी होने पर ही अपना पूर्ण प्रभाव दिखाते है ! इस प्रकार के मंत्रों में साधक याचक नहीं होता और ना ही सौदा करता है वह देवता को आदेश देता है कि मेरा अमुक कार्य तुरंत करो यह मन्त्र मुख्य रूप से योगी कानिफनाथ जी के कापालिक मत में अधिक प्रचलित है कुछ प्रयोगों में योगी अपने जुते पर मंत्र पढ़कर उस जुते को जोर जोर से नीचे मारते है तो देवता को चोट लगती है और मजबूर होकर देवता कार्य करता है।
४. अढैया साबर –
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इस प्रकार के साबर मंत्र बड़े ही प्रबल माने जाते है और इन मन्त्रों के प्रभाव से प्रत्यक्षीकरण बहुत जल्दी होता है प्रत्यक्षीकरण इन मन्त्रों की मुख्य विशेषता है और यह मंत्र लगभग ढ़ाई पंक्तियों के ही होते है ! अधिकतर अढैया मन्त्रों में दुहाई और धमकी का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता पर फिर भी यह पूर्ण प्रभावी होते है।
Shabar siddhi mantra, 
 डार साबर –
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डार साबर मन्त्र एक साथ अनेक देवताओं का दर्शन करवाने में सक्षम है जिस प्रकार “बारह भाई मसान” साधना में बारह के बारह मसान देव एक साथ दर्शन दे जाते है अनेक प्रकार के देवी देवता इस मंत्र के प्रभाव से दर्शन दे जाते है जैसे “चार वीर साधना” इस मार्ग से की जाती है और चारों वीर एक साथ प्रकट हो जाते है इन मन्त्रों की जितनी प्रशंसा की जाए उतना ही कम है , यह दिव्य सिद्धियों को देने वाले और हमारे इष्ट देवी देवताओं का दर्शन करवाने में पूर्ण रूप से सक्षम है गुरु अपने कुछ विशेष शिष्यों को ही इस प्रकार के मन्त्रों का ज्ञान देते है।
Shabar siddhi mantra, 
 यदि सभा में साबर मन्त्र बोल दिए जाये तो साबर मन्त्र अपना प्रभाव छोड़ देते है।

२.यदि किसी किताब से उठाकर मन्त्र जपना शुरू कर दे तो भी साबर मन्त्र अपना पूर्ण प्रभाव नहीं देते।

३.साबर मन्त्र अशुद्ध होते है इनके शब्दों का कोई अर्थ नहीं होता क्योंकि यह ग्रामीण भाषा में होते है यदि इन्हें शुद्ध कर दिया जाये तो यह अपना प्रभाव छोड़ देते है।

४.प्रदर्शन के लिए यदि इनका प्रयोग किया जाये तो यह अपना प्रभाव छोड़ देते है !

५.यदि केवल आजमाइश के लिए इन मंत्रो का जप किया जाये तो यह मन्त्र अपना पूर्ण प्रभाव नहीं देते
ऐसे और भी अनेक कारण है उचित यही रहता है कि साबर मंत्रो को गुरुमुख से प्राप्त करे क्योंकि गुरु साक्षात शिव होते है और साबर मंत्रो के जन्मदाता स्वयं शिव है शिव के मुख से निकले मन्त्र असफल हो ही नहीं सकते
साबर मंत्रो के सुप्त होने का कारण कुछ भी हो इस विधि के बाद साबर मन्त्र पूर्ण रूप से प्रभावी होते है।
Shabar siddhi mantra, 

सिद्ध शाबर मन्त्र
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शीघ्र फल-दायक सिद्ध शाबर मंत्र
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‘साबर’ का प्रतीक अर्थ होता है ग्राम्य, अपरिष्कृत । ‘साबर-तन्त्र’ – तन्त्र की ग्राम्य-शाखा है । इसके प्रवर्तक भगवान् शंकर प्रत्यक्ष-तया नहीं है, किन्तु जिन सिद्धों ने इसका आविष्कार किया, वे परम-शिव-भक्त अवश्य थे । गुरु गोरखनाथ तथा गुरु मछन्दर नाथ ‘साबर-मन्त्र’ के जनक माने जाते हैं । अपने तप-प्रभाव से वे भगवान् शंकर के समान पूज्य माने जाते हैं । अपनी साधना के कारण वे मन्त्र-प्रवर्तक ऋषियों के समान विश्वास और श्रद्धा के पात्र हैं । ‘सिद्ध’ और ‘नाथ’ सम्प्रदायों ने परम्परागत मन्त्रों के मूल सिद्धान्तों को लेकर बोल-चाल की भाषा को मन्त्रो का दर्जा दिया गया ।

‘साबर’-मन्त्रों में ‘आन’ और ‘शाप’, ‘श्रद्धा’ और ‘धमकी’ दोनों का प्रयोग किया जाता है । साधक ‘याचक’ होता हुआ भी देवता को सब कुछ कहता है, उसी से सब कुछ कराना चाहता है । आश्चर्य यह है कि उसकी यह ‘आन’ भी काम करती है । ‘आन’ का अर्थ है – सौगन्ध ।
शास्त्रीय प्रयोगों में उक्त प्रकार की ‘आन’ नहीं रहती । बाल-सुलभ सरलता का विश्वास ‘साबर मन्त्रों का साधक मन्त्र के देवता के प्रति रखता है । जिस प्रकार अबोध बालक की अभद्रता पर उसके माता-पिता अपने वात्सल्य-प्रेम के कारण कोई ध्यान नहीं देते, वैसे ही बाल-सुलभ ‘सरलता’ और ‘विश्वास’ के आधार पर ‘साबर’ मन्त्रों की साधना करना वाला सिद्धि प्राप्त कर लेता है ।

‘साबर’-मन्त्रों में संस्कृत, प्राकृत और क्षेत्रीय – सभी भाषाओं का उपयोग मिलता है । किन्हीं-किन्हीं मन्त्रों में संस्कृत और मलयालय, कन्नड़, गुजराती, बंगला या तमिल भाषाओं का मिश्रित रुप मिलेगा, तो किन्हीं में शुद्ध क्षेत्रीय भाषाओं की ग्राम्य-शैली और कल्पना भी मिल जायेगी ।

भारत के एक बड़े भू-भाग में बोली जाने वाली भाषा ‘हिन्दी’ है । अतः अधिकांश ‘साबर’ – मन्त्र हिन्दी में ही मिलते हैं । इस मन्त्रों में शास्त्रीय मन्त्रों के समान ‘षडङ्ग’ – ऋषि, छन्द, वीज, शक्ति, कीलक और देवता – की योजना अलग से नहीं रहती, अपितु इन अंगों का वर्णन मन्त्र में ही निहित रहता है । इसलिए प्रत्येक ‘साबर’ मन्त्र अपने आप में पूर्ण होता है । उपदेष्टा ‘ऋषि’ के रुप में गोरखनाथ, सुलेमान जैसे सिद्ध-पुरुष हैं । कई मन्त्रों में इनके नाम लिए जाते हैं और कइयों में केवल ‘गुरु के नाम से ही काम चल जाता है ।

‘पल्लव’ (मन्त्र के अन्त में लगाए जाने वाले शब्द) के स्थान में ‘शब्द साँचा पिण्ड काचा, फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा’ – वाक्य ही सामान्यतः रहता है । इस वाक्य का अर्थ है “शब्द ही सत्य है, नष्ट नहीं होता । यह देह अनित्य है, बहुत कच्चा है । हे मन्त्र ! तुम ईश्वरी वाणी हो (ईश्वर के वचन से प्रकट हो)” इसी प्रकार के या इससे मिलते-जुलते दूसरे शब्द इस मन्त्रों के ‘पल्लव’ होते

साबर मंत्रो को जगाने की विधि
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द्वापरयुग में भगवान् श्री कृष्ण की आज्ञा से अर्जुन ने पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति के लिए भगवान् शिव का तप किया एक दिन भगवान् शिव एक शिकारी का भेष बनाकर आये और जब पूजा के बाद अर्जुन ने सुअर पर बाण चलाया तो ठीक उसी वक़्त भगवान् शिव ने भी उस सुअर को तीर मारा , दोनों में वाद विवाद हो गया और शिकारी रुपी शिव ने अर्जुन से कहा , मुझसे युद्ध करो जो युद्ध में जीत जायेगा सुअर उसी को दीया जायेगा अर्जुन और भगवान् शिव में युद्ध शुरू हुआ , युद्ध देखने के लिए माँ पार्वती भी शिकारी का भेष बना वहां आ गयी और युद्ध देखने लगी तभी भगवान् कृष्ण ने अर्जुन से कहा जिसका रोज तप करते हो वही शिकारी के भेष में साक्षात् खड़े है अर्जुन ने भगवान् शिव के चरणों में गिरकर प्रार्थना की और भगवान् शिव ने अर्जुन को अपना असली स्वरुप दिखाया !

अर्जुन भगवान् शिव के चरणों में गिर पड़े और पाशुपत अस्त्र के लिए प्रार्थना की शिव ने अर्जुन को इच्छित वर दीया , उसी समय माँ पार्वती ने भी अपना असली स्वरुप दिखाया जब शिव और अर्जुन में युद्ध हो रहा था तो माँ भगवती शिकारी का भेष बनाकर बैठी थी और उस समय अन्य शिकारी जो वहाँ युद्ध देख रहे थे उन्होंने जो मॉस का भोजन किया वही भोजन माँ भगवती को शिकारी समझ कर खाने को दिया माता ने वही भोजन ग्रहण किया इसलिए जब माँ भगवती अपने असली रूप में आई तो उन्होंने ने भी शिकारीओं से प्रसन्न होकर कहा ” हे किरातों मैं प्रसन्न हूँ , वर मांगो ” इसपर शिकारीओं ने कहा ” हे माँ हम भाषा व्याकरण नहीं जानते और ना ही हमे संस्कृत का ज्ञान है और ना ही हम लम्बे चौड़े विधि विधान कर सकते है पर हमारे मन में भी आपकी और महादेव की भक्ति करने की इच्छा है , इसलिए यदि आप प्रसन्न है तो भगवान शिव से हमे ऐसे मंत्र दिलवा दीजिये जिससे हम सरलता से आप का पूजन कर सके

माँ भगवती की प्रसन्नता देख और भीलों का भक्ति भाव देख कर आदिनाथ भगवान् शिव ने साबर मन्त्रों की रचना की यहाँ एक बात बताना बहुत आवश्यक है कि नाथ पंथ में भगवान् शिव को ” आदिनाथ ” कहा जाता है और माता पार्वती को ” उदयनाथ ” कहा जाता है भगवान् शिव जी ने यह विद्या भीलों को प्रदान की और बाद में यही विद्या दादा गुरु मत्स्येन्द्रनाथ को मिली , उन्होंने इस विद्या का बहुत प्रचार प्रसार किया और करोड़ो साबर मन्त्रों की रचना की उनके बाद गुरु गोरखनाथ जी ने इस परम्परा को आगे बढ़ाया और नवनाथ एवं चौरासी सिद्धों के माध्यम से इस विद्या का बहुत प्रचार हुआ कहा जाता है कि योगी कानिफनाथ जी ने पांच करोड़ साबर मन्त्रों की रचना की और वही चर्पटनाथ जी ने सोलह करोड़ मन्त्रों की रचना की मान्यता है कि योगी जालंधरनाथ जी ने तीस करोड़ साबर मन्त्रों की रचना की इन योगीयो के बाद अनन्त कोटि नाथ सिद्धों ने साबर मन्त्रों की रचना की यह साबर विद्या नाथ पंथ में गुरु शिष्य परम्परा से आगे बढ़ने लगी , इसलिए साबर मंत्र चाहे किसी भी प्रकार का क्यों ना हो उसका सम्बन्ध किसी ना किसी नाथ पंथी योगी से अवश्य होता है अतः यह कहना गलत ना होगा कि साबर मंत्र नाथ सिद्धों की देन है।

साबर मन्त्रों के मुख्य पांच प्रकार है –
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१ . प्रबल साबर –
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इस प्रकार के साबर मन्त्र कार्य सिद्धि के लिए प्रयोग होते है , इन में प्रत्यक्षीकरण नहीं होता केवल जिस मंशा से जप किया जाता है वह इच्छा पूर्ण हो जाती है इन्हें कार्य सिद्धि मंत्र कहना गलत ना होगा यह मंत्र सभी प्रकार के कर्मों को करने में सक्षम है अतः इस प्रकार के मन्त्रों में व्यक्ति देवता से कार्यसिद्धि के लिए प्रार्थना करता है , साधक एक याचक के रूप में देवता से याचना करता है।

२. बर्भर साबर –
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इस प्रकार के साबर मन्त्र भी सभी प्रकार के कार्यों को करने में सक्षम है पर यह प्रबल साबर मन्त्रों से अधिक तीव्र माने जाते है बर्भर साबर मन्त्रों में साधक देवता से याचना नहीं करता अपितु देवता से सौदा करता है इस प्रकार के मन्त्रों में देवता को गाली, श्राप, दुहाई और धमकी आदि देकर काम करवाया जाता है देवता को भेंट दी जाती है और कहा जाता है कि मेरा अमुक कार्य होने पर मैं आपको इसी प्रकार भेंट दूंगा ! यह मंत्र बहुत ज्यादा उग्र होते है।

३. बराटी साबर –
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इस प्रकार के साबर मन्त्रों में देवता को भेंट आदि ना देकर उनसे बलपूर्वक काम करवाया जाता है यह मंत्र स्वयं सिद्ध होते है पर गुरुमुखी होने पर ही अपना पूर्ण प्रभाव दिखाते है ! इस प्रकार के मंत्रों में साधक याचक नहीं होता और ना ही सौदा करता है वह देवता को आदेश देता है कि मेरा अमुक कार्य तुरंत करो यह मन्त्र मुख्य रूप से योगी कानिफनाथ जी के कापालिक मत में अधिक प्रचलित है कुछ प्रयोगों में योगी अपने जुते पर मंत्र पढ़कर उस जुते को जोर जोर से नीचे मारते है तो देवता को चोट लगती है और मजबूर होकर देवता कार्य करता है।

४. अढैया साबर –
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इस प्रकार के साबर मंत्र बड़े ही प्रबल माने जाते है और इन मन्त्रों के प्रभाव से प्रत्यक्षीकरण बहुत जल्दी होता है प्रत्यक्षीकरण इन मन्त्रों की मुख्य विशेषता है और यह मंत्र लगभग ढ़ाई पंक्तियों के ही होते है ! अधिकतर अढैया मन्त्रों में दुहाई और धमकी का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता पर फिर भी यह पूर्ण प्रभावी होते है।

५. डार साबर –
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डार साबर मन्त्र एक साथ अनेक देवताओं का दर्शन करवाने में सक्षम है जिस प्रकार “बारह भाई मसान” साधना में बारह के बारह मसान देव एक साथ दर्शन दे जाते है अनेक प्रकार के देवी देवता इस मंत्र के प्रभाव से दर्शन दे जाते है जैसे “चार वीर साधना” इस मार्ग से की जाती है और चारों वीर एक साथ प्रकट हो जाते है इन मन्त्रों की जितनी प्रशंसा की जाए उतना ही कम है , यह दिव्य सिद्धियों को देने वाले और हमारे इष्ट देवी देवताओं का दर्शन करवाने में पूर्ण रूप से सक्षम है गुरु अपने कुछ विशेष शिष्यों को ही इस प्रकार के मन्त्रों का ज्ञान देते है।

नाथ पंथ की महानता को देखकर बहुत से पाखंडी लोगो ने अपने आपको नाथ पंथी घोषित कर दिया है ताकि लोग उनकी बातों पर विश्वास कर ले ऐसे लोगो से यदि यह पूछा जाये कि आप बारह पन्थो में से किस पंथ से सम्बन्ध रखते है ? आपकी दीक्षा किस पीठ से हुयी है ? आपके गुरु कौन है ? तो इन लोगो का उत्तर होता है कि मैं बताना जरूरी नहीं समझता क्योंकि इन लोगो को इस विषय में ज्ञान ही नहीं होता , पर आज के इस युग में लोग बड़े समझदार है और इन धूर्तो को आसानी से पहचान लेते है।

ऐसे महापाखंडीयो ने ही प्रचार किया है कि सभी साबर मन्त्र ” गोरख वाचा ” है अर्थात गुरु गोरखनाथ जी के मुख से निकले हुए है पर मेरा ऐसे लोगो से एक ही प्रशन है क्या जो मन्त्र कानिफनाथ जी ने रचे है वो भी गोरख वाचा है ? क्या जालंधरनाथ जी के रचे मन्त्र भी गोरख वाचा है ? इन मंत्रो की बात अलग है पर क्या मुस्लिम साबर मन्त्र भी गोरख वाचा है ? ऐसा नहीं है मुस्लिम साबर मन्त्र मुस्लिम फकीरों द्वारा रचे गए है।

भगवान् शिव ने सभी मंत्रो को कीलित कर दिया पर साबर मन्त्र कीलित नहीं है साबर मन्त्र कलयुग में अमृत स्वरुप है साबर मंत्रो को सिद्ध करना बड़ा ही सरल है न लम्बे विधि विधान की आवश्यकता और न ही करन्यास और अंगन्यास जैसी जटिल क्रियाए इतने सरल होने पर भी कई बार साबर मंत्रो का पूर्ण प्रभाव नहीं मिलता क्योंकि साबर मन्त्र सुप्त हो जाते है ऐसे में इन मंत्रो को एक विशेष क्रिया द्वारा जगाया जाता है।

साबर मंत्रो के सुप्त होने के मुख्य कारण –
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१. यदि सभा में साबर मन्त्र बोल दिए जाये तो साबर मन्त्र अपना प्रभाव छोड़ देते है।

२.यदि किसी किताब से उठाकर मन्त्र जपना शुरू कर दे तो भी साबर मन्त्र अपना पूर्ण प्रभाव नहीं देते।

३.साबर मन्त्र अशुद्ध होते है इनके शब्दों का कोई अर्थ नहीं होता क्योंकि यह ग्रामीण भाषा में होते है यदि इन्हें शुद्ध कर दिया जाये तो यह अपना प्रभाव छोड़ देते है।

४.प्रदर्शन के लिए यदि इनका प्रयोग किया जाये तो यह अपना प्रभाव छोड़ देते है !

५.यदि केवल आजमाइश के लिए इन मंत्रो का जप किया जाये तो यह मन्त्र अपना पूर्ण प्रभाव नहीं देते
ऐसे और भी अनेक कारण है उचित यही रहता है कि साबर मंत्रो को गुरुमुख से प्राप्त करे क्योंकि गुरु साक्षात शिव होते है और साबर मंत्रो के जन्मदाता स्वयं शिव है शिव के मुख से निकले मन्त्र असफल हो ही नहीं सकते
साबर मंत्रो के सुप्त होने का कारण कुछ भी हो इस विधि के बाद साबर मन्त्र पूर्ण रूप से प्रभावी होते है।

|| मन्त्र ||

सत नमो आदेश! गुरूजी को आदेश ॐ गुरूजी ,ड़ार शाबर बर्भर जागे जागे अढैया और बराट
मेरा जगाया न जागेतो तेरा नरक कुंड में वास ,दुहाई शाबरी माई की,दुहाई शाबरनाथ की ,आदेश गुरु गोरख को,

|| विधि ||

इस मन्त्र को प्रतिदिन गोबर का कंडा सुलगाकर उसपर गुगल डाले और इस मन्त्र का १०८ बार जाप करे! जब तक मन्त्र जाप हो गुगल सुलगती रहनी चाहिये यह क्रिया आपको २१ दिन करनी है , अच्छा होगा आप यह मन्त्र अपने गुरु के मुख से ले या किसी योग्य साधक के मुख से ले ! गुरु कृपा ही सर्वोपरि है कोई भी साधना करने से पहले गुरु आज्ञा जरूर ले

|| प्रयोग विधि ||

जब भी कोई साधना करे तो इस मन्त्र को जप से पहले ११ बार पढ़े और जप समाप्त होने पर ११ बार दोबारा पढ़े मन्त्र का प्रभाव बढ़ जायेगा! यदि कोई मन्त्र बार बार सिद्ध करने पर भी सिद्ध न हो तो किसी भी मंगलवार या रविवार के दिन उस मन्त्र को भोजपत्र या कागज़ पर केसर में गंगाजल मिलाकर अनार की कलम से या बड के पेड़ की कलम से लिख ले फिर किसी लकड़ी के फट्टे पर नया लाल वस्त्र बिछाएं और उस वस्त्र पर उस भोजपत्र को स्थापित करे घी का दीपक जलाये , अग्नि पर गुगल सुलगाये और शाबरी देवी या माँ पार्वती का पूजन करे और इस मन्त्र को १०८ बार जपे फिर जिस मन्त्र को जगाना है उसे १०८ बार जपे और दोबारा फिर इसी मन्त्र का १०८ बार जप करे लाल कपडे दो मंगवाए और एक घड़ा भी पहले से मंगवा कर रखे जिस लाल कपडे पर भोजपत्र स्थापित किया गया है उस लाल कपडे को घड़े के अन्दर रखे और भोजपत्र को भी घड़े के अन्दर रखे दुसरे लाल कपडे से भोजपत्र का मुह बांध दे और दोबारा उस कलश का पूजन करे और शाबरी माता से मन्त्र जगाने के लिए प्रार्थना करे और उस कलश को बहते पानी में बहा दे घर से इस कलश को बहाने के लिए ले जाते समय और पानी में कलश को बहाते समय जिस मन्त्र को जगाना है उसका जाप करते रहे यह क्रिया एक बार करने से ही प्रभाव देती है पर फिर भी इस क्रिया को ३ बार करना चाहिये मतलब रविवार को फिर मंगलवार को फिर दोबारा रविवार को
Shabar siddhi mantra, 
भगवान् आदिनाथ और माँ शाबरी आप सबको मन्त्र सिद्धि प्रदान करे

2…शीघ्र फल-दायक सिद्ध शाबर मन्त्र

..शाबर मंत्रो को जगाने का पर्याय
अगर बहोत कोशिश करने पर मंत्र जागृत नहीं हो रहे हो तो इस साधना को करके कोई भी साबर मंत्र जग सकते हो आप ..इस साधना को कर इसे सार्थक करे ..( अगर फिर नहीं हुआ तो साबर कल्प्सिद्धि से तो होना ही होना है यह हमारा दावा है ( कल्प्सिद्धि एक विशेष क्रिया है )

मन्त्रः-

ॐ इक ओंकार, सत नाम करता पुरुष निर्मै निर्वैर अकाल मूर्ति अजूनि सैभं गुर प्रसादि जप आदि सच, जुगादि सच है भी सच, नानक होसी भी सच –मन की जै जहाँ लागे अख, तहाँ-तहाँ सत नाम की रख ।
चिन्तामणि कल्पतरु आए कामधेनु को संग ले आए, आए आप कुबेर भण्डारी साथ लक्ष्मी आज्ञाकारी, बारां ऋद्धां और नौ निधि वरुण देव ले आए ।
प्रसिद्ध सत-गुरु पूर्ण कियो स्वार्थ, आए बैठे बिच पञ्ज पदार्थ ।
ढाकन गगन, पृथ्वी का बासन, रहे अडोल न डोले आसन, राखे ब्रह्मा-विष्णु-महेश, काली-भैरों-हनु-गणेश ।
सूर्य-चन्द्र भए प्रवेश, तेंतीस करोड़ देव इन्द्रेश ।
सिद्ध चौरासी और नौ नाथ, बावन वीर यति छह साथ ।
राखा हुआ आप निरंकार, थुड़ो गई भाग समुन्द्रों पार ।
अटुट भण्डार, अखुट अपार । खात-खरचत, कछु होत नहीं पार ।
किसी प्रकार नहीं होवत ऊना । देव दवावत दून चहूना ।
गुर की झोली, मेरे हाथ । गुरु-बचनी पञ्ज तत, बेअन्त-बेअन्त-बेअन्त भण्डार ।
जिनकी पैज रखी करतार, नानक गुरु पूरे नमस्कार ।
अन्नपूर्णा भई दयाल, नानक कुदरत नदर निहाल ।
ऐ जप करने पुरुष का सच, नानक किया बखान,
जगत उद्धारण कारने धुरों होआ फरमान ।
अमृत-वेला सच नाम जप करिए ।
कर स्नान जो हित चित्त कर जप को पढ़े, सो दरगह पावे मान ।
जन्म-मरण-भौ काटिए, जो प्रभ संग लावे ध्यान ।
जो मनसा मन में करे, दास नानक दीजे दान ।।”..
Shabar siddhi mantra, 
मंत्र इस प्रकार है :- 
        ॐ सं सां सिं सीं सुं सूं सें सैं 
       सों सौं सं सः अमृतवर्चसे स्वाहा |
Mantra Prayog Vidhi :

Ek tambe ka saaf bartan le le aur isme jal bhar le | Ab bhagwan Dhanwantri ka samran karte hue diye gye mantra ka 108 baar padhkar jal ko abhimantrit kar le (jal ko abhimantrit karne ke liye aap har mantra jaap ke baad pani me foonk lagaye ) | Is vidhi ko lagatar 21 din prayog karne se asadhya se asadhya rog bhi theek ho jata hai | 

Yadi koi vyakti maanav kalyaan ke liye is mantra ko Sidhh karna chahta hai to iske liye use kisi bhi Suryagrahan ya chandergrahan ko paani me kamar tak khade hoker neeche diye mantra ka 108 baar jaap karna hota hai . 
Mantra is prakar hai : – 

ॐ नमो आदेश गुरु का | बालरखे बालनी |
कपाल खे जोगिनी | भूख रखे कुम्भ करण |
पीठ रले विभीषण | नख रखे नरसिंघ |
कलिजा रखे काली भवानी
कंवर रखे कंवर का देव |
पिण्ड रखे गुरु गोरखनाथ |
पीड़ा प्राणसत रखे गुरु के पास |
गुरु की शक्ति मेरी भक्ति
चलो मंत्र ईश्वरी वाचा |
Is mantra ko sidhh karne ke pashchat aavshaykata padne par saat baar padhkar isse bhasm ko abhimantrit kar lete hai | Is abhimantrit bhasm ko jaha bhi sareer me rog ho vaha lagane se rog shant ho jata hai aur sheeghre hi Rogi apne rog se mukti paa leta hai | Is mantra ka prayog aap kisi doosre ke liye manav kalyaan bhav se hi karen aur kisi bhi parkar ki sulk v dakshina sweekar n kren aanyatha iska prabhav kam hone lag jata hai.
Shabar siddhi mantra, 
अति प्राचीन गुप्त शाबर मंत्र
यह कंठस्थ होने पर ही सिद्ध है और शीघ्र फलदायक है ।

एक मुठ्ठी आटे को भस्म को कंकर को काली मिर्चा को काली उडद को बंधन ग्रस्त रोगी मकान दुकान आदि पर से उतार कर सुबह शाम हवा मेँ उडादेँ बुरी नजर किया कराया कीला किलाया टूट जावेगा तीन दिन लगातार करेँ ।

मन्त्र..

काला कलवा चौँसठ वीर वेगी आओ माई के वीर अजर तोडो बजर तोडो किले का बंधन तोडो नजर तोडो मूठ तोडो जंहा से आई वंही को मोडो जल खोलो जलवाई खोलो बंद पडे तूपक को खोलो घर दुकान का बंधन खोलो बंधे खेत खलिहान खोलो बंधा हुआ मकान खोलो बंधी नाव पतवार खोलो दस दिशा का बंधन खोलो इतना काम मेरा ना करे तो तुझको माता का दूध पिया हराम है माता पार्वती की दुहारे फिरै शब्द सांचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।आदेश गुरू गोरखनाथ•
Shabar siddhi mantra, 
ऐसा कई बार होता है की आपके चाहने पर और मेहनत करने पर भी आपके करीबी लोग आपसे दूर होते चले जाते हैं, इसका सबसे बड़ा कारण है की आप लोगों के सामने अपने आपको उतना आकर्षक या फिर तार्किक नहीं प्रस्तुत कर पा रहे। सबसे अच्छा तरीक़ा इस कार्य को सिद्ध करने का है की आप वशीकरण मन्त्रों का सहारा लें और उनमें सबसे उत्तम मंत्र है शाबर वशीकरण मंत्र जिसके प्रयोग से आप बहुत ही अच्छा प्रयोग करके अपना मन चाहा फल प्राप्त कर सकते हैं। इस मंत्र को रोज़ १०८ बार जपें तो वृद्धि होगी परिस्थिति में।

“ ओम मोहिनी-माता भत पिता भूत सीर-बेताल उड़ ऐ काली नागिन -जिसको वशीभूत करना हो उसका नाम बोलेेँ यहाँ पर- की लग जाये ! ऐसी जाके लगे की – जिसको वशीभूत करना है उसका नाम फिरसे बोलेेँ- को लग जाये हमारी महब्बत की आग न खड़े सुख, न लेटे सुख, न सोते सुख, सिन्दूर चढओं मंगलवार कभी न छोड़े हमारा ख्याल, जब तक न देखे हमारा मुह , काया तड़प-तड़प मर जाये, चलो मंत्र-फुरो वाचा, दिखाओ-रे शब्द अपने गुरु के इलम का तमाशा “

ज़्यादातर वशीकरण मंत्र या तो बहुत ही कारगर होते हैं क्यूंकि वे काफी मुश्किल से सिद्ध हो पाते हैं या फिर इसलिए क्यूंकि वे बहुत ही दुर्लभ होते हैं, पर कुछ मंत्र आसान भी होते हैं, सहज भी होते हैं और सिद्ध करने के लिए ज़्यादा मेहनत भी नहीं मांगते। आपको आज हम कुछ ऐसे मंत्र बताएँगे जिनसे आप किसी उस स्त्री पर वशीकरण कर पाएंगे जिन्हें आप बहुत करीब लाना चाहते हैं और चाहते हैं की वे आपसे बेहद प्यार करें और आपसे मिल-जुल के रहे, समीप रहना पसंद करें।
Shabar siddhi mantra, 
हनुमानजी , भगवान शिव का अवतार हैं. भगवान हनुमान के रूप में तेजी है जैसी तेजी हमारे मन में होती है क्यूंकि उनकी गति वायु देव की तरह हैं. भगवान हनुमान का अपनी इन्द्रियों पर पूरा नियंत्रण है जैसे वायु देव का. भगवान हनुमान बंदरों की सेना के महानायक हैं. वे भगवान राम के दूत के रूप में विख्यात हैं. वे अतुलनीय शक्ति का भंडार है. वे राक्षसों की ताकतों का नाश करते है और सभी खतरों से मुक्त करवाते हैं. शाबर हनुमान मंत्र दुश्मनों के द्वारा फैलाई गयी नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की क्षमता रखता है. 
मंत्रों की महत्ता के बारे में तो आप जानते ही हैं. हर बिगड़े काम को बनाने के लिए मंत्र मौजूद हैं. बस आपको उनका सही उच्चारण करना आना चाहिए. आज हम आपको ‘हनुमान शाबर मंत्र’ के बारे में बता रहे हैं. हनुमान शाबर मंत्र क्या हैं? उसकी महत्ता क्या है और उनका उच्चारण कैसे किया जाता है? 
शाबर मंत्र अत्यधिक शक्तिशाली होते है और बहुत जल्द ही परिणाम लाते हैं. ऐसा माना जाता है की शाबर मंत्र गुरु गोरखनाथ जी और नवनाथ चौरासी सिद्धों ने लिखे थे. यह मंत्र आमतौर पर ग्रामीण भारतीय भाषाओं में हैं. हालांकि ये मंत्र हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि इस्लाम में और अन्य धर्मों में भी हैं. लेकिन ये बात भी सच है कि इन मंत्रों को सबसे पहले गुरु गोरखनाथ जी ने लिखा था.
हनुमान शाबर मंत्र एक तरह का वशीकरण मंत्र होता है. शाबर मंत्रों से किसी भी व्यक्ति को उन्हें उपयोग में लेने से पहले सिद्धि हासिल करने के जरुरत नहीं होती है क्योंकि वे पहले से ही सिद्ध मंत्र हैं. सभी शाबर वशीकरण मंत्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए या किसी उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए सीधे किसी पर नियंत्रण रखने के उपयोग में लाये जाते हैं. शाबर वशीकरण मंत्र विशेषज्ञ अपनी इच्छा के अनुसार आप के लिए शाबर मंत्र प्रदान कर सकता है. इतना ही नहीं, शाबर वशीकरण मंत्र विशेषज्ञ शाबर मंत्रों का उपयोग करने और उनका सही तरह से उच्चारण करने का दिशा-निर्देश भी देते हैं. हनुमान मंत्र और शाबर मंत्र, दोनों का ही प्रयोग वशीकरण के लिए किया जाता हैं. हनुमान मंत्र और शाबर मंत्र दोनों ही बहुत शक्तिशाली है. दोनों मंत्रों में केवल एक ही अंतर है, कि हनुमान मंत्र साधने के लिए सिद्धि‍ करना जरुरी है पर शाबर वशीकरण मंत्र के लिए सिद्धि‍ करना जरुरी नहीं हैं. हनुमान मंत्र और शाबर वशीकरण मंत्र में एक समानता भी है कि दोनों ही वशीकरण मंत्र विशेषज्ञ द्वारा दिशा-निर्देश दिए जाने के बाद ही सही तरह से उपयोग में लाए जा सकते हैं. वशीकरण मंत्र विशेषज्ञ मंत्र बताने के साथ-साथ हमें उससे सही तरीके से इस्तेमाल करने के निर्देश भी देते हैं.—- हनुमान मंत्र और शाबर वशीकरण मंत्र किसी और के ऊपर नियंत्रण रखने के लिए तभी सिद्ध किये जा सकते हैं जब इनका सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए.
Shabar siddhi mantra, 
हनुमान शाबर मंत्र का जाप करने के लिए काला कपड़ा पहनकर शुक्रवार से शुरुआत होती है. इस मंत्र की माला और उस माला का 5 बार जाप करें लगातार 5 दिन तक. साधना के अंत में भगवान हनुमान की पूजा और माला के लिए एक गढ्ढा खोदें और जमीन में ये माला डाल दें.
हनुमान जाग.—- किलकारी मार.—- तू हुंकारे.—- राम काज सँवारे.—- ओढ़ सिंदूर सीता मैया का.—- तू प्रहरी राम द्वारे.—- मैं बुलाऊँ , तु अब आ.—- राम गीत तु गाता आ.—- नहीं आये तो हनुमाना.—- श्री राम जी ओर सीता मैया कि दुहाई.—- शब्द साँचा.—- पिंड कांचा.—- फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा.—-

हनुमान जी से अपने मन की बात कहने का सिद्ध मंत्र ।

मनुष्य शारीरिक, मानसिक और बाहरी (भू‍त-प्रेत) नजर इत्यादि बीमारियों से परेशान रहता है। शारीरिक बीमारी के लिए डॉक्टर या वैद्य के पास जाकर मनुष्य ठ‍ीक हो जाता है। मानसिक बीमारी का सरलत‍म उपाय हो जाता है। परंतु मनुष्य जब भूत-प्रेत अथवा नजर, हाय या किसी दुष्ट आत्मा के जाल में फंस जाता है, तब वह परेशान हो जाता है। हनुमान जी का शाबर मंत्र अत्यंत ही सिद्ध मंत्र है। इसके प्रयोग से हनुमान जी तुरंत ही आपके मन की बात सुन लेते हैं। इसका प्रयोग तभी करें जबकि यह सुनिश्चित हो कि आप पवित्र व्यक्ति हैं। यह मंत्र आपके जीवन के सभी संकटों और कष्टों को तुरंत ही चमत्कारिक रूप से समाप्त करने की क्षमता रखता है।

शाबर मंत्र :-
ॐ नमो बजर का कोठा,
जिस पर पिंड हमारा पेठा।
ईश्वर कुंजी ब्रह्म का ताला,
हमारे आठो आमो का जती
हनुमंत रखवाला।

।। जय हनुमान ।।
Shabar siddhi mantra, 
वशीकरण प्रयोग अत्याधिक महत्वपूर्ण है, इसे तंत्र के द्वारा और मंत्र के द्वारा भी सम्पन्न किया जाता है, यो तो तंत्र मंत्र के
ग्रन्थो मे वशीकरण से सम्बन्धित सैकडो प्रयोग है, लेकिन नाथ सांप्रदाय के पास जो वशीकरण प्रयोग है वे बन्दूक की गोली से भी तीव्र प्रभाव करने वाले और अचुक होते है , प्रयोग करते ही उसका परिणाम प्रप्त हो जाता है.
शुक्रवार की रात 9 बजे हनुमान मंदिर जाकर हनुमान जी के चरणो मे सुखा हुआ सिंदूर चढाये और एक नारियल रख कर अपने दिल की भावनाये हनुमान जी को बताये.दूसरे दिन शनिवार रात ठिक उसी हनुमान मंदिर जाकर जहा आपने सिंदूर चढाया था वही का कोई भी सिंदूर उठाकर अपने घर ले आये.इस क्रिया मे किसी भी व्यक्ति का रोक-टोक नही होना चाहिये अब घर आने के बाद लाल कपडे पर हनुमान जी का चित्र स्थापित करे और हनुमान चालिसा का एक पाठ करे ताकी हनुमत कृपा प्राप्त हो
हनुमान मोहिनी मंत्र:-
ll ओम नमो महावीर,हनुमन्त वीर l धाय-धाय चलो,अपनी मोहिनी चलाओ,अमुक के नैन बाँध,मन बाँध,काया बाँध,घर बाँध,द्वार बाँध मेरे लिये,ना बाँधे तो मेरी आण-मेरे गुरू की आण,छु वाचापुरी ll

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