चौंसठ योगिनियाँ - एक रहस्यकौन हैं चौंसठ योगिनियाँ?
चौंसठ योगिनियाँ - एक रहस्य
कौन हैं चौंसठ योगिनियाँ?
योगिनी परिचय
भारतीय तंत्र और अध्यात्म की रहस्यमयी दुनिया में योगिनियों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और शक्तिशाली है। आम धारणा के विपरीत, योगिनियाँ केवल योग का अभ्यास करने वाली सामान्य स्त्रियाँ नहीं हैं, बल्कि वे अलौकिक शक्तियों से संपन्न दिव्य स्त्री-शक्तियाँ हैं।
कौन हैं योगिनियाँ?
योगिनियों को आदिशक्ति, देवी पार्वती या दुर्गा की सहचरी या उनके ही विभिन्न ऊर्जा-रूप माना जाता है। वे प्रकृति की गुप्त शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं और सिद्धियों की स्वामिनी होती हैं। उनका स्वभाव दोहरा होता है - एक ओर वे अपने साधक पर प्रसन्न होकर उसे अष्ट-सिद्धियाँ और समस्त भौतिक-आध्यात्मिक सुख प्रदान करती हैं, तो दूसरी ओर, साधना में त्रुटि होने पर वे अत्यंत उग्र और विनाशकारी भी हो सकती हैं।
चौंसठ योगिनियाँ
तंत्र ग्रंथों में मुख्य रूप से चौंसठ योगिनियों (Chausath Yogini) के समूह का वर्णन मिलता है। यह समूह अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है और इनकी सामूहिक साधना बहुत दुर्लभ होती है। प्रत्येक योगिनी का अपना एक विशिष्ट नाम, स्वरूप, वाहन, गुण और शक्तियाँ होती हैं। भारत में आज भी उड़ीसा और मध्य प्रदेश जैसी जगहों पर चौंसठ योगिनियों के प्राचीन मंदिर मौजूद हैं।
परिचय का उद्देश्य
योगिनी साधना में प्रवेश करने से पहले "योगिनी परिचय" को समझना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य साधक को यह ज्ञान देना है कि वह किन दिव्य शक्तियों का आह्वान करने जा रहा है। यह परिचय साधक को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से इस कठिन साधना के लिए तैयार करता है और उसे यह चेतावनी भी देता है कि इस मार्ग पर केवल पूर्ण श्रद्धा, अटूट विश्वास, पवित्रता और गुरु-निर्देशन के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए।
तंत्र और भारतीय अध्यात्म की सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली देवियों में "चौंसठ योगिनियों" का स्थान सर्वोपरि है। ये आदिशक्ति माँ पार्वती की सबसे प्रमुख सहायक और उनकी ही ऊर्जा की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं। इन्हें सिद्धियों की स्वामिनी माना जाता है और इनकी साधना अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली होती है।
चौंसठ योगिनियों की शक्तियां और लाभ
यहाँ सभी 64 योगिनियों, उनकी मुख्य शक्तियों और साधना से होने वाले लाभों की एक विस्तृत तालिका दी गई है:
# योगिनी का नाम मुख्य शक्ति साधना के लाभ
1 बहुरूपा रूप बदलने की शक्ति आकर्षण, सम्मोहन, अभिनय में सफलता।
2 तारा मार्गदर्शन, संकट से उबारना ज्ञान, बड़ी से बड़ी आपदाओं से मुक्ति।
3 नर्मदा पवित्रता और शांति मन की शांति, पापों का नाश।
4 यमुना भक्ति और प्रेम वैवाहिक सुख, निःस्वार्थ प्रेम की प्राप्ति।
5 शांति द्वंद्व का अंत मानसिक शांति, कलह और विवादों का अंत।
6 वारुणी भावनाओं पर नियंत्रण उत्तम स्वास्थ्य, भावनाओं पर पूर्ण नियंत्रण।
7 क्षेमंकरी कल्याण और सुरक्षा हर प्रकार के अनिष्ट से रक्षा, यात्रा में सुरक्षा।
8 ऐन्द्री नेतृत्व और शासन उच्च पद, शक्ति, अधिकार और विजय की प्राप्ति।
9 वाराही स्तंभन (रोकना) शत्रुओं की बुद्धि-गति रोकना, मुकदमों में विजय।
10 रणवीरा युद्ध में विजय शत्रुओं पर विजय, साहस और निर्भयता।
11 वानर-मुखी चातुर्य और बाधा-नाश चतुरता से बाधाओं पर विजय।
12 वैष्णवी पालन और स्थिरता जीवन में सुख-समृद्धि और स्थिरता।
13 कालरात्रि नकारात्मकता का नाश अकाल मृत्यु से रक्षा, तंत्र-बाधा नाश।
14 वैद्यरूपा आरोग्य प्रदान करना असाध्य रोगों का इलाज, उत्तम स्वास्थ्य।
15 चर्चिका प्रचंड प्रहार शत्रुओं और बुरी शक्तियों का विनाश।
16 बेतली (वेताली) प्रेत-आत्माओं पर नियंत्रण भूत-प्रेत वश में करना, पारलौकिक ज्ञान।
17 छिन्नमस्तिका कुंडलिनी जागरण आध्यात्मिक मुक्ति, प्रचंड सिद्धियाँ।
18 वृषवाहन इंद्रियों पर नियंत्रण वासना और बुरी आदतों पर विजय।
19 ज्वाला कामिनी इच्छाओं की पूर्ति तीव्र आकर्षण, सभी भौतिक इच्छाओं की पूर्ति।
20 घटवार सफलता को धारण करना सफलता और समृद्धि को बनाए रखना।
21 कराकाली अहंकार का नाश अहंकार, मोह और माया का विनाश।
22 सरस्वती ज्ञान और कला संगीत, कला और विद्या में निपुणता।
23 बिरूपा अनोखा स्वरूप समाज के बंधनों से मुक्ति।
24 कौवेरी धन का प्रवाह धन-धान्य की निरंतर प्राप्ति।
25 भालुका असीम शारीरिक शक्ति अतुलनीय शारीरिक बल और सहनशक्ति।
26 नारसिंही प्रचंड रक्षा हर प्रकार के ज्ञात-अज्ञात संकटों से रक्षा।
27 बिरजा परम पवित्रता तन और मन की शुद्धि, आध्यात्मिक तेज।
28 विकतांना शत्रु को भयभीत करना शत्रुओं के मन में भय पैदा करना।
29 महालक्ष्मी अष्ट-सिद्धि और धन असीम धन, वैभव और आठों सिद्धियाँ।
30 कौमारी यौवन और ऊर्जा चिर यौवन, ऊर्जा और कुमारी जैसी पवित्रता।
31 महामाया भ्रम पैदा करने की शक्ति सांसारिक भ्रम को समझना, माया पर नियंत्रण।
32 रति कामकला और प्रेम उत्कृष्ट दांपत्य सुख और प्रेम में सफलता।
33 करकरी कठोरता और स्थिरता जीवन में स्थिरता और दृढ़ता।
34 सर्पश्या सर्प-शक्ति कुंडलिनी ज्ञान, सर्प-भय से मुक्ति।
35 यक्षिणी गुप्त धन देना अचानक धन-लाभ, गड़े हुए खजाने का ज्ञान।
36 विनायकी बाधाओं का नाश सभी कार्यों में सफलता, विघ्न-बाधा का अंत।
37 विंध्यवासिनी प्रकृति पर नियंत्रण प्रकृति को अनुकूल बनाने की शक्ति।
38 वीर कुमारी साहस और शौर्य असीम साहस, युद्ध-कौशल।
39 माहेश्वरी शिव की शक्ति आंतरिक शांति और सर्व-नियंत्रण।
40 अंबिका मातृत्व और पोषण माँ के समान रक्षा और पोषण।
41 कामिनी मनोकामना पूर्ति सभी भौतिक कामनाओं की पूर्ति।
42 घटाभरी भंडार भरना घर में अन्न-धन के भंडार भरना।
43 स्तुति प्रशंसा से कार्यसिद्धि देवताओं और अधिकारियों की कृपा प्राप्ति।
44 काली समय पर नियंत्रण अहंकार का नाश, मोक्ष की प्राप्ति।
45 उमा तपस्या और ज्ञान कठिन तपस्या में सफलता, ज्ञान प्राप्ति।
46 नारायणी पालन-पोषण की शक्ति जीवन में धर्म और समृद्धि बनाए रखना।
47 समुद्रा गहराई और ज्ञान गंभीर ज्ञान, चरित्र में गहराई।
48 ब्राह्मणी रचना की शक्ति रचनात्मकता, उच्च ज्ञान और वाणी सिद्धि।
49 ज्वाला मुखी अग्नि के समान वाणी वाणी से शत्रुओं का नाश, वाद-विवाद में विजय।
50 आग्नेयी अग्नि तत्व पर नियंत्रण ऊर्जा, तेज और हर वस्तु को शुद्ध करना।
51 अदिति विस्तार और चेतना ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ाव।
52 चन्द्रकान्ति चंद्रमा के समान शीतलता सौंदर्य, मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन।
53 वायुवेगा वायु के समान गति कहीं भी आने-जाने की शक्ति, विचारों में गति।
54 चामुण्डा राक्षसों का संहार महामारी, बुरी आत्माओं से रक्षा।
55 मूरति विचारों को साकार करना किसी भी विचार को भौतिक रूप देना।
56 गंगा पापों का नाश सभी पापों और कर्म-बंधनों से मुक्ति।
57 धूमावती अभाव और दरिद्रता का नाश दुश्मनों का विनाश, गरीबी से मुक्ति।
58 गांधारी इंद्रियों पर नियंत्रण सभी इंद्रियों को वश में करने की शक्ति।
59 सर्व मंगला संपूर्ण कल्याण जीवन के हर क्षेत्र में सौभाग्य और सफलता।
60 अजिता सदैव अपराजित हर कार्य में निश्चित विजय।
61 सूर्यपुत्री सूर्य के समान तेज ऊर्जा, तेज, और रोगों का नाश।
62 वायु वीणा वायु और ध्वनि पर नियंत्रण संगीत में सिद्धि, हवा पर नियंत्रण।
63 अघोरा अघोर ज्ञान गुप्त और रहस्यमयी विद्याओं का ज्ञान।
64 भद्रकाली कल्याणकारी विनाश नकारात्मकता का विनाश कर शुभ फल देना।
योगिनी साधना के नियम और सावधानियां
योगिनी साधना एक अत्यंत उग्र और संवेदनशील साधना है। यह अप्सरा या यक्षिणी साधना से भी अधिक कठिन मानी जाती है। इसमें सफलता साधक को अष्ट-सिद्धियों का स्वामी बना सकती है, तो वहीं एक छोटी सी भूल भी जीवन के लिए संकट उत्पन्न कर सकती है। इसलिए, इस साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए कुछ कठोर नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
मानसिक और भावनात्मक नियम
अटूट विश्वास और निर्भयता: यह सबसे महत्वपूर्ण नियम है। योगिनियां साधक के धैर्य और साहस की कठोर परीक्षा लेती हैं। साधना के दौरान भयानक आकृतियां दिखना, डरावनी आवाजें आना या मृत्यु का भय उत्पन्न होना आम बात है। साधक को इन सब से विचलित हुए बिना, अपने गुरु और इष्टदेव पर अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए।
भाव की स्थिरता: योगिनी को जिस भाव (माता, बहन, या प्रेमिका) से सिद्ध करने का संकल्प लिया है, अंत तक उसी भाव पर टिके रहें। मन में वासनात्मक विचार लाना साधना को तुरंत खंडित कर सकता है।
क्रोध और अहंकार का पूर्ण त्याग: योगिनियां अहंकार को तुरंत नष्ट कर देती हैं। साधना काल में किसी पर क्रोध न करें और मन में "मैं सिद्ध योगी बन रहा हूँ" जैसा अहंकार न आने दें।
शारीरिक और दैनिक नियम
कठोर ब्रह्मचर्य: इस साधना में मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है। स्वप्नदोष भी साधना में बाधा डाल सकता है, इसलिए सोने से पहले अपने इष्टदेव का ध्यान करें।
सात्विक आहार: साधना काल में केवल एक समय, बिना नमक और मसाले का सात्विक भोजन (जैसे- दूध, फल) ही ग्रहण करें।
भूमि शयन: साधक को पूरी साधना अवधि में कंबल या कुशा के आसन पर भूमि शयन करना चाहिए।
मौन: जितना संभव हो, मौन रहने का प्रयास करें। व्यर्थ की बातें साधना की ऊर्जा को नष्ट करती हैं।
साधना-प्रक्रिया के नियम
गोपनीयता: अपनी साधना के बारे में किसी भी व्यक्ति (गुरु के अलावा) को भूलकर भी कुछ न बताएं।
स्थान की स्थिरता: साधना का स्थान (जैसे- कोई एकांत कमरा, श्मशान, या जंगल) एक बार निश्चित करने के बाद बदला नहीं जाना चाहिए। वह स्थान पूरी तरह से शुद्ध और बाहरी लोगों की पहुँच से दूर हो।
अखंड दीपक: कुछ योगिनी साधनाओं में अखंड दीपक (जो पूरी साधना अवधि तक जलता रहे) का विधान होता है। इसका विशेष ध्यान रखें।
सुरक्षा घेरा: साधना शुरू करने से पहले एक सिद्ध सुरक्षा मंत्र से अपने चारों ओर एक मजबूत सुरक्षा घेरा बनाना अनिवार्य है, जिसे किसी भी स्थिति में तोड़कर बाहर नहीं निकलना चाहिए।
साधना न छोड़ना: एक बार साधना शुरू करने के बाद, चाहे कुछ भी हो जाए, उसे बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा करना अत्यंत खतरनाक हो सकता है।
अस्वीकरण: योगिनी साधना एक उच्च कोटि की तांत्रिक साधना है। इसे केवल एक सिद्ध और योग्य गुरु के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए। बिना गुरु के यह साधना करने का प्रयास कदापि न करें।
योगिनी साधना: महत्वपूर्ण नियम और सावधानियां
योगिनी साधना तंत्र की सबसे शक्तिशाली और खतरनाक साधनाओं में से एक है। इसमें साधक की छोटी-सी भूल भी उसके जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। यह साधना अप्सरा या यक्षिणी साधना की तुलना में कई गुना अधिक उग्र होती है। इसलिए, निम्नलिखित सावधानियों का पालन अनिवार्य है:
1. गुरु की अनिवार्यता
यह सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। योगिनी साधना कभी भी बिना सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन के प्रारंभ नहीं करनी चाहिए। गुरु ही साधक को साधना के दौरान आने वाले भयानक अनुभवों और खतरों से बचाता है।
2. अटूट निर्भयता
योगिनियां साधक के साहस की कठोर परीक्षा लेती हैं। साधना के दौरान अत्यंत डरावनी आकृतियों का दिखना, कानों में चीखें सुनाई देना, या ऐसा महसूस होना कि कोई आपको मारने आ रहा है, यह सब आम बात है। यदि साधक डर गया, तो उसकी मृत्यु तक हो सकती है।
3. कठोर ब्रह्मचर्य
इस साधना में मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। मन में किसी भी प्रकार का वासनात्मक विचार आने से साधना तुरंत खंडित हो जाती है और शक्ति साधक के विरुद्ध हो सकती है।
4. स्थान की स्थिरता और सुरक्षा
साधना का स्थान (जैसे श्मशान, जंगल या एकांत कमरा) एक बार निश्चित करने के बाद किसी भी कीमत पर बदला नहीं जाना चाहिए।
साधना शुरू करने से पहले एक सिद्ध और अभेद्य सुरक्षा घेरा (मंडल) बनाना अनिवार्य है, जिसे साधना पूरी होने तक किसी भी स्थिति में नहीं तोड़ना चाहिए।
5. गोपनीयता और मौन
अपनी साधना और उसके अनुभवों के बारे में भूलकर भी किसी को (गुरु के अलावा) कुछ न बताएं।
साधना काल में जितना संभव हो सके मौन रहें।
6. साधना बीच में न छोड़ें
एक बार साधना शुरू करने के बाद, चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां आएं, उसे संकल्प पूरा होने से पहले कभी नहीं छोड़ना चाहिए। साधना बीच में छोड़ना मृत्यु को निमंत्रण देने के समान है।
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल ज्ञानवर्धक उद्देश्य के लिए है। योगिनी साधना अत्यंत खतरनाक हो सकती है। इसे करने का प्रयास केवल सिद्ध गुरु की प्रत्यक्ष देख-रेख में ही करें।
अनुकूल योगिनी साधना: पूर्ण विधि
परिचय: योगिनी साधना का महत्व
अप्सरा और यक्षिणी साधनाओं के अलावा, "योगिनी साधना" का स्तर अत्यंत विशेष और उच्च माना जाता है। योगिनियाँ कोई साधारण शक्ति नहीं, बल्कि इनका सीधा संबंध "काली कुल" से है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, घोर नामक दैत्य का संहार करने के लिए स्वयं माँ काली ने 64 योगिनियों का रूप धारण किया था, जिनमें से आठ योगिनियों की साधना प्रमुखता से की जाती है।
योगिनियों की शक्ति और साधना के लाभ
योगिनियाँ अलौकिक शक्तियों से संपन्न होती हैं। वे वशीकरण, सम्मोहन, स्तंभन, सौंदर्य, धन, और रति-सुख देने में पूरी तरह समर्थ हैं। वे तंत्र विद्या की भी ज्ञाता होती हैं, इसलिए किसी एक योगिनी को सिद्ध करने के बाद साधक को किसी और सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ती।
शत्रु नाश: यदि आपके शत्रु आपको परेशान करते हैं, तो योगिनी उन्हें नष्ट कर देती है।
भौतिक सुख: यह हर प्रकार की धन-संबंधी और सांसारिक आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।
पारिवारिक सुख: यदि पति या पत्नी एक-दूसरे के विरुद्ध हैं, तो योगिनी उन पर सम्मोहन शक्ति का प्रयोग करके संबंधों में मधुरता लाती है।
मनोकामना पूर्ति: सिद्ध होने पर योगिनी साधक की हर उचित इच्छा को पूरा करती है।
कायाकल्प: इनकी साधना से साधक को यौवन, सौंदर्य और एक आकर्षक व्यक्तित्व प्राप्त होता है।
सुरक्षा: यह साधना करने से कोई नुकसान नहीं होता। कोई भी स्त्री, पुरुष, या गृहस्थ इस साधना को कर सकता है। इससे गृहस्थ जीवन में कोई बाधा नहीं आती और अविवाहित साधकों को विवाह में भी सहायता मिलती है।
साधना में भाव का महत्व
अप्सरा साधना की तरह ही, योगिनी साधना भी मित्र या प्रेमिका-भाव से ही की जानी चाहिए। प्रेमिका का अर्थ है, जो अपने प्रिय पर अपना सब कुछ न्योछावर करके प्रसन्नता का अनुभव करे, न कि उससे जबरदस्ती कुछ माँगा जाए। वह स्वयं देकर प्रसन्न होती है। इसी भाव से साधना करने पर विशेष लाभ प्राप्त होते हैं।
अनुकूल योगिनी साधना क्या है?
मुख्य रूप से आठ योगिनियों (सुर-सुंदरी, मनोहरा, कनकावती, कामेश्वरी, रति सुंदरी, पद्मिनी, नटी, और मधुमती) की साधना की जाती है। यह जो साधना विधि दी जा रही है, वह किसी विशेष योगिनी की नहीं, बल्कि एक सामान्य "योगिनी साधना" है। इस साधना से आपके लिए जो भी योगिनी सबसे अधिक अनुकूल होगी, वही स्वयं सिद्ध होगी।
आवश्यक सामग्री
इस साधना के लिए तीन प्राण-प्रतिष्ठित सामग्रियों की आवश्यकता होगी:
योगिनी यंत्र
योगिनी माला (मंत्र जाप के लिए)
रक्षामाला (साधना के दौरान गले में धारण करने के लिए)
(नोट: साधना की सफलता के लिए सामग्री का मंत्र सिद्ध और प्राण-प्रतिष्ठित होना अनिवार्य है।)
3. सुरक्षा घेरा
रक्षा विधान का अर्थ है जहाँ हम पूजा कर रहे है वहाँ यदि कोई आसुरी शक्तियाँ, मानसिक विकार आदि हो तो चले जाएं, जिससे पूजा में कोई बाधा उपस्थित न हो। बाएं हाथ में पीली सरसों अथवा चावल लेकर दाहिने हाथ से ढंक दें तथा निम्न मंत्र उच्चारण के पश्चात सभी दिशाओं में उछाल दें।
"ॐ असर्पन्तु ये भूता ये भूता:भूमि संस्थिता: ये भूता: बिघ्नकर्तारस्ते नश्यन्तु शिवाज्ञया॥ अपक्रामन्तु भूतानि पिशाचा: सर्वतो दिशम। सर्वेषामविरोधेन पूजा कर्म समारभ्भे॥"
साधना विधि
समय: यह साधना योगिनी एकादशी या किसी भी शुक्रवार से रात्रि में 9 बजे के बाद शुरू करें।
नियम: साधना काल में सफेद वस्त्र पहनें, सफेद (या लाल) आसन का प्रयोग करें, और उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। साधना को पूरी तरह गोपनीय रखें।
गुरु पूजन: अपने सामने चौकी पर गुरु (या भगवान शिव) का चित्र स्थापित करें। घी का दीपक और धूप जलाएं। गुरु का पूजन करके गुरु मंत्र (या "ॐ नमः शिवाय") की एक माला का जाप करें और साधना की आज्ञा लें।
भैरव पूजन: भगवान बटुक भैरव का ध्यान करके साधना की रक्षा के लिए प्रार्थना करें और इस मंत्र की एक माला जाप करें:
"ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटकाय ह्रीं ॐ"
यंत्र पूजन और संकल्प: अब योगिनी यंत्र का पूजन करें। गले में रक्षामाला धारण करें और प्रेमिका-भाव से साधना की सफलता का संकल्प लें।
मुख्य मंत्र जाप: योगिनी माला से निम्नलिखित मंत्र की प्रतिदिन 11 माला का जाप करें। यह साधना लगातार 21 दिनों तक करनी है।
मूल मंत्र: "ॐ ह्रीं योगिनी आगच्छ आगच्छ स्वाहा"
साधना काल के अनुभव
साधना के दौरान कमरे में किसी के आने का अहसास, घुंघरू की आवाज आना या कोई सुंदर दृश्य दिखाई देना स्वाभाविक है। सपने में कोई अत्यंत सुंदर, गौर वर्ण की स्त्री दिखाई दे सकती है। इन अनुभवों से घबराएं नहीं और इन्हें किसी को न बताएं।
प्रत्यक्षीकरण और साधना का समापन
21वें दिन, पूजन के समय अपने पास फूलों की दो मालाएं रखें।
यदि आपको साधना में अपने बगल में किसी के बैठने का प्रबल आभास हो, तो एक माला उस अदृश्य शक्ति को पहना दें। यदि वह शक्ति सिद्ध हो गई है, तो वह दूसरी माला उठाकर आपके गले में पहना देगी।
इसके बाद, जब भी आप एकांत में इस मंत्र का 11 बार उच्चारण करेंगे, वह आपके सामने प्रत्यक्ष होगी।
साधना पूरी होने के अगले दिन, सभी पूजन सामग्री को किसी नदी या बहते हुए जल में विसर्जित कर दें।
यदि साधना सफल न हो तो?
कई बार 21 दिन में सिर्फ अनुभव होते हैं, प्रत्यक्षीकरण नहीं होता। इसका अर्थ है कि आपको उनका सान्निध्य मिल चुका है और आपके कार्य अप्रत्यक्ष रूप से बनने लगेंगे। पूर्ण प्रत्यक्षीकरण के लिए साधना को दोबारा करें। साधना में सफलता के लिए धैर्य और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है।
मनोहरा योगिनी साधना
"मनोहरा" का अर्थ है "मन को हर लेने वाली"। यह आठ प्रमुख योगिनियों में से एक हैं और इन्हें अद्वितीय सौंदर्य, सम्मोहन, और दूसरों के मन की गुप्त बातें जान लेने की शक्ति के लिए जाना जाता है। इनकी साधना साधक को एक ऐसा चुंबकीय व्यक्तित्व प्रदान करती है कि समाज में हर व्यक्ति उसकी ओर स्वतः ही आकर्षित होने लगता है। यह स्वभाव से अत्यंत कोमल, दयालु और साधक के प्रति पूर्ण समर्पित होती हैं।
सावधानी: यह साधना अत्यंत प्रभावशाली है, इसलिए इसे पूर्ण विश्वास और गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। गुरु न होने पर भगवान शिव को अपना गुरु मानकर साधना शुरू करें।
1. आवश्यक सामग्री
मनोहरा योगिनी यंत्र (ताम्र या भोजपत्र पर निर्मित)।
स्फटिक की माला।
रक्षा माला (साधना के समय गले में धारण करें)।
सफेद रंग का आसन और पहनने के लिए सफेद वस्त्र।
शुद्ध केसर, सफेद चंदन और सफेद फूल।
गुलाब का इत्र और सुगंधित अगरबत्ती।
शुद्ध घी का दीपक।
(नोट: यन्त्र , माला , रक्षा माला मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित होनी चाहिए।)
2. साधना विधान
साधक किसी भी शुक्रवार, पूर्णिमा या अमावस्या की रात्रि में इस साधना को शुरू करें। यह रात्रिकालीन साधना है, इसे रात्रि 10 बजे के बाद ही संपन्न करना चाहिए। साधक उत्तर दिशा की ओर मुख करके सफेद आसन पर बैठें। बैठने से पूर्व स्नान कर स्वच्छ सफेद वस्त्र पहनें और अपने वस्त्रों पर गुलाब का इत्र लगाएं। अपने सामने लकड़ी की चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर गुरु चित्र और मनोहरा योगिनी यंत्र स्थापित करें।
3. सुरक्षा घेरा
रक्षा विधान का अर्थ है जहाँ हम पूजा कर रहे है वहाँ यदि कोई आसुरी शक्तियाँ, मानसिक विकार आदि हो तो चले जाएं, जिससे पूजा में कोई बाधा उपस्थित न हो। बाएं हाथ में पीली सरसों अथवा चावल लेकर दाहिने हाथ से ढंक दें तथा निम्न मंत्र उच्चारण के पश्चात सभी दिशाओं में उछाल दें।
"ॐ असर्पन्तु ये भूता ये भूता:भूमि संस्थिता: ये भूता: बिघ्नकर्तारस्ते नश्यन्तु शिवाज्ञया॥ अपक्रामन्तु भूतानि पिशाचा: सर्वतो दिशम। सर्वेषामविरोधेन पूजा कर्म समारभ्भे॥"
4. विनियोग, करन्यास और अंगन्यास
विनियोग:
दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें: अस्य श्री मनोहरा योगिनी मंत्रस्य, विश्वामित्र ऋषिः, गायत्री छन्दः, मनोहरा योगिनी देवता, ह्रीं बीजं, स्वाहा शक्तिः, मम आकर्षण-सम्मोहन-सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः। (जल जमीन पर छोड़ दें)
करन्यास:
ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः
ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः
ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः
ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः
ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः
ॐ ह्रः करतल करपृष्ठाभ्यां नमः
अंगन्यास:
ॐ ह्रां हृदयाय नमः
ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा
ॐ ह्रूं शिखायै वषट्
ॐ ह्रैं कवचाय हुं
ॐ ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट्
ॐ ह्रः अस्त्राय फट्
5. पूजन और मंत्र जाप
(क) पंचोपचार गुरु पूजन: अपने गुरुदेव का ध्यान करें और पंचोपचार पूजन करें। इसके बाद गुरु मंत्र की एक माला का जाप करें।
(ख) पंचोपचार गणेश पूजन: "ॐ गं गणपतये नमः" की एक माला जाप करें और विघ्न दूर करने की प्रार्थना करें।
(ग) बटुक भैरव पूजन: साधना की रक्षा के लिए भगवान बटुक भैरव का पूजन करें और "ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ" मंत्र की एक माला जाप करें।
(घ) यंत्र पूजन और मुख्य जाप: यंत्र पर सफेद चंदन और केसर का तिलक करें। सफेद पुष्प और इत्र अर्पित करें। अब स्फटिक की माला से प्रतिदिन 21 माला जाप करें। यह साधना 11 दिनों तक लगातार करनी है।
मूल मंत्र:
"ॐ ह्रीं मनोहरे आगच्छ आगच्छ स्वाहा"
6. लाभ और अनुभव
आकर्षण शक्ति: साधक की वाणी और आँखों में जबरदस्त सम्मोहन आ जाता है।
गुप्त ज्ञान: साधक को दूसरों के मन के विचार और आने वाली घटनाओं का आभास होने लगता है।
अनुभव: साधना के दौरान इत्र की तीव्र सुगंध, किसी के पास होने का अहसास या पायल की आवाज आ सकती है। डरे नहीं।
7. वचन और प्रत्यक्षीकरण
जब मनोहरा योगिनी प्रत्यक्ष प्रकट हों, तो उन्हें सफेद फूलों की माला अर्पित करें और उनसे अपनी इच्छानुसार मित्र या प्रेमिका के रूप में जीवनभर साथ रहने और मार्गदर्शन करने का वचन लें।
विशेष सावधानी:
साधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
अनुभवों को किसी के साथ साझा न करें।
सात्विक भोजन ग्रहण करें और जितना हो सके मौन रहें।
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