कनकावती योगिनी साधना
कनकावती योगिनी साधना "कनकावती" का अर्थ है "स्वर्ण से युक्त" या "स्वर्णमयी"। यह आठ प्रमुख योगिनियों में से एक हैं और इन्हें धन, स्वर्ण, रत्न और असीम भौतिक ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इनकी साधना दरिद्रता का समूल नाश कर साधक के जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खोल देती है। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य, स्वर्ण के समान चमकता हुआ और ममतामयी होता है। यह अपने साधक पर अति शीघ्र प्रसन्न होकर उसे धनवान और सुखी बना देती हैं। सावधानी: यह साधना अत्यंत प्रभावशाली और तीव्र है, इसलिए इसे पूर्ण पवित्रता और गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। गुरु न होने पर भगवान शिव को अपना गुरु मानकर साधना प्रारंभ करें। 1. आवश्यक सामग्री कनकावती योगिनी यंत्र (ताम्र या स्वर्ण पत्र पर निर्मित)। स्फटिक या हकीक माला (मंत्र जाप के लिए) रक्षा माला (साधना के समय गले में धारण करने के लिए)। पीले रंग का आसन और पहनने के लिए पीले वस्त्र। शुद्ध केसर, कुमकुम और पीले पुष्प (गेंदा या स्वर्ण चम्पा)। शुद्ध घी का दीपक और सुगंधित अगरबत्ती। कच्चा दूध, गंगाजल और शहद। (नोट: यन्त्र , माला , रक्षा माला मं...