सुर-सुंदरी योगिनी साधना
सुर-सुंदरी योगिनी साधना "सुर-सुंदरी" का अर्थ है "देवताओं में भी सबसे सुंदर"। यह आठ प्रमुख योगिनियों में से एक हैं और इन्हें अद्वितीय सौंदर्य, आकर्षण, कला और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इनकी साधना साधक को एक अलौकिक और चुंबकीय व्यक्तित्व प्रदान करती है, जिससे वह जगत को मोहित करने में सक्षम हो जाता है। यह स्वभाव से अत्यंत सौम्य, दयालु और साधक के प्रति पूर्ण समर्पित होती हैं। सावधानी: यह साधना अत्यंत प्रभावशाली है, इसलिए इसे पूर्ण विश्वास और गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। गुरु न होने पर भगवान शिव को अपना गुरु मानकर साधना शुरू करें। 1. आवश्यक सामग्री सुर-सुंदरी योगिनी यंत्र (ताम्र या स्वर्ण पत्र पर निर्मित)। स्फटिक की माला (या लाल चंदन की माला)। रक्षा माला (साधना के समय गले में धारण करें)। गुलाबी या सफेद रंग का आसन और पहनने के लिए गुलाबी/सफेद वस्त्र। शुद्ध केसर, सफेद चंदन और गुलाब के फूल। गुलाब का इत्र और सुगंधित अगरबत्ती। शुद्ध घी का दीपक। (नोट: यन्त्र , माला , रक्षा माला मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित होनी चाहिए।) 2. साधना विधान साधक किसी भी शुक्रवा...