विश्वावसु गंधर्व राज साधना | गन्धर्व साधना

गन्धर्व साधना: कला, सौंदर्य और सम्मोहन 

गन्धर्व देव योनि की एक अत्यंत तेजस्वी और कलात्मक शक्ति हैं। वे इन्द्र की सभा के मुख्य गायक हैं और सुंदरता, संगीत, नृत्य तथा प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं। 'गन्धर्व साधना' उन साधकों के लिए अत्यंत फलदायी है जो कला के क्षेत्र में शिखर प्राप्त करना चाहते हैं, या अपने व्यक्तित्व में एक दिव्य आकर्षण और सम्मोहन शक्ति जाग्रत करना चाहते हैं। यह साधना साधक को मानसिक तनाव से मुक्त कर जीवन में आनंद और उल्लास भर देती है।

1. गन्धर्व साधना के प्रमुख लाभ

  • कला और संगीत में सिद्धि: संगीत, गायन, अभिनय और लेखन के क्षेत्र में विलक्षण प्रतिभा प्राप्त होती है।
  • सम्मोहक व्यक्तित्व: साधक के चेहरे पर एक दिव्य आभा (Aura) आती है, जिससे लोग उसकी ओर स्वतः आकर्षित होते हैं।
  • सुखद प्रेम संबंध: दांपत्य जीवन और प्रेम संबंधों में मधुरता और प्रगाढ़ता आती है।
  • मानसिक शांति: मन प्रसन्न रहता है और डिप्रेशन या चिंता जैसी समस्याएँ समाप्त हो जाती हैं।

2. साधना का उचित समय और तैयारी

  • शुभ समय: किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार, पूर्णिमा या बसंत पंचमी से यह साधना शुरू करें।
  • वस्त्र और आसन: सफेद या हल्के गुलाबी रंग के रेशमी वस्त्र और रेशमी आसन का प्रयोग करें।
  • दिशा: उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।

3. आवश्यक सामग्री

  • गन्धर्व राज यंत्र (प्राण-प्रतिष्ठित)।
  • स्फटिक की माला या सफेद चंदन की माला।
  • गुलाब का इत्र और सुगंधित अगरबत्ती।
  • शुद्ध घी का दीपक।
  • सफेद या गुलाबी पुष्प (गुलाब या चमेली)।
  • मिश्री या सफेद मिठाई का नैवेद्य।

(नोट: यन्त्र , माला , रक्षा माला , गुटिका मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित होनी चाहिए।)

4. संक्षिप्त पूजन विधि

  1. एक चौकी पर गन्धर्व राज यंत्र स्थापित करें।
  2. यंत्र पर गुलाब का इत्र चढ़ाएं और सफेद चंदन का तिलक लगाएं।
  3. धूप और दीप जलाएं। गन्धर्वों का ध्यान करते हुए उन्हें मधुर फल या मिठाई अर्पित करें।
  4. गुरु पूजन और गणेश पूजन करने के बाद गन्धर्व राज से अपनी कला और व्यक्तित्व में उन्नति का आशीर्वाद मांगें।

5. गन्धर्व मुख्य मंत्र

स्फटिक की माला से निम्नलिखित मंत्र की प्रतिदिन 11 या 21 माला जाप करें। यह साधना 11 या 21 दिनों की होती है।

ॐ गन्धर्वराजाय नमः

अथवा विशेष सिद्धि मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं गन्धर्वराजाय विश्ववसो आगच्छ आगच्छ नमः।

6. विशेष नियम और सावधानियां

  • साधना के दौरान सुगंधित द्रव्यों (इत्र) का प्रयोग अवश्य करें।
  • अपने स्वभाव में विनम्रता और प्रेम भाव बनाए रखें।
  • साधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • सात्विक भोजन करें और किसी की निंदा न करें।

"ॐ विश्वावसो गन्धर्वराजाय नमः।"

गन्धर्व साधना के मुख्य मंत्र और जाप-विधि का संक्षिप्त, स्पष्ट विवरण नीचे दिया गया है।

## मुख्य मंत्र (प्रचलित रूप)

गन्धर्व साधना में दो रूप सबसे अधिक प्रचलित हैं—एक सरल नमस्कार-मंत्र और दूसरा बीज-युक्त विशेष सिद्धि-मंत्र।

- **मूल नमस्कार मंत्र:**  

  **ॐ गन्धर्वराजाय नमः**  

  (यह मंत्र सामान्य कला-सौंदर्य और व्यक्तित्व-उन्नति के लिए जपा जाता है।) 

- **विशेष सिद्धि मंत्र (बीज-युक्त):**  

  **ॐ ह्रीं श्रीं गन्धर्वराजाय विश्ववसो आगच्छ आगच्छ नमः**  

  (कुछ परंपराओं में “ॐ विश्वावसो गन्धर्वराजाय नमः” या विवाह/आकर्षण हेतु दीर्घ रूप भी मिलते हैं।)

> टिप्पणी: “विश्वावसु” गन्धर्वराज का प्रसिद्ध नाम है; इसलिए कई विधानों में मंत्र में “विश्वावसु/विश्वावसो” का स्पष्ट उल्लेख होता है।

## जाप की मात्रा और अवधि

परंपरागत विधान के अनुसार:  

- **प्रतिदिन:** 11 या 21 माला (1 माला = 108 जप)।   

- **कुल अवधि:** 11 या 21 दिन तक निरंतर जाप।   

- **माला:** स्फटिक (क्रिस्टल) की माला या सफेद चंदन की माला शुभ मानी जाती है; यह शीतलता, एकाग्रता और सौंदर्य-कला से जोड़ी जाती है।

## जाप-विधि (सरल चरण)

1. **समय व दिशा:** शुक्ल पक्ष के शुक्रवार/पूर्णिमा/बसंत पंचमी से आरंभ करें; उत्तर या पूर्व मुख होकर बैठें।   

2. **आसन-वस्त्र:** सफेद या हल्के गुलाबी रेशमी वस्त्र और रेशमी आसन।   

3. **दीप-धूप-सुगंध:** घी का दीपक जलाएं, सुगंधित अगरबत्ती/धूप करें और गुलाब इत्र का प्रयोग अवश्य करें।   

4. **यंत्र-स्थापना:** गन्धर्व राज यंत्र (प्राण-प्रतिष्ठित) स्थापित कर उस पर चंदन तिलक व इत्र अर्पित करें।   

5. **पूर्व-पूजन:** गणेश-पूजन और गुरु-पूजन के बाद गन्धर्वराज से कला व व्यक्तित्व-उन्नति का आशीर्वाद मांगें।

6. **जाप:** स्फटिक माला से चुने हुए मंत्र का 11 या 21 माला जप करें; माला सुमेरु पार कर वापस उसी दिशा से लौटाई जाती है (उल्टी नहीं करनी चाहिए)।

7. **नैवेद्य:** अंत में मिश्री या सफेद मिठाई अर्पित करें और प्रसन्न भाव से विसर्जन/कृतज्ञता प्रकट करें। 

## विशेष नियम (जाप काल में)

- साधना-काल में **सुगंधित द्रव्यों (इत्र)** का प्रयोग अनिवार्य बताया गया है।   

- **ब्रह्मचर्य**, सात्विक भोजन, विनम्रता और प्रेम-भाव बनाए रखें; किसी की निंदा न करें।   

- मंत्र को श्रद्धापूर्वक, स्पष्ट उच्चारण और एकाग्रचित्त होकर जपें; माला को पवित्र रखें और अन्य कार्य में प्रयोग न करें।

विश्वावसु गंधर्वराज मंत्र और विवाह प्राप्ति की विधि

विश्वावसु गन्धर्वराज मंत्र विवाह-बाधा निवारण और मनचाहे जीवनसाथी प्राप्ति के लिए प्रचलित एक प्रमुख उपाय माना जाता है। नीचे मुख्य मंत्र, सरल दैनिक विधि और कुछ महत्वपूर्ण नियम दिए गए हैं।

## मुख्य मंत्र (विवाह प्राप्ति हेतु)

परंपरा में दो-तीन रूप अधिक प्रचलित हैं; आप किसी एक स्थिर रूप का चयन कर नियमित जप करें।

- **संक्षिप्त प्रार्थना-मंत्र (बहुत प्रचलित):**  

  **ॐ विश्वावसु-गन्धर्व-राज-कन्या-सहस्त्रमावृत, ममाभिलाषितां अमुकीं कन्यां प्रयच्छ स्वाहा।**  

  (यहाँ “अमुकीं” के स्थान पर इच्छित कन्या का नाम/गोत्र लिया जा सकता है; यदि नाम निश्चित न हो तो केवल “ममाभिलाषितां कन्यां प्रयच्छ” कहकर जपते हैं।)

- **अन्य प्रचलित रूप (अर्थ-समान):**  

  **विश्वावसो गन्धर्व राज कन्याम् सालम् कृताम् मम अभिप्सिताम् प्रयच्छ प्रयच्छ नमः**  

  (यह रूप भी विवाह-प्राप्ति हेतु जपा जाता है।)

> नोट: कुछ स्रोतों में “ॐ क्लीं विश्वावसु गन्धर्व कन्यानामधिपति…” जैसे बीज-युक्त पाठ भी मिलते हैं; इन्हें गुरु-मार्गदर्शन में ही लेना उचित होता है।

## सरल दैनिक विधि (अविवाहित पुरुषों के लिए प्रचलित उपाय)

यह विधि समाचार/ज्योतिष स्रोतों में बार-बार बताई गई है और घर पर की जा सकती है

1. **समय:** प्रतिदिन प्रातः सूर्योदय से पहले स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें; शाम को भी एक माला जप कर सकते हैं।

2. **अर्घ्य:** 7 अंजुली जल “विश्वावसु गन्धर्व” को अर्पित करें।

3. **जाप:** ऊपर दिए मंत्र का **108 बार** (1 माला) जप करें; स्फटिक या तुलसी की माला प्रयोग की जा सकती है।

4. **संकल्प/भाव:** जप के बाद मन ही मन सुखी दांपत्य और योग्य जीवनसाथी प्राप्ति का संकल्प करें।

5. **अवधि:** न्यूनतम 40 दिन तक निरंतर करना फलदायी माना जाता है; कुछ विधान 11/21/40 दिन बताते हैं।

## पूजन-आधारित विस्तृत विधि (यदि यंत्र/दीप आदि से करना हो)

यदि आप यंत्र-दीप के साथ करना चाहें, तो सामान्य तंत्र-विधान इस प्रकार होता है:

- **स्थान-दिशा:** एकांत स्थान, पूर्व/उत्तर मुख; शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से आरंभ शुभ माना जाता है।

- **दीप-धूप:** घी का दीपक जलाएं; सुगंध/इत्र का प्रयोग करें (गन्धर्व साधना में सुगंध विशेष बताई गई है)।

- **यंत्र/चित्र:** गन्धर्वराज या विश्वावसु संबंधी यंत्र/चित्र स्थापित कर चंदन तिलक व पुष्प अर्पित करें।

- **पूर्व-पूजन:** गणेश-वंदन और गुरु-स्मरण के बाद मुख्य मंत्र का 108 या 1008 जप (श्रद्धा अनुसार) करें।

- **नैवेद्य:** मिश्री/सफेद मिठाई अर्पित कर विसर्जन करें।

## विशेष नियम व सावधानियां

- **निरंतरता:** एक ही मंत्र-रूप चुनकर रोज़ जपें; बीच में रूप न बदलें।

- **ब्रह्मचर्य व सात्विकता:** साधना-काल में ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन और मन में प्रेम-विनम्रता रखें।

- **नाम-उल्लेख:** यदि किसी विशिष्ट व्यक्ति से विवाह की कामना है तो “अमुकीं” स्थान पर नाम लें; अन्यथा सामान्य “ममाभिलाषितां कन्यां” कहें।

- **गुरु-मार्गदर्शन:** दीर्घ अनुष्ठान (हजारों जप/कवच-पाठ) या तांत्रिक पाठों के लिए योग्य गुरु से दीक्षा व विधान लेना उचित होता है।

विश्वावसु गंधर्व राज साधना 

विश्वावसु गन्धर्वराज साधना के प्रमुख नियम और सावधानियां नीचे दी गई हैं।

## 1) समय, शुद्धि और निरंतरता

- **प्रातः स्नान-शौच:** प्रतिदिन प्रातः स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें; तभी जप/अर्घ्य करें।

- **निरंतरता:** एक ही मंत्र-रूप चुनकर रोज़ जपें; बीच में रूप या विधान न बदलें।

- **अवधि:** न्यूनतम 40 दिन तक नियमित जप फलदायी माना जाता है; कुछ विधान 11/21/40 दिन बताते हैं।

## 2) मंत्र-चयन और जाप-मात्रा

- **एक स्थिर मंत्र:** “ॐ विश्वावसु-गन्धर्व-राज-कन्या-सहस्त्रमावृत, ममाभिलाषितां अमुकीं कन्यां प्रयच्छ स्वाहा” या समानार्थक एक रूप स्थिर कर लें।[3]

- **जाप संख्या:** प्रतिदिन **108 बार** (1 माला) जप प्रचलित है; अनुष्ठान में 1000 जप/दिन भी मिलता है।

- **माला:** स्फटिक या तुलसी की माला प्रयोग करें; माला सुमेरु पार कर वापस उसी ओर लौटाएं, उल्टी न करें।

## 3) अर्घ्य और सरल उपाय-विधि

- **7 अंजुली जल:** प्रतिदिन 7 अंजुली जल विश्वावसु गन्धर्व को अर्पित करें और साथ मंत्र जपें।

- **भाव/संकल्प:** जप के बाद सुखी दांपत्य और योग्य जीवनसाथी प्राप्ति का संकल्प करें।

## 4) आचरण-संबंधी अनिवार्य नियम

- **ब्रह्मचर्य:** साधना-काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।

- **सात्विक जीवन:** सात्विक भोजन, मन में प्रेम-विनम्रता रखें; क्रोध, निंदा और असत्य से बचें।

- **गोपनीयता:** साधना को प्रायः गोपनीय रखना और अनावश्यक चर्चा न करना उचित माना जाता है।

## 5) पूजन-सामग्री व वातावरण (यदि यंत्र/दीप के साथ करें)

- **सुगंध/इत्र:** गन्धर्व साधना में सुगंधित द्रव्यों (इत्र/धूप) का प्रयोग विशेष बताया गया है।

- **दीप-धूप:** घी का दीपक और सुगंधित अगरबत्ती जलाएं; स्वच्छ, शांत स्थान चुनें।[1]

- **यंत्र/चित्र:** गन्धर्वराज या विश्वावसु संबंधी यंत्र/चित्र स्थापित कर चंदन तिलक व पुष्प अर्पित करें।

## 6) विशेष सावधानियां

- **नाम-उल्लेख:** यदि किसी विशिष्ट व्यक्ति से विवाह की कामना है तो “अमुकीं” स्थान पर नाम लें; अन्यथा सामान्य “ममाभिलाषितां कन्यां” कहें।

- **दीर्घ अनुष्ठान/कवच-पाठ:** हजारों जप, कवच-स्तोत्र या तांत्रिक पाठों के लिए योग्य गुरु से दीक्षा व विधान लेना उचित होता है।

- **आस्था-परक उपाय:** यह उपाय आस्था-परक है; साथ ही कुंडली-विश्लेषण, पारिवारिक संवाद और व्यावहारिक प्रयास भी जारी रखें।

इन नियमों का पालन करने से साधना में एकाग्रता, शुद्धि और निरंतरता बनी रहती है, जिसे परंपरा में फलदायक माना गया है।

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