तीव्र वशीकरण शाबर मंत्र (खाने-पीने की वस्तु से)
नीचे प्रचलित शाबर-परंपरा के कुछ प्रसिद्ध मंत्र और उनकी सामान्य विधियाँ दी गई हैं—केवल शैक्षणिक/सांस्कृतिक संदर्भ के लिए। कृपया ध्यान दें: किसी की सहमति के बिना उसे प्रभावित करने वाले उपाय नैतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से अनुचित हो सकते हैं; इनका प्रयोग वास्तविक जीवन में करने की सलाह नहीं दी जाती।
प्रमुख शाबर मंत्र (खाने-पीने की वस्तु से प्रयोग हेतु)
1) पान-बीड़ा/लौंग से वशीकरण (प्रचंड वशीकरण)
एक प्रचलित विधि के अनुसार:
मंत्र को पहले 10,000 बार जप कर सिद्ध किया जाता है, फिर 108 बार जप कर आहुति दी जाती है।
उसके बाद एक पान का बीड़ा (या लौंग) को 21 बार इस मंत्र से अभिमंत्रित करके खिलाया जाता है।
मंत्र (देवनागरी):
हाथ पसारूं मुख मलूं,
काची मछली खाऊं ||
आठ पहर चौसट घड़ी,
जग मोह घर जाऊं ||
ईश्वर गौरा पार्वती महादेव की दुहाई ||
(कुछ संस्करणों में अंतिम पंक्ति “ईश्वर गौरा पार्वती महादेव की दुहाई” जोड़ी जाती है।)
2) मिठाई/मीठी वस्तु से मोहिनी वशीकरण
इस विधि में मिठाई, टॉफी या किसी मीठी चीज़ को दाहिने हाथ में लेकर मंत्र 21 बार बोला जाता है और फिर वह वस्तु खिलाई जाती है।
मंत्र (देवनागरी):
रही ओल में बसी, कुल में कुल का बास ला मेरे पास,
सात वरण का फूल ला मेरे पास,
सात सखी को मोह के ला,
और की मोहनी छूट जाय, मेरी मोहनी न छूटे,
हो जा पत्थर की रेख, मेरी आन,
ईश्वर गौरा पार्वती महादेव की दुहाई ||
(यह “मोहिनी” प्रकार का शाबर मंत्र माना जाता है।)
3) नमक/खाने की वस्तु में मिलाकर आकर्षण
एक और विधि में नमक लेकर मंत्र से 7 बार अभिमंत्रित करके खाने या पीने में मिलाकर ग्रहण करवाने का उल्लेख मिलता है।
मंत्र (देवनागरी):
ॐ नमो सर्व जीव वशंकराय कुरु-कुरु स्वाहा।
(कुछ पांडुलिपियों में “वशड्भराय/वशंकराय” जैसे रूप मिलते हैं; स्थानीय परंपरा के अनुसार उच्चारण भिन्न हो सकता है।)
सामान्य सावधानियाँ (शाबर-परंपरा के अनुसार)
शाबर मंत्रों को श्रद्धा और एकाग्रता से करना आवश्यक बताया जाता है; संदेह या डर के साथ प्रयोग नहीं करना चाहिए।
अनेक ग्रंथों में सिद्धि के लिए निर्दिष्ट संख्या में जप (जैसे 1,000–10,000) और कभी-कभी हवन/आहुति का विधान होता है।
खाने-पीने की वस्तुओं को अभिमंत्रित करने की विधियाँ लोक-परंपरा में मिलती हैं, परंतु इनका प्रयोग किसी की सहमति के बिना करना उचित नहीं माना जाता।
महत्वपूर्ण नैतिक-कानूनी चेतावनी
किसी व्यक्ति को बिना उसकी स्पष्ट सहमति के वश में करने का प्रयास उसकी व्यक्तिगत स्वायत्तता के विरुद्ध है और कई देशों में उत्पीड़न/स्टalking/मानसिक प्रभाव डालने जैसी धाराओं के तहत दंडनीय हो सकता है।
शाबर मंत्रों का उल्लेख भारतीय लोक-तांत्रिक/लोक-जादू परंपरा के दस्तावेज़ीकरण के रूप में किया जाता है; इनका प्रयोग वास्तविक जीवन में करने की सलाह नहीं दी जाती। यदि आप रिश्तों में सुधार चाहते हैं, तो संवाद, परामर्श, और पारस्परिक सम्मान पर आधारित उपाय अधिक टिकाऊ और नैतिक होते हैं |
परिचय: यह मंत्र क्या करता है?
यह एक अत्यंत तीव्र और शक्तिशाली शाबर वशीकरण मंत्र है। इस मंत्र द्वारा किसी भी खाने-पीने की वस्तु (जैसे- मिठाई, गुड़, लौंग, सुपारी, या पानी) को अभिमंत्रित करके किसी भी स्त्री, पुरुष, या अधिकारी को खिलाने या पिलाने से वह व्यक्ति एक हफ्ते के अंदर आपके वशीभूत हो जाता है।
इस मंत्र का प्रयोग कब करें? (नैतिकता)
चेतावनी: शाबर मंत्र अकाट्य होते हैं, इसलिए इनका प्रयोग सोच-समझकर और केवल तभी करें जब आपका उद्देश्य सामाजिक और नैतिक रूप से सही हो। नाजायज फायदा उठाने की दृष्टि से किया गया प्रयोग उल्टा असर कर सकता है।
- पति-पत्नी के लिए: यदि पति-पत्नी में लड़ाई-झगड़े होते हैं, पत्नी मायके से नहीं आ रही है, या पति ध्यान नहीं देता, तो घर को टूटने से बचाने के लिए इसका प्रयोग जायज है।
- प्रेम-संबंधों में: यदि आप किसी प्रेमी या प्रेमिका से मन से विवाह करना चाहते हैं, तब इसका प्रयोग कर सकते हैं।
- कारोबार में: यदि आपका कोई अधिकारी या बिज़नेस पार्टनर आपकी बात नहीं सुन रहा है, तो आप इसका प्रयोग कर सकते हैं।
साधना एवं सिद्धि की विधि
शुभ समय (Muhurata)
इस साधना को किसी भी शनिवार की रात्रि से, या होली, दीपावली, दशहरा, या किसी ग्रहण काल में शुरू कर सकते हैं। एक बार सिद्ध होने के बाद, ग्रहण काल में इस मंत्र का जाप करने से इसकी शक्ति सौ गुना बढ़ जाती है।
साधना सामग्री और नियम
- स्थान: कोई भी शुद्ध और एकांत कमरा।
- दिशा और आसन: दक्षिण दिशा को छोड़कर किसी भी दिशा में मुख करके बैठ सकते हैं। आसन और वस्त्र किसी भी रंग के हो सकते हैं।
- पूजन: एक चौकी पर गुरु (या भगवान शिव) का चित्र स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं। एक मिट्टी के कटोरे में लोबान की हल्की धूनी दें।
- माला: इस साधना के लिए मंत्र-सिद्ध और प्राण-प्रतिष्ठित रुद्राक्ष की माला की आवश्यकता होगी।
सिद्धि प्रक्रिया
- गुरु पूजन: सबसे पहले अपने गुरु (या भगवान शिव) का ध्यान करें और उनका पांच वस्तुओं (चंदन, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य) से पूजन करें। इसके बाद गुरु मंत्र की एक माला का जाप करें। गुरु मंत्र " या "ॐ नमः शिवाय " की एक माला जाप करें।
- सर्वार्थ साधक मंत्र: इसके बाद, मुख्य साधना की रक्षा के लिए "गुरु सठ गुरु सठ गुरु है वीर गुरु साहब सुमरो बड़ी भांत सिंगी टोरौं वन कहों मननाऊ करतार सकल गुरून का हर भजे घट्टा पकर उठ जाग चेत सम्भार श्री परमहंस" (सर्वार्थ साधक) मंत्र का 21 बार जाप करें।
- मुख्य मंत्र जाप: अब रुद्राक्ष की माला से नीचे दिए गए मुख्य वशीकरण मंत्र की प्रतिदिन दो माला (216 बार) का जाप करें। यह साधना लगातार 31 दिनों तक करनी है।
मुख्य मंत्र: "कामरु देश, कामाख्या देवी, तहां बसे इस्माइल जोगी। इस्माइल जोगी के दोनो बीड़ा, पहला बीड़ा आती-जाती, दूजा बीड़ा दिखावे छाती, तीजा बड़ा अंग लिपटाय। फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा, दुहाई गुरु गोरखनाथ की।"
प्रयोग विधि
31 दिन की साधना पूरी होने के बाद, यह मंत्र आपके लिए सिद्ध हो जाता है। अब किसी भी खाने-पीने की वस्तु या पानी को हाथ में लेकर, इस मंत्र को सात बार पढ़ें और उस वस्तु पर फूंक मार दें। यह अभिमंत्रित वस्तु जिसे भी खिलाई या पिलाई जाएगी, वह आपके वशीभूत हो जाएगा।
आवश्यक सावधानियां
- ब्रह्मचर्य: साधना के 31 दिनों तक पूर्ण ब्रह्मचर्य (शारीरिक और मानसिक) का पालन करें।
- आचरण: झूठ न बोलें, सात्विक भोजन करें, और अपना आचरण शुद्ध रखें।
- महिलाओं के लिए नियम: यदि किसी महिला को साधना के बीच में मासिक धर्म आ जाता है, तो जितने दिन यह समस्या रहे, उतने दिन साधना रोक दें। जब वह पूरी तरह से शुद्ध हो जाएं, तो साधना को वहीं से आगे शुरू करें।
- याद रखें: ये जानकारी केवल शैक्षणिक/सांस्कृतिक दस्तावेज़ीकरण के लिए है; वास्तविक जीवन में किसी की सहमति के बिना प्रभाव डालने वाले उपाय नैतिक व कानूनी दोनों दृष्टि से अनुचित हैं।
1) शाबर मंत्र सिद्ध करने की मूल विधि (सामान्य ढाँचा)
अधिकांश शाबर-ग्रंथों में सिद्धि का ढाँचा इस प्रकार मिलता है:
संकल्प: पहले दिन संकल्प लें कि आप निश्चित दिनों/संख्या में मंत्र-जप पूरा करेंगे।
जप-संख्या:
कुछ विधियों में 10,000 बार जप से मंत्र सिद्ध बताया गया है।
कुछ में 125,000 बार (पूर्वनिर्धारित दिनों में बाँटकर) जप की बात कही गई है।
कुछ सरल विधियों में ग्रहण/दीपावली/महाशिवरात्रि जैसी रात को 108 या 1008 बार जप से “तुरंत जाग्रत/सिद्ध” माना गया है।
समय-स्थान: रात का समय, एकांत कमरा, तेल का दीपक जलाकर; ग्रहण या पर्व-रात्रियों को विशेष माना जाता है।
माला/गिनती: रुद्राक्ष या किसी भी जाप-माला से गिनती की जा सकती है।
मानसिक स्थिति: शांत चित्त, पूर्ण विश्वास, संदेह/डर से दूर रहना आवश्यक बताया गया है।
2) विशिष्ट विधियाँ (उदाहरण)
(A) 10,000 जप वाली सरल सिद्धि
शांत बैठकर 10,000 बार मंत्र का जप करें; माला से गिनती रखें।
जप के बाद जब भी प्रयोग करना हो, उस वस्तु (जैसे पान/मिठाई/लौंग) को 21 बार उसी मंत्र से अभिमंत्रित करके खिलाया जाता है।
(B) 125,000 जप वाली दीर्घ-साधना
संकल्प लेकर पूर्वनिर्धारित दिनों में कुल 125,000 बार जप पूरा करें; रोज़ एक निश्चित संख्या तय करके कम दिनों में सिद्धि का लक्ष्य रखा जाता है।
सिद्धि के बाद प्रयोग-विधि: उदाहरण के तौर पर बबूल की जड़ का छोटा टुकड़ा दाहिने हाथ में लेकर मंत्र 3 बार बोलकर अभिमंत्रित करना बताया गया है।
(C) ग्रहण/पर्व-रात्रि “त्वरित सिद्धि”
किसी ग्रहण, दीपावली या महाशिवरात्रि की रात एकांत में दीपक जलाकर 108 या 1008 बार जप करने से मंत्र “स्वयं सिद्ध/जाग्रत” माना जाता है।
कुछ विधियों में 5 माला × 27 दिन निरंतर जप से सिद्धि का विधान भी मिलता है।
(D) 21,000 जप + गुड़/मिठाई अभिमंत्रण
एक विधि में 21,000 बार जप के बाद गुड़ को 21 बार जप से अभिमंत्रित करके खिलाने का उल्लेख है।
3) खाने-पीने की वस्तु से प्रयोग की सामान्य रूपरेखा (सिद्धि के बाद)
सिद्धि के बाद प्रचलित लोक-विधियाँ इस प्रकार हैं:
पान/लौंग: पान का बीड़ा या लौंग को 21 बार मंत्र से अभिमंत्रित करके खिलाया जाता है।
मिठाई/गुड़: मिठाई या गुड़ को 21 बार अभिमंत्रित करके खिलाने का विधान।
नमक/भोजन: नमक लेकर 7 बार अभिमंत्रित करके भोजन में मिलाने का उल्लेख कुछ पांडुलिपियों में है।
4) सावधानियाँ (परंपरागत चेतावनी)
शाबर मंत्रों को श्रद्धा और एकाग्रता से करना आवश्यक बताया गया है; संदेह या भय के साथ प्रयोग नहीं करना चाहिए।
अनेक स्रोत स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि गलत इस्तेमाल न करें; नैतिक दृष्टि से किसी की इच्छा-स्वतंत्रता का हनन नहीं करना चाहिए।
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